Pollution News: दीवाली से पहले ही रेड जोन में दिल्ली-एनसीआर, AQI पहुंचा 300 के पार

दीवाली से प्रदूषण बढ़ने की संभावना के बीच दिल्ली एनसीआर वायु गुणवत्ता स्तर रेड जोन में पहुंच गया है। हैरत की बात यह कि पराली का धुआं अभी काफी कम है, पटाखे भी नहीं जल रहे, लेकिन वाहनों के धुएं ने दम घोंट दिया। दिल्ली एनसीआर में जगह जगह लगे जाम से कमोबेश सभी जगह का एयर इंडेक्स 300 पार कर गया। दिल्ली के भी 17 इलाके रेड जोन में पहुंच गए। सर्दियों के इस सीजन में पहली बार राजधानी दिल्ली की वायु गुणवत्ता रेड जोन में आई है। सफर इंडिया के मुताबिक अब प्रदूषण में लगातार इजाफा ही होना है।

गौैरतलब है कि सफर इंडिया, सीपीसीबी और मौैसम विभाग सभी का पूर्वानुमान था कि दीवाली तक दिल्ली एनसीआर में दीवाली तक प्रदूषण नियंत्रण में रहेगा जबकि दीवाली के दिन से बिगड़ेगा। इसकी बड़ी वजह यह बताई जा रही थी कि हवा की दिशा अभी दक्षिणी पूर्वी चल रही है। इसीलिए पराली का धुआं भी दिल्ली तक बहुत कम मात्रा में पहुंच पा रहा है। दीवाली के दिन से हवा की दिशा उत्तर पश्चिमी होगी तो पराली का धुआं कहीं ज्यादा मात्रा में दिल्ली पहुंचने लगेगा। लेकिन मंगलवार को लोग धनतेरस की खरीदारी और अपने नाते- रिश्तेदारों में दीवाली की मिठाई व उपहार बांटने निकले तो जगह जगह ट्रैफिक जाम लग गया। ऐसे में वाहनों के धुएं ने हवा में जहर घोल दिया।

सीपीसीबी द्वारा जारी एयर क्वालिटी बुलेटिन के अनुसार मंगलवार को दिल्ली का एयर इंडेक्स 303, फरीदाबाद का 306, गाजियाबाद का 334, ग्रेटर नोएडा का 276 और गुरुग्राम का 287 दर्ज किया गया। ग्रेटर नोएडा और गुरुग्राम की हवा खराब जबकि अन्य सभी जगह की बहुत खराब श्रेणी में दर्ज की गई। दिल्ली के पीएम 2.5 का स्तर 131 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर और पीएम 10 का स्तर 157 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर दर्ज हुआ। पिछले 24 घंटे के दौरान पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने के अभी तक के सर्वाधिक 1,735 मामले दर्ज किए गए। पीएम 2.5 प्रदूषण में पराली के धुएं की मात्रा छह प्रतिशत रिकार्ड हुई।

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की वायु गुणवत्ता पूर्वानुमान एजेंसी सफर इंडिया के अनुसार दीवाली से हवा उत्तर पश्चिमी हो जाएगी। इसके पराली का धुआं भी आएगा। थोड़े बहुत पटाखे भी जल सकते हैं। दिल्ली के पीएम 2.5 प्रदूषण में पराली जलाने की हिस्सेदारी दीवाली के दिन 20 प्रतिशत और दो दिन बाद छह नवंबर तक बढ़कर 38 प्रतिशत हो जाने का अनुमान है। पिछले साल दिल्ली के प्रदूषण में पराली जलाने की हिस्सेदारी पांच नवंबर को 42 प्रतिशत तक पहुंच गई थी। 2019 में एक नवंबर को दिल्ली के पीएम 2.5 प्रदूषण में पराली के धुएं का 44 प्रतिशत हिस्सा था।

डा. गुरफान बेग (परियोजना निदेशक, सफर इंडिया) के मुताबिक, दीवाली से दो दिन पहले ही वायु गुणवत्ता बहुत खराब होने की वजह कम तापमान और कम मिश्रण ऊंचाई के कारण स्थानीय स्त्रोतों से प्रदूषण के संचय का परिणाम है। कम मिश्रण ऊंचाई यानी मि¨क्सग हाइट वह वर्टिकल हाइट है जिसमें प्रदूषक हवा में निलंबित रहते हैं। यह ठंडे दिनों में शांत हवा की गति के साथ कम हो जाता है।