कुंभ मेला फर्जी कोरोना टेस्ट: हिसार की नलवा लैब पर ईडी के छापे में बड़ा खुलासा, उत्तराखंड सरकार से 3.5 करोड़ हड़पे

उत्तराखंड में कुंभ के दौरान कोविड टेस्ट घोटाला मामले में जांच करने वाली लैबों की कलई अब खुलकर सामने आ रही है। हिसार की नलवा लैबोरेट्री पर शुक्रवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारियों की टीम मनीलाड्रिंग के आरोपों को लेकर छापा मारा। सुबह 7 बजे से रात 8 बजे तक ईडी ने लैब के दस्तावेज खंगाले। हिसार आइएमए प्रधान डॉ. जेपीएस नलवा और उनके बेटे से कई सवाल किए। ईडी ने इस मामले में सनसनीखेज खुलासा किया है।

ईडी से मिली जानकारी के अनुसार, हिसार की नलवा लैब के माध्यम से उत्तराखंड सरकार को साढ़े तीन करोड़ रुपये का चूना लगाया गया है। जांच में सामने आया कि लैबोरेट्री ने कुंभ के दौरान कोविड टेस्ट किए नहीं और सरकार से फर्जी बि ,लिंग दिखाकर साढ़े तीन करोड़ रुपये वसूल लिए। यह मामले आगे भी जारी रह सकता था मगर समय रहते ही उत्तराखंड सरकार ने कुंभ कोविड टेस्ट घोटाले पर संज्ञान ले लिया। ईडी ने 12 घंटे तक नलवा लैब और उसके निदेशकों के आवास पर जांच की यह रिपोर्ट जारी की है।

नलवा लैब ने किया था उत्तराखंड सरकार से करार

गौरतलब है कि हिसार इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के प्रधान डा. जेपीएस नलवा द्वारा संचालित नलवा लैबोरेट्री ने कोविड टेस्ट के लिए उत्तराखंड में करार किया था। इस मामले में ईडी को मनीलांड्रिंग की संभावना दिखाई दी। इसी के तहत जांच को आगे बढ़ाया गया। ईडी की जांच में लैब से 30.9 लाख रुपये, कई फर्जी बिल और अन्य बोगस दस्तावेज भी बरामद हुए हैं। इसके साथ ही लैपटॉप, मोबाइल फोन आदि को भी जब्त करने की कार्रवाई की गई है। ईडी की टीम में 11 अधिकारी और 7 पुलिस अधिकारी शामिल थे।

प्रॉपर्टी के दस्तावेज भी किए जब्त

इस छापामार कार्रवाई में ईडी ने प्रोपर्टी के दस्तावेज भी जब्त किए हैं। जिसे आगे जांच के लिए रखा जाएगा। इन लैबोरेट्री के निदेशकों ने किस प्रकार से बोगस बि ,लिंग के जरिए मानीलाड्रिंग की इस दिशा में ही अब जांच बढ़ गई है।

समझिए ….कैसे हुआ पूरा मामला

ऐसे हुई बोगस बिलंग

ईडी की जांच में सामने आया कि नलवा लैबोरेट्री सहित अन्य आरोपित लैबोरेट्री के संचालकों ने सरकार से कांट्रेक्ट लेने के बाद कोविड टेस्ट की जांच शुरू कर दी थी। इसमें अधिक लाभ सरकार से कमाने के लिए फर्जी नाम, पते, मोबाइल नंबरों को बोगस बिलिंग में शामिल किया गया। जबकि हीककत में जांच कराने वाले वह लोग थे ही नहीं। इसके बाद कोविड टेस्ट के जो रेट तय थे उस हिसाब से भी जांचों के बिल सरकार के पास जमा कर दिए। उत्तराखंड प्रशसन ने भी इन बिलों को सही मानते ही साढ़े तीन करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया। ऐसे में एक दो नहीं बल्कि सैकड़ों बोगस बिल तैयार किए गए। अगर यह मामले खुलता नहीं तो उत्तराखंड सरकार को बड़ा चूना लग सकता था। इस मामले में समय रहते कार्रवाई होने से इसकी परतें उखड़ कर सामने आ गईं।

