‘माघ मेला में विवाद से सनातन का अपमान हो रहा’:अयोध्या में बाबा रामदेव बोले-इसका अंत होना चाहिए, सभी को संयम बरतना होगा

“माघ मेला स्नान, ध्यान, तप और संतों की साधना का पावन पर्व है। इसमें किसी भी प्रकार का विवाद हमारे बड़ों ने नहीं सिखाया। किसी प्रकार की उपाधि है किसी के पास तो उसका दायित्व उतना ही बढ़ जाता है। ये जो विवाद हो रहा है, इससे सनातन का अनादर हो रहा है।

सभी को ध्यान देना चाहिए कि हम साधु बने तो साधुता की पहली सीढ़ी निरभिमानी है। भगवान के दासत्व में रहना है। हम क्यों विवाद में पड़ें। अब इस विवाद का अंत हो जाना चाहिए। सभी को संयम बरतना चाहिए।”

ये बातें रामदेव ने शुक्रवार को अयोध्या में मीडिया से बातचीत के दौरान कही। वह श्रीरामवल्लभाकुंज आश्रम के महंत रामशंकर दास वेदांती के 51 वें जन्मोत्सव समारोह में शामिल होने के लिए यहां आए हैं। उन्होंने रामशंकर दास को 51 किलो फूलों की माला पहनाई। उन्हें जन्मदिन की बधाई दी। दोपहर बाद रामदेव वापस रवाना हो जाएंगे।

अयोध्या पवित्र तीर्थ है, विदेशी आक्रांताओं ने इसे नुकसान पहुंचाया

रामदेव ने कहा कि अयोध्या हमारा पवित्र तीर्थ है। जिसे विदेशी आक्रांताओं ने अपने अत्याचारों से बहुत नुकसान पहुंचाया। रामत्व, कृष्णत्व, हनुमत्व और शिवत्व की प्रतिष्ठा जब जन-जन में होगी, तभी सनातन का गौरव समाज और जीवन में स्थापित होगा। सनातन हमारे आचरण में उतरे, राम और राम की मर्यादाएं हमारे जीवन का हिस्सा बनें, इसी संकल्प के साथ वे अयोध्या आए हैं। हमें आपस में नहीं लड़ना चाहिए, बल्कि सनातन की रक्षा के लिए एकजुट होना चाहिए।

वैदिक मंत्रोच्चार के साथ बाबा रामदेव का स्वागत

बाबा रामदेव गुरुवार रात 11 बजे के करीब अयोध्या पहुंचे। यहां से सीधे जानकीघाट स्थित प्रसिद्ध पीठ श्रीरामवल्लभाकुंज आश्रम गए। वहां पर आश्रम के प्रमुख स्वामी राजकुमार दास और दिल्ली से आए रामभक्त संजीव शंकर ने उनका माल्यापर्ण किया। अंगवस्त्र पहनाकर स्वागत किया। इस बीच वैदिक मंत्रोच्चार भी किया गया।

महंत रामशंकर दास के देश भर में हैं भक्त

बाबा रामदेव इस समय चित्रकूट के महंत आलोक दास के साथ श्रीरामवल्लभाकुंज आश्रम में योग की क्लास ले रहे हैं। योग की क्लास खत्म होने के बाद वह महंत रामशंकर दास को जन्मदिन की बधाई देने जाएंगे। महंत रामशंकर दास हनुमान जी के भक्त हैं। वे खुद रोज योग करते हैं। वे मध्य प्रदेश, दिल्ली और बिहार सहित देश के अनेक राज्यों में हजारों रामकथा कह चुके हैं। देश भर में उनके शिष्य है।

E-Paper 2025