टूरिस्ट प्लेस और होटल समेत इन 26 वजहों से भी बढ़ता है आपके शहर में वायु प्रदूषण

पढ़ने-सुनने में हैरानी भले ही हो, लेकिन अस्पताल और स्कूल-कालेज भी दिल्ली में वायु प्रदूषण बढ़ा रहे हैं। इन जगहों पर वाहनों की बढ़ती संख्या और डीजल जेनरेटर का इस्तेमाल हवा में जहर घोल रहा है। यही नहीं, ढाबे, रेहड़ी-खोमचे, शापिंग माल, शवदाह गृह, पर्यटक स्थल, होटल, स्पीड ब्रेकर, रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट भी प्रदूषण बढ़ाने वाले हाटस्पाट हैं।

यह आकलन केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अधीन सफर इंडिया की उस शोध रिपोर्ट का है, जो वर्ष 2010 से लेकर वर्ष 2020 तक के दौरान प्रदूषण के बढ़ते दायरे पर तैयार की गई है। रिपोर्ट बताती है कि प्रदूषण के परंपरागत स्नोतों और कारकों की हिस्सेदारी जहां इस समयावधि में काफी बदली है, वहीं 26 नए हाटस्पाट भी जुड़ गए हैं। लिहाजा, राजधानी दिल्ली में प्रदूषण की रोकथाम के लिए इन हाटस्पाट एवं कारकों को भी नजरंदाज नहीं किया जा सकता है।

डा. गुरफान बेग (परियोजना निदेशक, सफर इंडिया) का कहना है कि ईंधन का प्रकार, वाहनों की संख्या, लोगों की भीड़, खाना बनाने के तौर-तरीके, यह सब किसी भी स्थान को प्रदूषण का हाटस्पाट बनाने में सहायता करते हैं। अगर कहीं कोयला, केरोसिन, लकड़ी जलाई जाती है, वाहन की स्पीड एकदम धीमी करके तेज की जाती है, कहीं पर बहुत ज्यादा वाहनों का आवागमन होता है तो निस्संदेह इन सबसे प्रदूषण बढ़ता है। इनमें से किसी भी कारक की अनदेखी नहीं की जा सकती।

डा. गुरफान बेग (परियोजना निदेशक, सफर इंडिया) का कहना है कि ईंधन का प्रकार, वाहनों की संख्या, लोगों की भीड़, खाना बनाने के तौर-तरीके, यह सब किसी भी स्थान को प्रदूषण का हाटस्पाट बनाने में सहायता करते हैं। अगर कहीं कोयला, केरोसिन, लकड़ी जलाई जाती है, वाहन की स्पीड एकदम धीमी करके तेज की जाती है, कहीं पर बहुत ज्यादा वाहनों का आवागमन होता है तो निस्संदेह इन सबसे प्रदूषण बढ़ता है। इनमें से किसी भी कारक की अनदेखी नहीं की जा सकती।

बता दें कि एक अध्ययन में यह खुलासा भी हो ुचका है कि अगर बत्ती और धूप बत्ती का धुआं भी वायु प्रदूषण में इजाफा करता है। ऐसे में लोगों को चाहिए कि स्तरीय धूप बत्ती और अगर बत्ता का इस्तेमाल करने से बचें