मराठा आरक्षण आंदोलन- बॉम्बे हाईकोर्ट में आज सुनवाई:कल जरांगे ने अनशन खत्म किया; कोर्ट ने आज सुबह तक मैदान खाली करने को कहा था

महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट में आज तीसरे दिन सुनवाई होगी। कोर्ट ने मंगलवार को आंदोलनकारी नेता मनोज जरांगे को अनशन स्थल आजाद मैदान पर आज सुबह तक रुकने की अनुमति दी थी।

दरअसल, जरांगे की ओर से पेश हुए एडवोकेट सतीश मानेशिंदे ने कोर्ट से मैदान खाली करने के लिए समय देने का अनुरोध किया था। साथ ही उन्होंने पिछली कार्यवाही में दिए गए आदेशों के अनुपालन को लेकर रिपोर्ट दाखिल करने के लिए भी समय मांगा था।

मंगलवार को आंदोलन के नेता मनोज जरांगे ने पांच दिवसीय भूख हड़ताल खत्म कर दी थी। उन्होंने कहा था, ‘हम जीत गए हैं। सरकार ने हमारी मांगें मान ली हैं।’ उन्होंने कहा था कि अगर सरकार आरक्षण की मांगों पर जीआर (आदेश) जारी कर देती है तो वह रात 9 बजे तक मुंबई छोड़ देंगे।

पाटिल बोले- एक हफ्ते में मुआवजा दिया जाएगा

मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल ने मंगलवार दोपहर में समिति के अन्य सदस्यों शिवेंद्रसिंह भोसले, उदय सामंत, माणिकराव कोकाटे के साथ आजाद मैदान में जरांगे से मुलाकात की और समिति द्वारा तैयार किए गए मसौदे पर उनके साथ चर्चा की।

पाटिल ने बताया कि अब तक विरोध प्रदर्शनों के दौरान मरने वालों के परिजनों को उनकी शैक्षणिक योग्यता के हिसाब से एक हफ्ते के अंदर मुआवजा और सरकारी नौकरी दी जाएगी।

समिति ने जरांगे को बताया कि अब तक (मृतक प्रदर्शनकारियों के परिजनों को) 15 करोड़ रुपए की सहायता दी जा चुकी है और बाकी राशि एक हफ्ते के भीतर दे दी जाएगी।

जरांगे के वकील ने बुधवार का समय मांगा

जरांगे के वकील ने मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर और जस्टिस आरती साठे की बेंच से बुधवार दोपहर 11 बजे तक का वक्त मांगा। कहा कि शांतिपूर्ण ढंग से आंदोलन जारी है। लॉ एंड ऑर्डर नहीं बिगड़ेगा, इसकी जवाबदारी लेते हैं। इसके बाद अदालत ने जरांगे की मांग स्वीकार की और मामले की सुनवाई बुधवार दोपहर तक स्थगित कर दी।

मंगलवार को एक्टिंग चीफ जस्टिस (ACJ) श्री चंद्रशेखर और जस्टिस आरती साठे की बेंच ने दो बार सुनवाई की। बेंच ने जरांगे और उनके समर्थकों को मंगलवार दोपहर 3 बजे तक आजाद मैदान खाली करने के आदेश दिए थे। इसके बाद भारी संख्या में पुलिसबल मैदान पहुंचने लगा था। दोपहर 3 बजे के बाद मामले में दूसरी बार सुनवाई हुई।

कोर्ट ने पहले 3 बजे तक मैदान खाली करने का आदेश दिया था

1 सितंबर को पहले दिन की सुनवाई के दौरान बॉम्बे हाईकोर्ट ने आंदोलनकारियों को मंगलवार दोपहर 3 बजे तक मैदान खाली करने को कहा था।

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को भी फटकार लगाई थी। कहा था कि प्रशासन ने उसके आदेशों को लागू क्यों नहीं किया। जबरन मैदान खाली कराने के लिए कदम क्यों नहीं उठाए।

कोर्ट ने कहा था कि अगर बुधवार तक स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो वह कड़ा आदेश जारी करेगी और किसी भी हद तक जाएगी।

कोर्ट ने जरांगे को फटकार लगाई

बॉम्बे हाईकोर्ट ने आजाद मैदान में आमरण अनशन जारी रखने पर जरांगे को फटकार लगाई थी। एक्टिंग चीफ जस्टिस (ACJ) श्री चंद्रशेखर और जस्टिस आरती साठे की बेंच ने कहा था,

अगर 3 बजे तक आजाद मैदान खाली नहीं हुआ को प्रदर्शनकारियों पर कठोर जुर्माना, अदालत की अवमानना ​​की कार्यवाही और अन्य कार्रवाई की जाएगी।

ACJ ने कहा- ‘आप किसी हाईकोर्ट के जस्टिस को पैदल चलकर अदालत पहुंचने पर सिर्फ इसलिए मजबूर नहीं कर सकते क्योंकि आपके प्रदर्शनकारी सड़क पर नाच रहे थे। हम राज्य सरकार से भी जानना चाहते हैं कि वह क्या कर रही थी?’

जरांगे 29 अगस्त से पिछड़ा वर्ग (OBC) श्रेणी के तहत सरकारी नौकरियों और शिक्षा में मराठा समुदाय को 10% आरक्षण देने की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। आज उनके आमरण अनशन का 5वां दिन है। सोमवार से जरांगे ने पानी पीना भी बंद कर दिया है।

ACJ चंद्रशेखर : प्रदर्शन में 5 हजार से ज्यादा लोग शामिल न हों, इसके लिए आपने क्या कदम उठाए?

एडवोकेट मानेशिंदे : आगे से ध्यान रखेंगे, माई लॉर्ड।

ACJ चंद्रशेखर ​​​​​: नहीं, हम अभी जानना चाहते हैं कि जब आपको पता चला कि 1 लाख से ज्यादा लोग मुंबई पहुंच गए हैं, तो आपने क्या कदम उठाए?

एडवोकेट मानेशिंदे : सभी गाड़ियां मुंबई से निकल चुकी हैं और कुछ नवी मुंबई के खारघर में खड़ी हैं।

ACJ चंद्रशेखर : क्या वे (प्रदर्शनकारी) वहां से चले गए हैं?

एडवोकेट मानेशिंदे : नहीं सर, जरांगे अभी भी वहीं हैं। उन्होंने प्रदर्शन की समयावधि बढ़ाने के लिए आवेदन किया है। बाकी लोग जा चुके हैं।

ACJ चंद्रशेखर : यह क्या है? बस इस उम्मीद में कि आपके आवेदन पर कोई आदेश पारित हो जाएगा, आप वहां बैठे नहीं रह सकते। हम साफ-साफ बता रहे हैं, उनको वहां से तुरंत हटना होगा। आज दोपहर 3 बजे के बाद, कोई भी वहां नहीं होना चाहिए। जरूरत पड़ी को हम किसी को भेजेंगे या खुद सड़कों और धरनास्थल पर जाकर देखेंगे कि सभी लोग वहां से चले गए हैं।

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