राजस्थान हाईकोर्ट ने एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए। कोर्ट ने नगर निगम ग्रेटर के तत्कालीन वित्तीय सलाहकार अचलेश्वर मीणा के खिलाफ दर्ज एफआईआर और सभी आपराधिक कार्रवाई को रद्द कर दिया है।
जस्टिस चंद्रप्रकाश श्रीमाली की अदालत ने यह आदेश अचलेश्वर मीणा की याचिका को स्वीकार करते हुए दिए।
वहीं अपने फैसले में अदालत ने कहा- बिना पुख्ता सबूत और सूचना के आधार पर बिना वारंट किसी के घर की तलाशी लेने को कानून के अनुरूप नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने एसीबी की फोन टेपिंग की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए। कहा- फोन टेपिंग में नियमों की पालना नहीं की गई।
पहले गिरफ्तारी, बाद में एफआईआर की दर्ज
एसीबी की रिपोर्ट के अनुसार- उसे सूचना मिली थी कि नगर निगम के वित्तीय सलाहकार अचलेश्वर मीणा, सह आरोपी धनकुमार से ठेकेदारों से एकत्र किए गए रुपए लेकर अपने घर गए हैं। इस पर एसीबी ने उनके घर में घुसकर तलाशी ली।
एसीबी को उनके घर से रिश्वत की राशि बरामद नहीं हुई। इस पर एसीबी की ओर से कहा गया कि आरोपी ने राशि खुर्द-बुर्द कर दी।
वहीं आरोपी के एडवोकेट सुधीर गुप्ता ने कोर्ट को बताया- एसीबी ने 7 जनवरी 2022 को याचिकाकर्ता के घर जबरन घुसकर बिना वारंट के तलाशी ली और उसे गिरफ्तार कर लिया। अगले दिन 8 जनवरी को शाम 5 बजे मजिस्ट्रेट के सामने पेश करतीन दिन के रिमांड पर ले लिया।
8 जनवरी को शाम 5:15 बजे आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। इसी आधार पर याचिकाकर्ता के घर की तलाशी ली गई, जो सही नहीं निकली। एसीबी राशि को खुर्द-बुर्द करने के कोई ठोस तथ्य भी पेश नहीं कर सकी।
फोन टेपिंग में नियमों की पालना नहीं
कोर्ट ने अपने आदेश में एसीबी की फोन टेपिंग की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए। अदालत ने कहा- इस मामले में एसीबी डीजी ने गृह सचिव को लोक सुरक्षा का मुद्दा बताते हुए आरोपी व सह आरोपियों के फोन टेप करने की मंजूरी मांगी, लेकिन विशेष गृह सचिव ने बिना अधिकार के ही 60 दिन की अनुमति दे दी। इसके बाद गृह सचिव ने इस अनुमति को 60 दिन के लिए बढ़ा दिया।
कोर्ट ने कहा- फोन टेपिंग में भारतीय टेलीग्राफ नियम-1951 की पालना नहीं की गई। एक्ट के तहत किसी भी व्यक्ति के खिलाफ फोन टेपिंग की अनुमति देने के बाद उसे 7 दिन में रिव्यू कमेटी के समक्ष रखने का प्रावधान है। लेकिन उसकी पालना यहां नहीं की गई।
वहीं फोन टेपिंग की प्रक्रिया में यह भी स्पष्ट नहीं किया गया कि आरोपी के कौन से कृत्य से लोक सुरक्षा को खतरा पैदा हो रहा था। वहीं ऐसी कौनसी आपातकालीन परिस्थितियां थी, जिसके आधार पर फोन टेप किया गया। कोर्ट ने इसे याचिकाकर्ता के निजता के अधिकार का उल्लंखन माना।