यमुनानगर का आम खास, हरियाणा में नंबर वन उत्पादन, ये किस्‍म सबसे खास

यमुनानगर के आम की बात ही निराली है। बागान महकने लगे हैं। कई खास किस्में प्रदेश भर में पहचान बना रही हैं। क्वालिटी और रकबा दोनों के लिहाज से नंबर एक पर है। यही कारण है कि उद्यान विभाग की ओर से पिंजौर में आयोजित प्रदेश स्तरीय मैंगो मेले में 13 वर्ष से अपनी धाक जमाए हुए है। कभी अनुसंधान केंद्र बूडिय़ा के हिस्से प्रथम पुरस्कार आता है, तो भी किसी किसान की झोली में जाता है। उत्पादन की यदि बात की जाए तो करीब 5600 हेक्टेयर पर है।

इन किस्मों पर हर साल फ्रूटिंग 

आम्रपाली और मल्लिका जैसी खास किस्में भी जिले के बागानों का हिस्सा हैं। हर वर्ष फल आना इस किस्म की खास बात है। हालांकि तीन-चार वर्ष में उत्पादन शुरू हो जाता है, लेकिन विशेषज्ञ 12 वर्ष की उम्र में पेड़ को परिपक्व मानते हैं। इस उम्र तक एक पेड़ पर डेढ़ से दो क्विंटल फल आ जाता है। मल्लिका किस्म का एक आम 500-600 ग्राम का होता है। मिठास अधिक व गुठली छोटी होना इसकी दूसरी बड़ी विशेषता है। जबकि दशहरी, लंगड़ा, चौसा व रामकेला जैसी किस्मों के पेड़ों पर तीसरे वर्ष फ्रूटिंग होती है।

कृषि विश्वविद्यालय का है अपना बाग

चौधरी चरण सिंह कृषि विश्वविद्यालय हिसार की ओर से बूडिय़ा में संचालित क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र का 22 एकड़ में बाग है। इसमें दशहरी, रामकेला, आम्रपाली, मल्लिका व अन्य किस्में हैं। आम के साथ-साथ यहां लीची, लौकाट व नासपाती की फसल भी होती है। ज्यादा फोकस आम पर ही रहता है। मैंगो मेले में अनुसंधान के बाग का आम कई बार प्रथम पुरस्कार हासिल कर चुका है। इसके अलावा किसानों ने भी बड़े स्तर पर अपने बाग लगाए हुए हैं। अधिकांश बाग ठेके पर दे दिए जाते हैं। छछरौली व खिजराबाद एरिया में आम के बागों की संख्या अधिक है।

तैयार होंगे रंगदार आमों के पेड़

चौधरी चरण सिंह कृषि विश्वविद्यालय हिसार के क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र के इंचार्ज व वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. सुलेमान मोहम्मद बताते हैं कि आम उत्पादन में यमुनानगर पहले स्थान पर है। हालांकि आम के बाग अंबाला व पंचकूला में भी हैं, लेकिन यमुनानगर में रकबा अधिक है। अनुसंधान में बेहतर किस्में तैयार कर किसानों तक पहुंचाई जा रही हैं। इस बार हमने आम की खास किस्म पूसा, अरुनीमा, पूसा-सूर्य, पूसा श्रेष्ठा, पूसा पितांबर व पूसा लालिमा तैयार की है। यह रंगदार किस्में हैं। दो वर्ष के बाद फ्रूङ्क्षटग भी शुरू हो जाती है। इन किस्मों के आमों की डिमांड भी अच्छी है।