बीएचयू के कला संकाय के पर्यटन प्रबंधन विभाग को यूरोपीय संघ द्वारा इरास्मस प्लस के तहत लगभग आठ करोड़ का अनुदान प्राप्त हुआ है। यह कला संकाय को प्राप्त होने वाला पहला इरास्मस अनुदान है। यही नहीं बीएचयू को प्राप्त अब तक का सबसे बड़ा इरास्मस प्लस फंड भी है। यह परियोजना अक्टूबर 2028 तक जारी रहेगी।
यह परियोजना विशेष रूप से उत्तर प्रदेश में बढ़ते धार्मिक एवं आध्यात्मिक पर्यटन को और मजबूत करेगी। धार्मिक पर्यटन विषयक समकालीन, समावेशी पाठ्यक्रम का विकास, यूरोपीय शिक्षण-अध्ययन मानकों एवं अनुसंधान पद्धतियों का एकीकरण, छात्र-शिक्षक अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण, अध्यापन विनिमय एवं संयुक्त रिसर्च, भागीदार संस्थानों की डिजिटल शिक्षा अवसंरचना को सुदृढ़ करना इस परियोजना में शामिल है।
डॉ. प्रवीन राणा करेंगे नेतृत्व
बीएचयू की शोध टीम का नेतृत्व कला संकाय के पर्यटन प्रबंधन विभाग के डॉ. प्रवीन राणा करेंगे। उनका सहयोग डॉ. शायजू पीजे., प्रो. ज्योति रोहिल्ला एवं डॉ. प्रियंका सिंह करेंगी। डॉ. राणा ने बताया कि इस परियोजना के अंतर्गत अध्यापकों, विद्यार्थियों, हितधारकों को अत्याधुनिक शिक्षण अवसर मिलेंगे।
जोड़े गए आठ देशों के 16 संस्थान
इस परियोजना से आठ देशों के 16 संस्थान जोड़े गए हैं। इन आठ देशों में भारत सहित अल्बानिया, स्पेन, ग्रीस, स्लोवेनिया, मोल्दोवा, माल्टा और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय और कर्नाटक विश्वविद्यालय इस परियोजना में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे।
डच विद्वान इरास्मस के नाम पर बनी है योजना
यूरोप में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 1970 के दशक में एक छात्र-विनिमय कार्यक्रम की अवधारणा विकसित हुई। यूरोपीय समुदाय ने 1987 में आधिकारिक रूप से इरास्मस प्लस नाम दिया।
कार्यक्रम का नाम 15वीं शताब्दी के प्रसिद्ध डच मानवतावादी विद्वान डेसिडेरियस इरास्मस ऑफ रॉटरडैम के सम्मान में रखा गया।