Kisan Andolan: जानिये- कैसे 1000 से भी कम प्रदर्शनकारियों ने लाखों लोगों की जिंदगी बना दी नर्क

यूपी गेट, सिंघु बार्डर (कुंडली बार्डर) और टीकरी बार्डर पर कृषि कानून विरोधियों का धरना अब सिर्फ टेंटों के सहारे चल रहा है। धरने में गिनती के प्रदर्शनकारी बचे हैं, लेकिन उन्होंने लाखों राहगीरों का रास्ता बंद कर रखा है। इससे अन्य सीमाओं पर यातायात जाम रहता हैं। वाहनों में लाखों लीटर ईंधन बर्बाद हो रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा है कि ऐसे सड़क बंद नहीं की जा सकती है, बावजूद इसके प्रदर्शनकारी मान नहीं रहे हैं।

गौरतलब है कि तीनों कृषि कानूनों के विरोध में करीब नौ माह से यूपी गेट, सिंघु बार्डर व टीकरी बार्डर पर धरना चल रहा है। प्रदर्शनकारियों ने इन सीमाओं से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्गों पर टेंट लगाकर कब्जा किया है। कुछ जगह स्थायी निर्माण भी कर लिया है। शुरुआत में इन सीमाओं पर कम से कम आठ-दस हजार प्रदर्शनकारी रहते थे। 26 जनवरी को ट्रैक्टर मार्च के दौरान दिल्ली में हुए उपद्रव के बाद प्रदर्शनकारियों की संख्या बिल्कुल घट गई है। इस समय यूपी गेट पर गिनती के करीब यानी ढाई सौ प्रदर्शनकारी ही बचे हैं। अन्य सीमाओं का भी यही हाल है।

संख्या बढ़ाने के जतन विफल

तीनों सीमाओं पर संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तल धरना जारी है। धरने की अगुआई कर रहे नेताओं को स्थिति की पूरी जानकारी है। प्रदर्शनकारियों की संख्या बढ़ाने के लिए वे तमाम जतन कर चुके हैं, लेकिन विफल रहे हैं। उन्हें पता चल गया है कि अब धरने में कोई दम नहीं, लेकिन वे अपनी जिद पर अड़े हैं। वे राजमार्गों पर लगाए टेंटों को नहीं हटा रहे हैं। टेंटों के सहारे ही राजमार्गों को बंद किया गया है।

यूपी गेट होकर नहीं जा पा रहे दिल्ली

सामान्य दिनों में रोज यूपी गेट होकर 1.10 लाख बाहरी व 90 हजार गाजियाबाद के वाहन दिल्ली जाते हैं। प्रदर्शनकारियों से यह करीब दो लाख वाहन चालक यूपी गेट होकर दिल्ली नहीं जा पा रहे हैं। उन्हें खोड़ा, ईडीएम माल, कौशांबी, ज्ञानी बार्डर, भोपुरा सीमा से दिल्ली जाना पड़ता है। इससे इन सीमाओं पर अतिरिक्त वाहनों का दबाव बढ़ता है। यातायात जाम की समस्या बनी रहती है। वाहन चालकों का समय व ईंधन बर्बाद होता है। उद्योग-धंधे प्रभावित हो रहे हैं। माल के उत्पादन की लागत बढ़ रही है। गाजियाबाद के पुलिस अधीक्षक (यातायात) रामानंद कुशवाहा का कहना है कि यूपी गेट पर चल रहे धरने से रूट डायवर्जन किया गया है।

टीकरी बार्डर के रास्ते दिल्ली-हरियाणा का आवागमन बंद

रोहतक रोड पर स्थित टीकरी बार्डर के रास्ते दिल्ली व हरियाणा का आवागमन ठप है। ऐसे में दिल्ली व हरियाणा के बीच संपर्क के लिए लोग मुख्य रास्ते के बजाय गलियारों का इस्तेमाल कर रहे हैं। अब वाहन टीकरी बार्डर के बजाय निजामपुर व झाड़ौदा रोड का इस्तेमाल कर रहे हैं। टीकरी बार्डर बंद होने से वाहनों को हरियाणा में प्रवेश के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है।

सिंघु बार्डर पर हैं कई समस्याएं

सिंघु बार्डर (कुंडली बार्डर) बंद है। इससे कुंडली व राई औद्योगिक क्षेत्रों की अधिकतर फैक्टियां बंदी की कगार पर पहुंच गई हैं। यमुना किनारे के 50 गांवों के किसान दिल्ली की आजादपुर मंडी में सब्जी नहीं पहुंचा पा रहे हैं। रास्ता बंद होने से नौकरीपेशा लोगों को भारी परेशानी हो रही है। चंडीगढ़, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, जम्मू जाने वालों को उबड़-खाबड़ रास्तों से घंटों में अपना सफर पूरा करना पड़ता है। वहीं तमाम लोगों को सिंघु गांव व सिंघोला गांव की संकरी गलियों से होकर गुजरना पड़ रहा है। अक्सर एंबुलेंस भी इस यातायात जाम में फंस जाती हैं। काफी वाहन औचंदी बार्डर से आवाजाही कर रहे हैं। बड़े-बड़े ट्रकों के गांवों के रास्ते गुजरने की वजह से दरियापुर, बवाना, पूठ खुर्द आदि गांव में यातायात जाम लगता है। काफी फैक्टियां बंद हो गई हैं। काफी संख्या में लोग यहां से काम छोड़कर जा चुके हैं।

उधर, तीन कृषि कानूनों के विरोध में करीब नौ महीने से चल रहे आंदोलन में अब तक विभिन्न मामलों को लेकर 136 एफआइआर दर्ज हो चुकी हैं। इनमें 37 हजार से ज्यादा किसानों के खिलाफ कार्रवाई होनी है। इस बाबत हरियाणा के किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी किसानों के बचाव में उतर आए हैं। गुरनाम सिंह चढूनी ने अपने फेसबुक पेज के जरिये कहा है कि पुलिस द्वारा किसानों को नोटिस देकर थाने बुलाया जा रहा है। उधर, गुरनाम सिंह चढूनी ने पुलिस को चेतावनी दी है कि अगर किसानों को गिरफ्तार ही करना है तो फिर पुलिस की ओर से एक तारीख तय कर देनी चाहिए। उसी दिन सभी किसान अपनी गिरफ्तारी खुद दे देंगे।