क्रिकेटर युवराज सिंह ने जून 2019 में क्रिकेट से संन्यास लेने के पीछे की असली वजह बताई है। युवराज ने सानिया मिर्जा के साथ एक पॉडकास्ट में कहा कि उन्हें उस समय न खेल में खुशी मिल रही थी, न ही टीम मैनेजमेंट और माहौल से वह सम्मान, जिसके वे हकदार थे।
44 साल के युवराज ने कहा, ‘मैं अपने खेल का आनंद नहीं ले पा रहा था। जब मजा ही नहीं आ रहा था, तो खुद से सवाल करने लगा कि आखिर क्रिकेट क्यों खेल रहा हूं। सपोर्ट और सम्मान की कमी भी महसूस हो रही थी।’
वर्ल्ड कप 2019 में चयन न होना टर्निंग पॉइंट बना
युवराज ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट और इंडियन प्रीमियर लीग दोनों से उस समय संन्यास लिया, जब उन्हें 2019 में वनडे वर्ल्ड कप के लिए भारतीय टीम में जगह नहीं मिली। उन्हें टीम में नंबर-4 स्लॉट के लिए चुने जाने की चर्चा थी। युवराज को भी अपने अनुभव के आधार पर उम्मीद थी, लेकिन चयन न होने के बाद उन्होंने मुंबई में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर संन्यास का ऐलान कर दिया।
IPL में उनका आखिरी सीजन 2019 रहा, जिसमें वे मुंबई इंडियंस के साथ थे। युवी को इस सीजन में ज्यादा मैच खेलने काे नहीं मिले थे। युवराज ने माना कि जब आप मानसिक रूप से खेल का लुत्फ उठाना बंद कर देते हैं, तो मैदान पर प्रदर्शन करना और भी कठिन हो जाता है।
मानसिक और शारीरिक रूप से थक चुका था
युवराज सिंह ने साफ किया कि संन्यास लेने के बाद उन्हें मानसिक शांति मिली। उन्होंने माना कि क्रिकेट ने उन्हें बहुत कुछ दिया, लेकिन सही समय पर रुकना भी जरूरी होता है।
युवराज ने कहा, ‘मैं मानसिक और शारीरिक रूप से थक चुका था। यह सोचकर परेशान था कि मैं क्या साबित करने के लिए खेल रहा हूं। जिस दिन मैंने क्रिकेट छोड़ा, उसी दिन मुझे लगा कि मैंने फिर से खुद को पा लिया है।’
एक क्रिकेटर ने पिता से कहा था कि युवराज में प्रतिभा नहीं है
युवराज ने अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए बताया कि एक समय ऐसा भी था जब उनकी काबिलियत पर शक किया गया था। उन्होंने बताया, ‘जब मैं 13-14 साल का था, तब एक सीनियर खिलाड़ी (जो उस समय टीम इंडिया के लिए खेल रहे थे) ने मेरे पिता से शायद औपचारिकता में कुछ कह दिया था। उन्हें लगा होगा कि मुझमें उतनी प्रतिभा नहीं है। मैंने इसे व्यक्तिगत रूप से नहीं लिया, लेकिन मेरे पिता को यह बात बहुत बुरी लगी थी।’
2011 वनडे वर्ल्ड कप के प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट
वनडे वर्ल्ड कप 2011 में युवराज सिंह ने शानदार प्रदर्शन करते हुए प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट का पुरस्कार जीता था। उन्होंने 8 पारियों में 90.50 की औसत से कुल 362 रन बनाए थे, जिसमें चार अर्धशतक और एक शतक शामिल था। उन्होंने टूर्नामेंट में 15 विकेट भी झटके थे। युवराज टूर्नामेंट में चार बार प्लेयर ऑफ द मैच बने और अंत में उन्हें प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट चुना गया।
टूर्नामेंट के बाद युवराज को कैंसर होने का पता चला, जिसके बाद उनका इलाज चला। इसके बाद वे एक साल से ज्यादा समय तक टीम इंडिया से बाहर रहे। पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद उन्होंने सितंबर 2012 में न्यूजीलैंड के खिलाफ टी-20 मैच से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी की।
युवराज के नाम भारत के लिए टी-20 में सबसे तेज अर्धशतक
2007 में महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में भारत ने पहला टी-20 वर्ल्ड कप जीता था। युवराज सिंह ने इस टूर्नामेंट में इंग्लैंड के खिलाफ एक ओवर में छह छक्के लगाकर इतिहास रच दिया था। उन्होंने इसी मैच में महज 12 गेंदों में अर्धशतक जड़कर एक और बड़ा रिकॉर्ड बनाया। यह आज भी भारत की ओर से टी-20 क्रिकेट में सबसे तेज फिफ्टी का रिकॉर्ड है। आउट होने से पहले युवराज ने 16 गेंदों में 58 रन की विस्फोटक पारी खेली थी।