केदारपुरी में इसी माह तैयार हो जाएंगी तीन ध्यान गुफा, एक गुफा में पीएम मोदी ने भी लगाया था ध्‍यान

केदारनाथ धाम से डेढ़ किमी दूर पहाड़ी पर साधकों की सुविधा के लिए तीन ध्यान गुफाएं लगभग बनकर तैयार हो गई हैं। इसी महीने आखिर से इन्हें ध्यान-साधना के उपयोग में लाया जा सकेगा। जबकि, एक गुफा वर्ष 2019 में तैयार कर ली गई थी, जिसमें 18 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ध्यान लगाया था। इसके साथ ही अब तक केदारपुरी में चार ध्यान गुफाएं तैयार हो चुकी हैं। इनमें यात्री ध्यान-साधना के साथ ही रात्रि विश्रम भी कर सकते हैं।

27 लाख की लागत से बन रही इन गुफाओं का निर्माण जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) की लोनिवि शाखा द्वारा किया जा रहा है। केदारपुरी में समुद्रतल से 13 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित इन प्राकृतिक गुफाओं को प्रधानमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट के तहत सुविधा संपन्न बनाया जा रहा है।

बीते वर्ष केदारनाथ मंदिर के बायें ओर की पहाड़ी पर तैयार एक गुफा तब देश-दुनिया में चर्चा का विषय बन गई थी, जब लोकसभा चुनाव के परिणामों से पूर्व प्रधानमंत्री ने यहां ध्यान लगाया था। इसी को देखते हुए सरकार ने यहां तीन और गुफाओं का निर्माण कराया है। डीडीएमए लोनिवि के अधिशासी अभियंता प्रवीण कर्णवाल ने बताया कि इन गुफाओं के संचालन का जिम्मा गढ़वाल मंडल विकास निगम (जीएमवीएन) को सौंपा गया है। अधिक ऊंचाई पर होने के कारण इन गुफाओं में उसी व्यक्ति को प्रवेश दिया जाता है, जिसे स्वास्थ्य संबंधी कोई दिक्कत न हो।

तीन हजार से अधिक यात्री पहुंचे केदारनाथ

केदारनाथ धाम पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। रविवार को तीन हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने बाबा केदार के दर्शन कर देश को कोरोना संक्रमण से मुक्त करने की कामना की। इस साल पहली बार इतनी संख्या में श्रद्धालु केदारनाथ पहुंचे हैं। इसके साथ ही इस सीजन में केदारनाथ पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या 32803 हो गई है।

प्रदेश सरकार की ओर से चारधाम यात्रा को मिली छूट के बाद केदारनाथ धाम में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने शुरू हो गई है। बीते एक सप्ताह से रोजाना दो हजार के आसपास या इससे अधिक यात्री केदारनाथ पहुंच रहे हैं। पहले यात्री पैदल और घोड़ा-खच्चर से ही बाबा के दर्शनों को पहुंच रहे थे, लेकिन शुक्रवार से धाम के लिए हेली सेवा भी शुरू हो चुकी है। इससे श्रद्धालुओं की संख्या में खासा इजाफा हुआ है। कोरोना संक्रमण के चलते जहां अब तक पर्यटन व तीर्थाटन पूरी तरह पटरी से उतर चुका था, वहीं श्रद्धालु व पर्यटकों की संख्या बढ़ने से स्थानीय व्यवसायियों के चेहरे भी खिल उठे हैं।