सुप्रीम कोर्ट ने अगस्ता वेस्टलैंड केस में याचिका खारिज की:कहा- अमीर लोग केस दर्ज होने पर कानून को चुनौती देने लगते हैं

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी हेलीकॉप्टर घोटाले में आरोपी वकील गौतम खेतान की याचिका पर सख्त रुख अपनाया।

कोर्ट ने इसे ट्रायल से बचने की कोशिश बताया और याचिका खारिज कर दी। खेतान ने मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) की एक धारा को चुनौती दी थी।

सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने कहा- यह नया चलन बन गया है कि अमीर आरोपी ट्रायल का सामना करने के बजाय कानून की वैधता को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने लगते हैं।

कोर्ट ने कहा कि ऐसे लोग सोचते हैं कि वे सिस्टम को बायपास कर सकते हैं, लेकिन हम ऐसा नहीं होने देंगे। उन्हें आम नागरिक की तरह ट्रायल का सामना करना चाहिए।

सीनियर वकील सिद्धार्थ लूथरा ने दलील में कहा कि यह याचिका किसी विशेषाधिकार के लिए नहीं, बल्कि पहले से लंबित विजय मदनलाल चौधरी केस की समीक्षा याचिकाओं से जुड़ी है, लेकिन कोर्ट ने इसे मानने से इनकार कर दिया।

तारीखों में अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर घोटाला

1999-2005: भारत सरकार ने VVIP यात्राओं के लिए नए हेलीकॉप्टरों की जरूरत बताई। शुरुआती तकनीकी शर्तें तय हुईं, जिनमें ऊंचाई (Altitude) और केबिन हाइट जैसे मानक शामिल थे।

2006-2009: टेंडर प्रक्रिया शुरू हुई। आरोप लगे कि तकनीकी शर्तों में बदलाव किए गए ताकि कुछ कंपनियां खासकर AgustaWestland पात्र हो सकें।

फरवरी 2010: भारत सरकार और अगस्ता वेस्टलैंड के बीच 12 AW-101 VVIP हेलीकॉप्टर खरीदने का करार। सौदे की कीमत करीब ₹3,600 करोड़।

2011-2012: तीन हेलीकॉप्टर भारत पहुंचे। भुगतान की प्रक्रिया जारी रही।

फरवरी 2013: इटली की अदालत में सुनवाई के दौरान खुलासा कि सौदे के लिए करीब €51 मिलियन (लगभग ₹350 करोड़) की रिश्वत दी गई। मामला अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में आया।

मार्च-दिसंबर 2013: भारत में CBI और ED ने केस दर्ज कर जांच शुरू की। सौदे में बिचौलियों और पूर्व वायुसेना अधिकारियों की भूमिका की जांच तेज हुई।

जनवरी 2014: भारत सरकार ने अगस्ता वेस्टलैंड सौदा रद्द किया। कंपनी को ब्लैकलिस्ट किया गया। मिले हुए हेलीकॉप्टर वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू हुई।

2014-2015: इटली की निचली अदालत में कुछ आरोपियों को सजा, बाद में ऊपरी अदालत में फैसले बदले। भारत में जांच एजेंसियों ने चार्जशीट दाखिल की।

2016-2017: कथित बिचौलिया क्रिश्चियन मिशेल जांच के केंद्र में आया। प्रत्यर्पण की कोशिशें तेज हुईं।

दिसंबर 2018: क्रिश्चियन मिशेल को दुबई से प्रत्यर्पित कर भारत लाया गया। उनसे CBI और ED ने पूछताछ की।

2019-2022: मनी लॉन्ड्रिंग और भ्रष्टाचार के मामलों में अदालती सुनवाई जारी। कुछ मामलों में जमानत, कुछ में हिरासत बढ़ी।

2023-2026: केस अलग-अलग अदालतों में पेंडिंग। न्यायिक प्रक्रिया जारी है।

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