Interview: आशा नेगी का बचपन में जिम्मी शेरगिल पर था क्रश, ‘कॉलर बॉम्ब’ के सेट पर पास जाने में होती थी झिझक

टीवी पर तक़रीबन नौ साल बिताने के बाद एक्ट्रेस आशा नेगी ने ओटीटी प्लेटफॉर्म्स का रुख़ किया। 2019 में आशा ऑल्ट बालाजी की सीरीज़ बारिश में शरमन जोशी के साथ फीमेल लीड रोल में नज़र आयीं। इसके बाद अभय 2, लव का पंगा और ख़्वाबों के परिंदे में आशा ने प्रमुख किरदार निभाये। 2020 में आशा नेटफ्लिक्स की फ़िल्म लूडो में अभिषेक बच्चन के किरदार की पत्नी के रोल में दिखीं।

अब डिज़्नी प्लस हॉस्टार वीआईपी पर 9 जुलाई को रिलीज़ हो रही थ्रिलर फ़िल्म ‘कॉलर बॉम्ब’ में जिम्मी शेरगिल के साथ लीड रोल में दिखेंगी। आशा ओटीटी की दुनिया में आकर ख़ुश और उत्साहित हैं। यह पूछे जाने पर कि टीवी और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के लिए कामकाज की शैली में वो क्या फ़र्क पाती हैं, आशा कहती हैं- ”टीवी और ओटीटी प्लेटफॉर्म में बहुत फ़र्क है।

टेलीविज़न में हम लोगों को बहुत जल्दी-जल्दी काम करना पड़ता है। आज का टेलीकास्ट है या कल का टेलीकास्ट है। उस वजह से परफॉर्मेंस पर ध्यान नहीं दे पाते। क्वालिटी वर्क पर ध्यान नहीं दे पाते हैं। ओटीटी पर तसल्ली से काम होता है। आपने एक प्रोजेक्ट किया। वो एक-दो महीनों में ख़त्म हो गया। आप आगे बढ़ जाते हैं। कोई नया कैरेक्टर, कोई नया शो, कोई नई फ़िल्म करते हैं।”

टीवी अब आशा की प्राथमिकता नहीं है। कहती हैं- ”अब मुझे नहीं लगता कि मेरे अंदर इतना धैर्य बचा है कि 2-3 साल तक कोई टीवी शो करती रहूं। हां, जो लोग आर्थिक सुरक्षा चाहते हैं, उनके लिए टेलीविज़न बहुत बढ़िया माध्यम है। टेलीविज़न शो जितना लम्बा चल रहा है, उतना अच्छा है। अब मैं रचनात्मक रूप से अधिक संतुष्ट होना चाहती हूं। आशा आगे कहती हैं कि मुझे लगता है कि वेब माध्यम, फ़िल्म और टेलीविज़न के बीच एक ख़ूबसूरत ब्रिज की तरह है, क्योंकि वेब पर कोई टेलीविज़न एक्टर नहीं है और कोई फ़िल्म एक्टर नहीं है। वेब में सब बस एक्टर हैं।”

आशा जिस तरह का काम करती रही हूं, ‘कॉलर बॉम्ब’ में उससे बिल्कुल अलग नज़र आ रही हैं। अपने किरदार और फ़िल्म की बैकग्राउंड के बारे में आशा बताती हैं- ”हिमाचल प्रदेश का एक छोटा-सा गांव है, जहां पर हॉस्टेज सिचुएशन आयी है। ऐसी सिचुएशन है कि गांव वालों और हम सब पुलिस वालों ने कभी नहीं देखी। पहाड़ का छोटा-सा गांव है, जहां क्राइम बमुश्किल होता है।

मेरे निर्देशक ने मुझसे यही बोला कि गन के साथ ज़्यादा कॉन्फिडेंट नहीं दिखना है, क्योंकि इस बंदी ने आज से पहले गन चलाई ही नहीं होती। कोई क्राइम नहीं है, इसलिए लाठियों से ही अपना काम कर लेते हैं। गन की ज़रूरत ही नहीं पड़ी कभी। मुझे अपने किरदार के ज़रिए कुछ ऐसा भी दिखाना पड़ा कि गन वगैरह यूज़ करने में मैं कच्ची हूं। कोई पुलिसवाली पहली बार गन यूज़ करे तो वो कैसे करेगी! बिलकुल उस तरह। इन सब बातों का बहुत ध्यान रखना पड़ा था। जिम्मी सर हैं मेेरे साथ, जो एक्स कॉप रह चुके हैं। मुझे इस तरह का कैरेक्टर काफ़ी टाइम से करना था। स्टंट करने थे। इस फ़िल्म में मेरी यह सब ख्वाहिशें पूरी हुई हैं।”

