DSGPC Election 2021: दिल्ली में कुछ बड़े सिख नेताओं पर है भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप

DSGPC Election 2021: दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (डीएसजीपीसी) चुनाव के कुछ माह शेष रह गए हैं। इसे लेकर सभी पार्टियों की संगठनात्मक गतिविधियां तेज हो गई है। इसके साथ ही आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति को भी धार मिल रही है। सभी पार्टियां एक दूसरे पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं। खास बात यह है कि प्रमुख दलों के नेता किसी न किसी आरोप में घिरे हुए हैं। अदालत में इन सभी के मामले विचाराधीन है। सियासी मैदान में इन आरोपों को ही मुद्दा बनाया जा रहा है। एक तरह से चुनाव में भ्रष्टाचार बड़ा मुद्दा बन गया है।

डीएसजीपीसी में तीन प्रमुख पार्टियों के बीच मुकाबला माना जा रहा है। शिरोमणि अकाली दल (शिअद बादल) का इसस समय कमेटी पर कब्जा है और इसके सामने तीसरी बार जीत दोहराने की चुनौती है। इसे पार्टी से अलग होने वाले कमेटी के पूर्व अध्यक्ष मनजीत सिंह जीके की जग आसरा गुरु ओट (जागो) के साथ ही पूर्व परमजीत सिंह सरना की पार्टी शिरोमणि अकली दल दिल्ली (सरना) से चुनौती मिल रही है। वर्ष 2013 के चुनाव में शिअद बादल ने सरना के खिलाफ भ्रष्टाचार का मुद्दा बनाया था। सरना के खिलाफ बाला साहिब अस्पताल को निजी हाथों में देने के मामले में शिअद बादल ने मामला दर्ज कराया था। उस चुनाव में शिअद बादल को जीत मिली थी और मनजीत सिंह जीके कमेटी के अध्यक्ष बने थे।

वर्ष 2017 में भी शिअद बादल को जीत मिली और दूसरी बार जीके अध्यक्ष बने, लेकिन उनका तत्कालीन महामंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा के साथ विवाद शुरू हो गया। उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे। पुलिस से शिकायत की गई और मजबूरन उन्हें पार्टी के साथ ही कमेटी अध्यक्ष पद छोड़ना पड़ा। उनकी जगह सिरसा अध्यक्ष बनें। पिछले दिनों अदालत के आदेश पर जीके के खिलाफ मामला दर्ज हो गया है।

वहीं, सरना गुट की शिकायत पर कमेटी में गलत तरीके से बिल भुगतान के आरोप में जीके के कार्यकाल वाली पूरी गवर्निंग बाडी के खिलाफ मामला दर्ज हुआ है। उस समय सिरसा महामंत्री थे। यह कार्रवाई भी अदालत के आदेश पर की गई है। इस तरह से वर्तमान व पूर्व अध्यक्षों के खिलाफ भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं। तीनों अपने आप को निर्दोष व दूसरे को आरोपित साबित करने में लगे हुए हैं। रोज एक दूसरे के खिलाफ बयान जारी करने के साथ ही ट्विटर और फेसबुक पर भी अभियान चला रहे हैं।