किसान आंदोलन की वजह से कहीं सड़कें बंद तो कहीं तंग रास्ते बदलने से जान-माल का नुकसान उठा रहे लोग

कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर चल रहे आंदोलन के कारण कहीं सड़के बंद है तो कहीं तंग हो रखी है। इससे लोग केवल व्यापार और उद्योग का ही नहीं बल्कि जान-माल का नुकसान भी उठा रहे हैं। सड़के बंद होने के कारण जहां लोगों को रास्ते बदलने पड़ रहे हैं तो वही सड़क के तंग होने से एक ही लेन में दोनों तरफ का ट्रैफिक चल रहा है। इसमें कई तरह की घटनाएं हो रही हैं।

दिल्ली का मुख्य बार्डर बंद होने के कारण आने जाने के लिए लोग दूसरे ऐसे सुनसान रास्तों का इस्तेमाल कर रहे हैं जिन पर कई अनहोनी हो चुकी है। पिछले दिनों दिल्ली के कैर इलाके में ड्यूटी पर जा रहे क्लस्टर बस डिपो इंचार्ज से रात के समय सुनसान रास्ते पर बदमाशों ने गाड़ी छीन ली थी। जाहिर सी बात है कि अगर आंदोलन के कारण रास्ते बंद नहीं होते तो डिपो इंचार्ज को भी सुनसान रास्ते से जाने की जरूरत नहीं पड़ती। मगर कहीं न कहीं आंदोलन के कारण ऐसी मजबूरी आई और इसी मजबूरी में यह घटना हुई।

अभी कुछ दिनों पहले निजामपुर रोड पर एक बंद बाडी ट्रक सड़क के ऊपर से गुजर रहे तारों से टकरा गया। इससे ट्रक में करंट उतर आया और टायरों में आग लग गई। करंट की चपेट में आने से ट्रक चालक की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। इस घटना के लिए भी कहीं न कहीं आंदोलन ही जिम्मेदार बना। अगर आंदोलन की वजह से दिल्ली का टीकरी बार्डर बंद न होता तो मौत का शिकार हुए ट्रक चालक को भी दिल्ली जाने के लिए इस संकरे रास्ते का इस्तेमाल नहीं करना पड़ता।

हाल ही में बहादुरगढ़ के बाईपास पर कई घटनाएं ऐसी हुई हैं, जिनमें आंदोलन भी एक तरह से वजह बना। इसमें एक बाइक सवार की तो जान ही चली गई जबकि पांच अन्य जख्मी हो गए। पिछले सप्ताह बाईपास पर टाटा मैजिक गाड़ी और बाइक की टक्कर हो गई। इसमें बाइक सवार एक युवक की मौत हो गई। जबकि तीन अन्य इस हादसे में जख्मी हुए। इससे पहले बाईपास पर ही दो कारों की भिड़ंत हो गई। एक पलट गई । गनीमत यह रही कि इसमें किसी को ज्यादा चोट नहीं लगी।

अभी एक दिन पहले ही बाईपास पर बाइक और कार में टक्कर हो गई। इसमें भी दो लोग जख्मी हो गए। लोगों का कहना है कि इस तरह के हादसे इसलिए हो रहे हैं, क्योंकि बाईपास की एक लेन पर तो आंदोलनकारियों कब्जा है और दूसरी तरफ की लेन पर दोनों तरफ का ट्रैफिक चलता है। उसी में वाहन टकरा जाते हैं। ऐसे में पता नहीं आंदोलन कब खत्म होगा।