राजस्व मंत्री हेमंत मीणा ने शनिवार को विधानसभा में कहा कि राज्य वृक्ष खेजड़ी के संरक्षण के लिए जल्द ही कानून लाया जाएगा। पर्यावरण संरक्षण एवं आस्था स्थलों के संरक्षण के लिए 2842 हेक्टेयर राजकीय सिवायचक भूमि को ओरण प्रयोजनार्थ आरक्षित किया गया है। अनुदान मांग पर हुई बहस के बाद सदन ने राजस्व विभाग की 23 अरब 34 करोड़ 61 लाख एक हजार रुपए की अनुदान मांगें ध्वनिमत से पारित कर दीं।
हालांकि, मीणा अनुदान मांग की राशि गलत बोल गए, जिसकी वजह से मंत्री से दोबारा प्रस्ताव रखवाया गया। मीणा ने कहा कि आमजन को सुलभ प्रशासन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राजस्व इकाइयों के पुनर्गठन के लिए डॉ. ललित के. पंवार की अध्यक्षता में राज्य प्रशासनिक इकाई पुनर्गठन सलाहकार समिति का गठन किया गया है। प्रशासनिक इकाइयों एवं राजस्व न्यायालयों की पदीय संरचना के संबंध में अनुशंसा करेगी।
नामांतरण की प्रक्रिया आसान
राजस्व मंत्री ने बताया कि प्रदेश सरकार की ओर से भू नामांतरण आवेदन दर्ज एवं स्वीकृत करने की प्रक्रिया को पूरी तरह से पेपरलेस कर दिया गया है। तहसीलदार के स्तर पर आवेदन स्वीकार करने की प्रक्रिया में फिको सिस्टम (फर्स्ट इन फर्स्ट आउट) लागू किया गया है। उद्यमिता को बढ़ाने के लिए कृषि भूमि के गैर कृषि प्रयोजन के लिए कन्वर्जन के लिए निर्धारित समयावधि 45 दिन किया है। गत दो वर्षों में 43 हजार 350 प्रकरणों में 24 हजार 886 हैक्टेयर भूमि का कन्वर्जन किया गया।
वंचित वर्गों के साथ राज्य सरकार
राजस्व मंत्री ने कहा कि अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के किसानों की खातेदारी भूमि पर सौर एवं पवन ऊर्जा परियोजना के लिए कन्वर्जन निशुल्क किया। रेकॉर्डेड रास्ते होने की अनिवार्यता समाप्त किए जाने के प्रावधान किए गए हैं।
खिलाड़ियों को 119 हैक्टेयर भूमि आवंटित
मीणा ने कहा कि खेल एवं खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार के द्वारा अब तक 19 पदक विजेता खिलाड़ियों को 119 हैक्टेयर भूमि आवंटित की जा चुकी है जबकि गत सरकार के पूर्ण कार्यकाल में 10 खिलाडियों को 62 हेक्टेयर भूमि ही आवंटित की गई थी। केन्द्र की एग्रीस्टैक परियोजनान्तर्गत के तहत 82 लाख किसानों को पंजीकृत किया जा चुका है इसमें राजस्थान देश में प्रथम स्थान पर है।