सुप्रीम कोर्ट बोला-थानों में CCTV नहीं चलना निगरानी में चूक:AI तकनीक का इस्तेमाल हो, कैमरा बंद होने पर अथॉरिटी को तुरंत अलर्ट मिले

सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के पुलिस थानों में CCTV कैमरों के काम नहीं करने को लेकर चिंता जताई है। कोर्ट ने इसे निगरानी की कमी बताया और कहा कि कैमरों की फीड देखने के लिए ऐसा कंट्रोल रूम होना चाहिए, जहां इंसानी दखल न हो। अगर कोई कैमरा बंद हो जाए तो तुरंत अलर्ट मिले। कोर्ट ने इस मामले में 26 सितंबर को आदेश देने की बात कही है।

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने कहा कि हर पुलिस स्टेशन का निरीक्षण किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराया जाना चाहिए। कोर्ट ने सुझाव दिया कि इस काम के लिए किसी IIT को शामिल किया जा सकता है, जो ऐसा सॉफ्टवेयर बनाए जिससे सभी CCTV फीड एक जगह पर एआई (एआई) के जरिए खुद-ब-खुद मॉनिटर हों।

कोर्ट ने कहा कि अगर कोई कैमरा बंद होता है तो इसकी जानकारी तुरंत संबंधित लीगल सर्विस अथॉरिटी या निगरानी एजेंसी को मिलनी चाहिए।

2018 और 2020 में दिए थे अहम आदेश सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में पुलिस थानों में मानवाधिकार उल्लंघन रोकने के लिए सीसीटीवी लगाने का आदेश दिया था। दिसंबर 2020 में कोर्ट ने कहा था कि हर पुलिस स्टेशन के एंट्री-एग्जिट पॉइंट, लॉकअप, गलियारे, रिसेप्शन और लॉकअप के बाहर के हिस्सों में कैमरे लगें।

ये कैमरे नाइट विजन वाले हों और ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग कर सकें। साथ ही, इनका डेटा कम से कम एक साल तक सुरक्षित रखा जा सके।

राजस्थान में 8 महीने में 11 पुलिस कस्टडी में मौतें सुप्रीम कोर्ट ने 4 सितंबर को एक मीडिया रिपोर्ट पर स्वतः संज्ञान लिया था, जिसमें बताया गया था कि राजस्थान में पिछले आठ महीनों में पुलिस हिरासत में 11 मौतें हुई हैं। इनमें से 7 मामले उदयपुर के हैं।

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