2019 के बाद रिकॉर्ड महंगा हुआ कच्चा तेल, भारत ने ओपेक देशों पर दाम कम रखने के लिए बढ़ाया दबाव

देश में पेट्रोल, डीजल के खुदरा दाम रिकार्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बीच भारत ने तेल निर्यातक देशों के संगठन ‘ओपेक’ पर कच्चे तेल के दाम को कम करने के लिए दबाव डाला है। मौजूदा समय में कच्चे तेल के दाम 75 डालर प्रति बैरल से ऊपर निकल गये हैं। यह दाम अप्रैल 2019 के बाद सबसे ऊंचे हैं। भारत ने ‘ओपेक’ से कहा कि दाम को ‘तर्कसंगत दायरे’ में रखा जाए और उत्पादक देशों को तेल उत्पादन में की गई कटौती को अब चरणबद्ध ढंग से समाप्त कर देना चाहिये। भारत दुनिया का तीसरा बड़ा तेल आयातक देश है।

कच्चे तेल के दाम बढ़ने से देश में पेट्रोल और डीजल के खुदरा दाम रिकार्ड ऊंचाई पर पहुंच गये हैं। नौ राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों में पेट्रोल 100 रुपये लीटर से ऊपर निकल गया है जबकि राजस्थान और ओड़ीशा में डीजल 100 रुपये लीटर से ऊपर बिक रहा है।

भारत के पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने ओपेक के महासचिव मोहम्मद सानुसी बरकिंडो के साथ वर्चुअल मीटिंग में कच्चे तेल के दाम को लेकर हो रही चिंता से अवगत कराया।

उल्लेखनीय है कि सउदी अरब जैसे ओपेक देश परंपरागत रूप से कच्चे तेल के सबसे बड़े स्रोत रहे हैं और भारत इनसे तेल का आयात करता रहता है। लेकिन पिछले कुछ समय से ओपेक और उसके सहयोगी देश जिन्हें ओपेक प्लस कहा गया है, भारत की तेल उत्पादन बढ़ाने की मांग को अनसुना कर रहे हैं, जिससे उसे अपने कच्चे तेल के आयात के लिये नये स्रोत तलाशने पड़ रहे हैं। मई में भारत के कुल तेल आयात में ओपेक देशों से होने वाले तेल आयात का हिस्सा कम होकर 60 प्रतिशत रह गया जो कि इससे पिछले महीने 74 प्रतिशत रहा था।

ओपेक द्वारा वर्चुअल मीटिंग के बाद जारी बयान में कहा गया है, ‘मंत्री प्रधान ने इस बात को ध्यान में रखते हुये कि भारत तेल का प्रमुख उपभोक्ता और आयातक देश है, आर्थिक और सामाजिक प्रगति के लिये ईंधन की सस्ते दाम पर और नियमित आपूर्ति के महत्व को रेखांकित किया।’