पढ़िये- कैसे पाकिस्तान से आ रही धूल बिगाड़ रही दिल्ली-एनसीआर की हवा

मानसून की विदाई के साथ दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण बढ़ने लगा है। आलम यह है कि बदलती फिजा के साथ-साथ राजधानी दिल्ली और एनसीआर में हवा की गुणवत्ता भी अब बिगड़ने लगी है। इसकी वजह उत्तर पश्चिमी हवाओं के साथ आ रहा पराली का धुआं है। सुबह और शाम को खासतौर पर दिल्ली के साथ-साथ एनसीआर के आकाश पर प्रदूषण की हल्की सी परत नजर आने लगी है। कई इलाकों का एयर इंडेक्स तो खराब श्रेणी में पहुंच चुका है। बारिश थमने और मानसून की विदाई के बाद हवा की गुणवत्ता में तेजी से बदलाव आ रहा है। वहीं, पाकिस्तान और अफगानिस्तान की ओर से आ रही धूल ने भी दिल्ली-एनसीआर के लोगों की समस्या बढ़ा दी है।

हवा अब मध्यम श्रेणी के उच्चतम स्तर तक आ गई है। किसी भी दिन यह 200 का आंकड़ा पार कर खराब श्रेणी में पहुंच जाएगी। दिल्ली के सात इलाकों का एयर इंडेक्स तो 200 का आंकड़ा पार कर भी गया है। पर्यावरणविदों के मुताबिक हवा खराब होने के लिए उत्तर पश्चिमी हवा तो जिम्मेदार है ही। इसके साथ ही दिल्ली तक आ रहा पराली का धुआं और राजस्थान, पाकिस्तान, अफगानिस्तान की ओर से आ रही धूल भी है।

निगरानी रखने के निर्देश

खास बात यह है कि पराली जलाने का सीजन वैसे तो 25 सितंबर से 22 नवंबर तक रहता है, लेकिन पिछले साल पराली जलाने के करीब 80 प्रतिशत मामले सिर्फ 12 अक्टूबर से छह नवंबर तक रिपोर्ट किए गए थे। मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, पराली के साथ दिल्ली-एनसीआर के आंतरिक प्रदूषण पर भी निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं क्योंकि इस सीजन में होने वाले प्रदूषण में पराली की हिस्सेदारी करीब 40 प्रतिशत तक होती है।

वहीं, कहा जा रहा है कि दिल्ली-एनसीआर के लोगों के लिए अगले 25 दिन अहम होने जा रहे हैं, क्योंकि पराली जलाने की घटनाओं में इजाफा हो सकता है। दरअसल, हर साल अक्टूबर महीने में धान की फसल की कटाई के दौरान पंजाब और हरियाणा के किसान अपने खेतों में पराली जलाते हैं। पिछले एक-दो साल के दौरान इसमें कमी आई है, लेकिन इसमें कोई शक नहीं है कि दिल्ली-एनसीआर की हवा खराब करने में पंजाब और हरियाणा में जलाई जाने वाली पराली भी जिम्मेदार है।