बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को मौत की सजा के खिलाफ उनकी बैन हो चुकी पार्टी अवामी लीग ने आज देशभर में बंद का ऐलान किया है। अवामी लीग ने ढाका की इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (ICT) के फैसले को पूरी तरह से खारिज कर दिया है।
पार्टी ने अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस और मंत्रियों से तुरंत इस्तीफे की मांग की है। अवामी लीग के नेता जहांगीर कबीर नानक ने पार्टी के फेसबुक पेज पर एक वीडियो जारी कर कहा कि यह फैसला पक्षपातपूर्ण और राजनीतिक बदला लेने वाला है।
नानक ने अदालत की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाए कि,
- मुकदमा 14 अगस्त को शुरू हुआ और 17 नवंबर को फैसला आ गया।
- दो महीने की अवधि में अदालत ने सिर्फ 20 दिन सुनवाई की।
- 84 गवाहों में से सिर्फ 54 की गवाही सुनी गई।
- मुख्य जज एक महीने से गैर-हाजिर थे, फिर भी फैसला सुना दिया गया।
हत्या का आदेश देने पर हसीना को मौत की सजा
हसीना को इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (ICT) ने हत्या के लिए उकसाने और हत्या का आदेश देने के लिए मौत की सजा दी है। ICT ने उन्हें 5 मामलों में आरोपी बनाया था। बाकी मामलों में उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई गई।
ट्रिब्यूनल ने शेख हसीना को जुलाई 2024 के छात्र आंदोलन के दौरान हुई हत्याओं का मास्टरमाइंड बताया। वहीं दूसरे आरोपी पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमान खान को भी हत्याओं का दोषी माना और फांसी की सजा सुनाई। सजा का ऐलान होते ही कोर्ट रूम में मौजूद लोगों ने तालियां बजाईं।
तीसरे आरोपी पूर्व IGP अब्दुल्ला अल-ममून को 5 साल जेल की सजा सुनाई गई। ममून हिरासत में हैं और सरकारी गवाह बन चुके हैं। कोर्ट ने हसीना और असदुज्जमान कमाल की प्रॉपर्टी जब्त करने का आदेश दिया है। फैसले के बाद बांग्लादेश के अंतरिम पीएम मोहम्मद यूनुस ने भारत से हसीना को डिपोर्ट करने की मांग की है।
भारत बोला- बांग्लादेश की शांति के लिए बातचीत जारी रखेंगे
बांग्लादेश में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के खिलाफ इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल द्वारा सुनाए गए फैसले पर भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने आधिकारिक बयान जारी किया है।
बयान में कहा गया है कि भारत ने इस फैसले को संज्ञान में लिया है। भारत ने याद दिलाया कि वह बांग्लादेश का करीबी पड़ोसी है और बांग्लादेश के लोगों के हित, शांति, लोकतंत्र, सभी समुदायों की भागीदारी और देश में स्थिरता के लिए प्रतिबद्ध है।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत, बांग्लादेश की शांति और स्थिरता को ध्यान में रखते हुए सभी पक्षों के साथ रचनात्मक तरीके से बातचीत जारी रखेगा।
हसीना ने जिस कोर्ट की स्थापना की, उसी ने सजा सुनाई
हसीना को मौत की सजा सुनाने वाले इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल की स्थापना उन्होंने ही की थी। इसे 2010 में बनाया गया था। इस कोर्ट को 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान हुए वॉर क्राइम्स और नरसंहार जैसे मामलों की जांच और सजा के लिए बनाया गया था।
हालांकि इस ट्रिब्यूनल को बनाने के लिए 1973 में ही कानून बना दिया गया था, लेकिन दशकों तक प्रक्रिया रुकी रही। इसके बाद 2010 में हसीना ने इसकी स्थापना की ताकि अपराधियों पर मुकदमा चल सके।