उज्जैन में गुरुवार को दीपोत्सव से पहले भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन दो अलग-अलग संतों और अखाड़ों में आशीर्वाद लेने पहुंचे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के साथ उन्होंने बड़ा उदासीन अखाड़े के महंत सत्यानंद महाराज और दत्त अखाड़े के गादीपति पीर श्रीमहंत सुंदरपुरी महाराज से मुलाकात की। इस दौरान आगामी सिंहस्थ की तैयारियों और अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष पद को लेकर चल रहे मतभेदों पर भी चर्चा हुई।
जानिए, कार्यक्रम में पहुंचने से पहले इन संतों से मिलने क्यों पहुंचे नवीन
उदासीन अखाड़े के महंत से मिले
नितिन नवीन उदासीन अखाड़े के महंत सत्यानंद महाराज से मिलने के लिए नाव में सवार होकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के साथ उदासीन अखाड़े पहुंचे। करीब 15 मिनट की मुलाकात के दौरान नितिन नवीन ने महंत सत्यानंद और महंत देवीदास से मिलकर आशीर्वाद लिया।
महंत सत्यानंद ने उनका स्वागत कर प्रतीक चिह्न भेंट किया। इसके बाद नितिन नवीन ने उदासीन अखाड़े में स्थित श्री चंद्र आचार्य के मंदिर में दर्शन कर आशीर्वाद लिया।
26 लाख का ऑफर ठुकराकर चुनी अध्यात्म की राह
उज्जैन के बड़ा उदासीन अखाड़े के युवा महंत सत्यानंद कम उम्र में ही संत बन गए। उन्हें विदेश की मल्टीनेशनल कंपनी से सालाना 26 लाख रुपए की नौकरी का ऑफर मिला था, लेकिन उन्होंने अध्यात्म और समाज सेवा की राह चुनी। बिहार के सुपौल के 27 वर्षीय महंत सत्यानंद ने पहले काशी, गया और हरिद्वार में महंत पद संभाला। अब वे उज्जैन के बड़ा उदासीन अखाड़े में रहकर लोगों को अध्यात्म का पाठ पढ़ा रहे हैं।
27 साल की उम्र में संभाल चुके काशी, गया और हरिद्वार में महंत पद
महंत सत्यानंद ने 2019 में दीक्षा ली और तब से अपना जीवन साधना व समाज सेवा के लिए समर्पित कर दिया। सबसे पहले वे 2020 में गया में महंत रहे। कुछ समय बाद उन्हें हरिद्वार में कुंभ मेला प्रबंधन के लिए बुलाया गया, जहां उन्होंने महंत पद की जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद वाराणसी में महंत बने और अब उज्जैन के बड़ा उदासीन अखाड़े के महंत हैं। वर्तमान में वे उज्जैन में रहकर युवाओं और साधकों को योग, संस्कृत और अध्यात्म की शिक्षा दे रहे हैं।
दत्त अखाड़े के महंत से मिले
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर रामघाट पर आयोजित दीपोत्सव में शामिल होने आए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कार्यक्रम से पहले श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा, दत्त अखाड़े के गादीपति पीर श्रीमहंत सुंदरपुरी महाराज से मुलाकात कर आशीर्वाद लिया।
जनवरी 2018 में परमानंदपुरी जी के ब्रह्मलीन होने के बाद फरवरी 2018 से पीर श्रीमहंत सुंदरपुरी महाराज गादीपति के रूप में अखाड़े का संचालन कर रहे हैं। उन्होंने बाल्यावस्था में ही घर-परिवार और सांसारिक जीवन त्याग दिया था। वे मात्र 3 वर्ष की उम्र में संन्यास परंपरा (नागा दीक्षा) में शामिल हो गए थे।
अब जानिए, दोनों अखाड़ों में क्यों गए नितिन नवीन
दरअसल, आगामी दो वर्षों में हरिद्वार, नासिक और उज्जैन में कुंभ मेले का आयोजन होना है। तीनों जगह इसकी तैयारियां चल रही हैं। वहीं, अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष पद को लेकर चल रहा विवाद अभी खत्म नहीं हुआ है।
फिलहाल उदासीन अखाड़ा महानिर्वाणी अखाड़े को अध्यक्ष मानने के पक्ष में है, जबकि दत्त अखाड़े के महंत निरंजनी अखाड़े के रविंद्रपुरी महाराज को अध्यक्ष के रूप में देखते हैं।
उदासीन और दत्त अखाड़े की कुंभ के दौरान अहम भूमिका रहती है। ऐसे में अध्यक्ष पद को लेकर चल रही खींचतान के बीच नितिन नवीन का दोनों अखाड़ों में पहुंचना इस विवाद को खत्म करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
महंत सत्यानंद बोले- आगामी सिंहस्थ के लिए लिया आशीर्वाद
उदासीन अखाड़े के महंत सत्यानंद ने बताया कि जगद्गुरु श्री चंद्र भगवान का 532वां जन्मोत्सव समारोह 20 सितंबर को मनाया जाएगा। इसे लेकर नितिन नवीन अखाड़े में पहुंचे और उन्होंने आचार्य जगद्गुरु श्री चंद्र भगवान की पूजा-अर्चना की। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल भी मौजूद रहे।
उन्होंने बताया कि सभी 13 अखाड़े एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं और सभी का अपना सम्मानित स्थान है। नितिन नवीन, मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष ने मिलकर संतों से प्रार्थना की कि आगामी सिंहस्थ दिव्य और भव्य हो और विश्वस्तरीय मेले का आयोजन सकुशल संपन्न हो।