शेखावत बोले-मंत्रीमंडल विस्तार पर 5-7 मिनट में हो जाएगी चर्चा:पंचायतीराज चुनावों को 4 टुकड़ों में बांटने वाले पापी; कांग्रेस अब खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे

राजस्थान सरकार में मंत्रीमंडल के सवालों को लेकर चल रही चर्चा के बीच केंद्रीय मंत्री गजेंद्रसिंह शेखावत ने कहा- यह मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार है। उनके लिए छोड़ देना चाहिए। जिनको जो जिम्मेदारी मिलेगी, वो काम करेंगे।

उन्होंने कहा- फिलहाल इस विषय पर कोई चर्चा हुई नहीं है। जब होगी तो इस विषय पर घंटों, महिनों की आवश्यकता नहीं होगी। 5-7 मिनट में चर्चा हो जाएगी। जब कभी चर्चा होगी तो साथ में बैठकर निर्णय करना यही बीजेपी की कार्य पद्धति का हिस्सा है। लेकिन फिर कहूंगा कि यह मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार है।

केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत शनिवार को सामाजिक प्रोग्राम में शामिल होने के लिए जैसलमेर से बाड़मेर पहुंचे थे। सर्किट हाउस में जिला कलेक्टर टीना डाबी, एसपी नरेंद्र सिंह मीना ने उनकी अगुआई की। इस दौरान भाजपा नेताओं ने भी उनका स्वागत किया।

पंचायती राज चुनावों को चार टुकड़ों में बांटने का आरोप

गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा- एसआईआर पूरा होने पर वोटर लिस्ट शुद्ध हो जाएगी तो शुद्ध मन से चुनाव होंगे। पंचायती राज और नगर निकाय चुनाव एक साथ करवाए जाएं, यह सीएम भजनलाल शर्मा का स्टैंड है। मैं उनका समर्थन करता हूं।

शेखावत ने कहा- आज वे(अशोक गहलोत) चुनाव की बातें कर रहे है, मैं केवल याद दिलाना चाहता हूं कि पंचायती राज चुनावों को चार टुकड़ों में बांटने का पाप किसने किया था। जो पापी है, उनको अपने गिरेबां में झांककर देखना चाहिए, दूसरों पर प्रश्न खड़े नहीं करने चाहिए।

देश में शुचिता, स्पष्टता, पारदर्शी, ईमानदारी के के साथ चुनाव हो, इसके लिए संविधान ने चुनाव आयोग की व्यवस्था की है। वोटर लिस्ट सही रहे और चुनाव ठीक से करवाने की जिम्मेदारी चुनाव आयोग की है। अपनी जिम्मेदारी का संवैधानिक ढंग से करने को अगर कोई ठीक से नहीं मान रहा है, तो अनुचित है।

राहुल गांधी का एसआईआर को लेकर स्टैंड क्लियर नहीं

शेखावत ने कहा- मैं राजनीतिक परिदृश्य में बात करूं तो महाराष्ट्र का चुनाव हुआ और नतीजों में बीजेपी और गठबंधन प्रचंड बहुमत से जीता था। तभी इसी कांग्रेस पार्टी के नेता राहुल गांधी ने कहा था कि वोटर लिस्ट सही नहीं है। उसमें गड़बड़ है, इसके कारण चुनाव का परिणाम इस तरीके से आया है। जब बिहार के चुनाव से पहले वोटर लिस्ट पर काम करना शुरू किया। तो एसआईआर का विरोध किया।

चुनाव के समय में क्यूं कर रहे है? अभी राजस्थान समेत 12 राज्यों में चुनाव आसान नहीं है, तब एसआईआर का काम शुरू किया तो विपक्ष कह रहा है कि जहां चुनाव नहीं है, वहां पर क्यूं किया जा रहा है।

मुझे लगता है कि उनको अपना स्टैंड तय कर लेना चाहिए। बिहार के चुनाव से पहले उन्होंने हाइड्रोजन बम फोड़ने की घोषणा की थी। बताया था कि इस कारण एक लाख वोट फर्जी है। जब फर्जी वोट का निस्तारण हो रहा है तो कह रहे है कि फर्जी वोट क्यूं हटाए जा रहे है। वो अपने स्टैंड पर क्लियर नहीं है। यह इसलिए है कि कांग्रेस पार्टी ने हमेशा ही इस तरीके के दुर्विचार करके चुनाव जीतें है।

1960 के दशक से लेकर कई बार मत पेटियों को लूट करके, मत-पत्रों को इधर-उधर करके चुनाव के रिजल्ट को प्रभावित किया है। जीवनपर्यंत सत्ता इसी से प्राप्त की है। अब जब इवीएम से, ईमानदारी चुनाव होने लगा है। देश की राजनीति का नैरेटिव बदल गया है।

नरेंद्र मोदी के 2014 में दिल्ली की राजनीति में अब धुरी विकास की हो गई है। बंटवारे की राजनीति करने वाले लोगों के मुंह पर बिहार चुनाव के रिजल्ट से एक करारा तमाचा जनता ने लगाया है। एक कहावत है कि खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे, अब वो खंभे को नोचने का प्रयास कर रहे हैं।

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