जबलपुर के दुर्गावती विश्वविद्यालय ने भेजी ‘गलत’ जानकारी:मंत्री ने विधायक को दिया जवाब; भास्कर ने बताई हकीकत, अब मांगी शासन रिपोर्ट

जबलपुर का रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय (RDVV) फिर सुर्खियों में है। इस बार मामला यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ कम्प्यूटर साइंस एंड एप्लीकेशन विभाग (UICSA) से जुड़ी गलत जानकारी विधानसभा में देने से संबंधित है।

दरअसल, शीत सत्र में पूर्व मंत्री और विधायक लखन घनघोरिया ने विश्वविद्यालय में संचालित तकनीकी पाठ्यक्रमों के लिए उपलब्ध लैब, कम्प्यूटर, सॉफ्टवेयर एवं अन्य बुनियादी संसाधनों की जानकारी मांगी थी। जवाब में उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा था कि यूनिवर्सिटी में एमसीए और बीसीए पाठ्यक्रमों के लिए 25 कम्प्यूटरउपलब्ध हैं।

इसके बाद दैनिक भास्कर डिजिटल की टीम ने मौके पर जाकर स्थिति का जायजा लिया। क्लास में सभी कम्प्यूटर बंद पाए गए। 200 से अधिक स्टूडेंट्स की पढ़ाई का जिम्मा अतिथि विद्वानों पर था। लैब बंद थी और प्रैक्टिकल के लिए स्टूडेंट्स को अपने लैपटॉप खुद लाने पड़ रहे थे।

इस खबर के आधार पर विधायक घनघोरिया ने एक औपचारिक शिकायत पत्र भेजा, जिसमें असत्य और भ्रामक जानकारी देने की बात कही गई। अब 6 अप्रैल को विधानसभा सचिवालय ने उच्च शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव को पत्र लिखकर शिकायत पर परीक्षण और आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

पाठ्यक्रमों के लिए आवश्यक सुविधाएं मौजूद

कांग्रेस विधायक लखन घनघोरिया ने 1 दिसंबर को विधानसभा में कम्प्यूटर और तकनीकी संसाधनों की जानकारी मांगी थी। विश्वविद्यालय प्रशासन ने शासन को भेजे अपने प्रतिवेदन में दावा किया कि सत्र 2024-25 से इन पाठ्यक्रमों के संचालन के लिए आवश्यक प्रयोगशाला सुविधाएं उपलब्ध हैं तथा एमसीए और पीजीडीसीए पाठ्यक्रमों के लिए 25 कम्प्यूटर भी उपलब्ध कराए हैं। यही जवाब मंत्री की तरफ से विधायक को दिया गया।

हालांकि, इसके बाद 1 जनवरी 2026 को विधायक लखन घनघोरिया ने पत्र लिखकर इस जानकारी को भ्रामक बताया। उन्होंने कहा कि दैनिक भास्कर डिजिटल की टीम के निरीक्षण में सामने आया कि विश्वविद्यालय में बीसीए और एमसीए पाठ्यक्रमों के लिए पर्याप्त कंप्यूटर, प्रयोगशाला और अन्य सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं।

विभाग में पढ़ रहे छात्रों ने भी स्वीकार किया कि प्रैक्टिकल कार्य के लिए उन्हें कोई पर्याप्त सुविधा या संसाधन नहीं मिल रहे हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा विधानसभा पटल पर भ्रामक और असत्य जानकारी प्रस्तुत की गई।

शासन ने विश्वविद्यालय से मांगा जवाब

उच्च शिक्षा विभाग ने इस पूरे प्रकरण पर विश्वविद्यालय प्रशासन से तत्काल तथ्यात्मक प्रतिवेदन मांगा है। 6 अप्रैल 2026 को कुलसचिव को पत्र जारी कर स्पष्ट किया है कि विधानसभा के अतारांकित प्रश्न क्रमांक 373 से जुड़े मामले में सदस्य द्वारा उठाए गए प्रश्नों और शिकायत के संबंध में समस्त जानकारी तत्काल उपलब्ध कराई जाए।

विधानसभा सचिवालय ने भी उच्च शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव को पत्र लिखकर शिकायत पर परीक्षण और आवश्यक कार्रवाई का अनुरोध किया है।

एक्सपायर्ड सॉफ्टवेयर से प्रभावित हो रही पढ़ाई

विधायक लखन घनघोरिया ने आरोप लगाया कि छात्रों के बयानों से साफ हुआ कि विश्वविद्यालय की लैब में अधिकांश कम्प्यूटर खराब पड़े हैं। कई छात्र नियमित प्रैक्टिकल कक्षाओं के नाम पर सिर्फ औपचारिकता निभाने की बात कह रहे हैं। छात्रों ने बताया है कि उन्हें प्रैक्टिकल के लिए अपने निजी लैपटॉप तक लाने पड़ते हैं, जबकि पुराने सिस्टम और एक्सपायर्ड सॉफ्टवेयर के कारण पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है।

विधायक ने मांग की है कि विश्वविद्यालय के कुलगुरु सहित अन्य उच्च अधिकारियों के विरुद्ध मध्यप्रदेश विश्वविद्यालय अधिनियम, 1973, मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 तथा मध्यप्रदेश सिविल सेवा, वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील नियम, 1966 की सुसंगत धाराओं के तहत पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्यवाही सुनिश्चित करते हुए विभागीय जांच की जाए।

संवैधानिक जवाबदेही किसकी

खास बात यह है कि यह मामला सिर्फ तकनीकी अव्यवस्थाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि संवैधानिक जवाबदेही से भी सीधे जुड़ा हुआ है। विधायक ने अपने शिकायती पत्र में स्पष्ट कहा है कि विधानसभा के पटल पर प्रस्तुत की जाने वाली हर जानकारी की सत्यता सुनिश्चित करना प्रशासनिक जिम्मेदारी है। यदि किसी विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा जानबूझकर भ्रामक सूचना दी जाती है, तो यह न केवल सदन की गरिमा के साथ खिलवाड़ है, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति जवाबदेही की भावना पर भी गंभीर आघात है।

इस घटनाक्रम ने उच्च शिक्षा संस्थानों में जवाबदेही, पारदर्शिता और छात्रों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की वास्तविक स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।