‘कॉलर बॉम्ब’ दूसरी थ्रिलर फ़िल्मों से कैसे अलग है? यह पूछने पर आशा कहती हैं- ”अभी जो हम थ्रिलर देख रहे हैं, वो या तो दिल्ली-मुंबई जैसे महानगरों में सेट हैं या देश से बाहर किसी जगह पर। कॉलर बॉम्ब में अलग यह है कि अगर छोटे से गांव में हॉस्टेज सिचुएशन आ जाती है तो वो लोग इसे कैसे हैंडल करेंगे? गांव के सीधे-सादे लोग हैं। अगर उनके साथ ऐसी सिचुएशन आती है तो वो कैसे रिएक्ट करते हैं। यही इस थ्रिलर फ़िल्म को दूसरों से अलग करता है।”

कॉलर बॉम्ब का ट्रेलर देखें तो आशा, जिम्मी शेरगिल के साथ कई रोमांचक दृश्यों में नज़र आती हैं। उनके साथ काम करने के अनुभव पर आशा ने खुलासा किया कि जिम्मी के सामने वो थोड़ा शरमा जाती थीं, क्योंकि वो उनका बचपन का क्रेश रह चुके हैं- ”मैं उनके आस-पास होती थी तो काफ़ी शाय (संकोची) रहती थी, क्योंकि बचपन से वो मेरा क्रश रह चुके हैं। दिल है तुम्हारा के मुझे सारे गाने याद हैं, तो एक शायनेस थी, जिसकी वजह से उनसे ज़्यादा बात नहीं कर पाती थी। इसलिए उन्हें लगता होगा कि यह अभी भी कैरेक्टर में है। वो सेट पर बहुत कूल रहते हैं। उनके अंदर कोई स्टार एटीट्यूड नहीं है। उनके साथ ऐसा कोई बैगेज नहीं आता कि मैंने बहुत सारी फ़िल्में की हैं।”

कॉलर बॉम्ब के निर्देशक न्यानेश ज़ोटिंग के बारे में आशा ने बताया कि उनके साथ काम करके ऐसा महसूस होता था, जैसे थिएटर का कोई प्ले कर रही हूं। उनकी बैकग्राउंड शायद थिएटर की है। उन्होंने हम लोगों से काम भी थिएटर की तरह ही लिया। उनको बहुत सारी चीज़ें नेचुरल चाहिए होती थे। उनको रिएक्शंस बहुत ऑर्गेनिक चाहिए होते थे। हां, फीडबैक के लिए ओपन रहते थे। ऐसी बैकग्राउंड वाले लोगों से काफ़ी सीखने को मिलता है।

आशा अब अपनी अभिनय सीमाओं को धक्का देना चाहती हूं और ऐसे कैरेक्टर करना चाहती हैं, जो उन्हें चुनौती दें- ”मैं अब साधारण कैरेक्टर नहीं करना चाहती हूं। अब जो भी कैरेक्टर करना चाहती हूं, वो चैलेंजिंग हों। ऐसा कैरेक्टर हो, जिसके बारे में सोचकर डर लगे। ज़रूरी नहीं है कि लीड रोल ही करूं। अगर किसी वेब शो या फ़िल्म में अच्छा कैरेक्टर मिलता है तो करूंगी। टीवी कर सकती हूं, मगर कोई फाइनाइट शो हो, जो 5-6 महीने में ख़त्म हो जाए।”

आशा की निजी ज़िंदगी की बात करें तो पिछले साल वो ऋत्विक धनजानी के साथ ब्रेकअप को लेकर ख़बरों में रही थीं। इसको लेकर उन्हें सोशल मीडिया में ट्रोलिंग का भी सामना करना पड़ा। क्या सोशल मीडिया की ट्रोलिंग उन्हें परेशान करती है? इस पर आशा कहती हैं- ”सच बोलूं तो पहले काफ़ी इफेक्ट करता है। अब धीरे-धीरे बेहतर हो रही हूं। अब उतना फर्क नहीं पड़ता। जब नई-नई ट्रोलिंग शुरू हुई थी मेरी तो काफ़ी फर्क पड़ता था। अब लगता है कि इन लोगों (ट्रोल्स) के पास करने के लिए कुछ बेहतर नहीं है, इसीलिए हमारे पास आकर यह सब करते हैं। जब आपकी समझ में यह बात आ जाती है तो आप इनकी ट्रोलिंग को पर्सनली नहीं लेते।”

टीवी पर आशा को ख़तरों के खिलाड़ी जैसे स्टंट रिएलिटी शोज़ पसंद आते हैं। ख़ुद शो का हिस्सा रहीं आशा कहती हैं कि वो मेरी लाइफ़ का बहुत अच्छ एक्सपीरिएंस था। इस शो में मुझे अपने बारे में पता चला कि मैं उतनी कमज़ोर नहीं हूं। चलते-चलते जब आशा से पूछा गया कि वो ‘कॉलर बॉम्ब’ को एक लाइन में कैसे समेटेंगी तो आशा इसे फ़िल्म के संवाद के ज़रिए बताती हैं- ”हर फसाद की जड़ भूतकाल की किसी भसूड़ी में ही होती है। मेरे हिसाब से कॉलर बॉम्ब को यह डायलॉग परिभाषित करता है।”