ऐसे लोगों के नाम बिल बने जो कभी कुंभ गए ही नहीं

इन लैब ने एक मोबाइल नंबर बार-बार प्रयोग किया, गलत मोबाइल नंबर प्रयोग किए और कई बिलों में एक जैसे पते व स्पेसीमैन रेफरल फार्म भी एक जैसे प्रयोग करने की बात सामने आई है। सबसे बड़ी चौकाने वाली बात तो यह है कि लैबों द्वारा प्रयोग किए गए बोगस बिलों में ऐसे लोगों के नाम लिखे हैं जो हरिद्वार ही नहीं बल्कि कभी किसी कुंभ मेले में गए ही नहीं।

कर्मचारियों को भी नहीं मिली सूचना

लैब के खुलने से पहले टीम पहुंच गई थी तो इस बात की जानकारी यहां के कर्मचारियों तक को नहीं थी। एक बार ईडी की जांच शुरू हुई तो किसी को भी अंदर लैब में प्रवेश करने नहीं दिया गया। दोपहर करीब साढ़े 12 बजे आईएमए प्रधान के बेटे डा. नवतेज नलवा को पूछताछ के लिए लाया गया। उस समय उनके साथ एक दो पुलिस कर्मी दिखाई दिए।

मैक्स कॉरपोरेट ने नलवा लैब से किया था प्रतिबंध

कुंभ मेले में कोरोना सैंपल जांच के लिए मैक्स कॉरपोरेट सर्विस ने सहयोगी नलवा लैब और लालचंदानी लैब के साथ मिलकर फर्जी टेस्टिंग की थी। प्रति रैपिड टेस्ट के लिए 354 रुपये व आरटीपीसीआर के लिए 500 रुपये का रेट फिक्स था। कुंभ मेले में कोरोना टेस्ट के लिए मैक्स कॉर्पोरेट सर्विसेज फर्म ने टेंडर लिया था। इस फर्म ने कोरोना टेस्ट के लिए हिसार की नलवा लैब और दिल्ली की लालचंदानी लैब का एमओयू साइन था। कुंभ में 9 एजेंसी व 22 लैब कोरोना जांच कर रही थी।

104796 सैंपल लिए, बिना जांचे अधिकतर को नेगेटिव दिखाया

एक महीने चले कुंभ में करीब 4 लाख टेस्ट हुए। नलवा लैब व सहयोगियों ने कुंभ मेले में 104796 सैंपल लिए। इन सैंपलों में अधिकतर लोगों को बिना जांच किए ही नेगेटिव दिखा दिया। इतना ही नहीं जिन सैंपलों को नेगेटिव दिखाया उनमें राजस्थान और उत्तरप्रदेश के दिखाए गए, ताकि कोई अधिकारी फिजिकली वैरिफाई ना कर पाए। उत्तराखंड के स्वास्थ्य विभाग की शिकायत पर इस मामले में हरिद्वार कोतवाली थाने में पुलिस ने 593/21, 188, 269, 270, 420, 468, 471, 120 बी, महामारी एवं आपदा प्रबंधन के तहम केस दर्ज किया हुआ है।

23 जुलाई को एसआइटी जांच करने आई थी नलवा लैब

कुंभ मेले के दौरान कोरोना जांच में फर्जीवाड़े की जांच का पता लगाने हरिद्वार की एसआइटी 23 जुलाई को हिसार की नलवा लैब पर पहुंची थी। एसआइटी के साथ बिचौलिया प्रवीण भी था जिसने नलवा लैब का मैक्स कोरपोरेट के साथ एमआयू करवाया था। प्रवीण झज्जर का रहने वाला और भिवानी में खुद की लैब चलाता है। इस दौरान नलवा लैब के डायरेक्टर डा. नवतेज नलवा मौके से गायब मिले थे। इस पर एसआइटी का शक और गहरा गया था। इस दौरान एसआइटी ने आइएमए प्रधान डा. जेपीएस नलवा से पूछताछ की थी।