किसान खेतों में ही पराली से बना सकेंगे खाद, इसके लिए सरकार मंगा रही इटावा से 500 बॉटल बायो डी कंपोजर

खेतों में पराली जलाने की समस्या बढ़ती ही जा रही है। प्रशासन ने 7 किसानों पर मुकदमे भी दर्ज करा दिए हैं फिर भी किसान खेतों में पराली जला रहे हैं। परिणाम स्वरूप प्रदूषण भी बढ़ रहा है और सांस की बीमारी से जूझ रहे लोगों को परेशानी हो रही है।

किसान अपने खेतों में ही पराली से खाद बना सकें इसके लिए बायो डी कंपोजर उपलब्ध कराने की तैयारी है। इसके लिए इटावा से 500 बॉटल बायो डी कंपोजर मंगाया जाएगा। शासन स्तर से इटावा जिले को मारो डी कंपोजर की पहली खेप मिल गई है।

जबकि कानपुर प्रशासन को अभी मिलना बाकी है। ऐसे में तय किया गया है कि इटावा से ही बायो डी कंपोजर मंगा कर किसानों को बांट दिया जाए और जब कानपुर को डी कंपोजर आवंटित हो जाएगा तो इटावा प्रशासन को दे दिया जाएगा। 20 से 25 दिनों में किसान पराली और अन्य कृषि अपशिष्ट से बायो डिकम्पोजर की मदद से जैविक खाद बना सकेंगे। इससे पराली जलाने की समस्या का समाधान भी हो जाएगा और उन्हेंं जैविक खाद भी पर्याप्त मात्रा में मिल जाएगी।

उपनिदेशक कृषि धीरेंद्र सिंह का कहना है कि वहां के उपनिदेशक से वार्ता हो गई है जल्द ही वहां से मंगा कर किसानों में इसका वितरण शुरू कर दिया जाएगा। उधर सीडीओ ने जिला कृषि अधिकारी डीपीआरओ और अधिकारियों से कहा है कि तत्काल किसानों से पराली व अन्य कृषि अपशिष्ट ले ले और मनरेगा के तहत गड्ढे खोदवा कर उससे खाद बनवाएं और फिर वही खाद किसानों को दें।