लोन लेकर पहला घर खरीदना एक बड़ा फैसला है, क्योंकि इसमें लंबे समय तक हर महीने ईएमआई चुकाने की बड़ी जिम्मेदारी होती है। यही वजह है कि कई लोग ‘जॉइंट होम लोन’ लेना पसंद करते हैं। अगर आप भी अपने पार्टनर के साथ जॉइंट होम लोन लेने की सोच रहे हैं, तो इससे जुड़ी एलिजिबिलिटी, टैक्स में छूट, फायदे और सावधानियों को आसान शब्दों में समझें…
सवाल 1: जॉइंट होम लोन क्या होता है और इससे लोन एलिजिबिलिटी कैसे बढ़ती है?
जवाब: जब दो लोग जैसे पति और पत्नी मिलकर होम लोन के लिए अप्लाई करते हैं, तो इसे ‘जॉइंट होम लोन’ कहते हैं। इसमें बैंक दोनों की कमाई और लोन चुकाने की क्षमता को एक साथ जोड़कर देखता है।
मिसाल के तौर पर, अगर सिर्फ एक व्यक्ति की सैलरी पर 30 लाख रुपए तक का लोन मिल रहा है, तो दोनों की इनकम मिलने पर यह लिमिट बढ़कर 50 से 60 लाख रुपए तक हो सकती है।
सवाल 2: क्या जॉइंट होम लोन लेने पर ज्यादा लोन अमाउंट लेना सही फैसला होता है?
जवाब: बिल्कुल नहीं। हायर एलिजिबिलिटी का मतलब यह नहीं है कि आप बैंक की ओर से ऑफर की जा रही पूरी रकम का लोन ले लें। कपल को लोन अमाउंट तय करने से पहले यह देख लेना चाहिए कि घर के बाकी खर्चों, पुराने लोन पर असर डाले बिना वे हर महीने कितनी EMI आराम से दे सकते हैं।
सवाल 3: जॉइंट होम लोन लेने के मुख्य फायदे क्या-क्या हैं?
जवाब: इसके तीन मुख्य फायदे हैं:
जॉइंट होम लोन लेने के तीन मुख्य फायदे हैं:
- ज्यादा लोन मिलना: दोनों की इनकम जुड़ने से ज्यादा रकम का लोन मिलेगा।
- EMI का बोझ कम: लोन चुकाने की जिम्मेदारी एक व्यक्ति पर नहीं रहती। दोनों मिलकर ईएमआई देते हैं, जिससे घर के बजट पर दबाव नहीं पड़ता।
- डबल टैक्स बेनिफिट: अगर पति-पत्नी दोनों घर के को-ओनर्स हैं और ईएमआई चुका रहे हैं, तो दोनों अलग-अलग टैक्स में छूट का दावा कर सकते हैं।
सवाल 4: जॉइंट लोन में रीपेमेंट और क्रेडिट स्कोर पर क्या असर पड़ता है?
जवाब: जॉइंट होम लोन दोनों पति-पत्नी की मिली-जुली जिम्मेदारी होती है। भले ही आपस में यह तय हो कि ईएमआई कौन भरेगा, लेकिन बैंक के लिए दोनों बराबर के जिम्मेदार होते हैं। अगर किसी भी वजह से किस्त बाउंस होती है, तो इसका बुरा असर पति और पत्नी दोनों के सिबिल स्कोर पर पड़ता है।
सवाल 5: जॉइंट लोन लेने से पहले प्रॉपर्टी के ओनरशिप स्ट्रक्चर पर क्या ध्यान देना चाहिए?
जवाब: जॉइंट लोन लेने से पहले पति-पत्नी को आपस में ये बातें साफ कर लेनी चाहिए:
- प्रॉपर्टी में हिस्सेदारी: घर में किसकी कितनी ओनरशिप होगी।
- डाउन पेमेंट: शुरुआत में कौन कितना पैसा लगाएगा।
- EMI का योगदान: हर महीने की किस्त में दोनों का शेयर कितना-कितना होगा।
- अन्य खर्च: रजिस्ट्री और स्टाम्प ड्यूटी जैसे शुरुआती खर्च कौन उठाएगा।
सवाल 6: अगर भविष्य में किसी एक की इनकम रुक जाए, तो इसकी तैयारी कैसे करें?
जवाब: अचानक कमाई रुकने, नौकरी छूटने या बिजनेस में नुकसान होने पर दो कदम उठाना जरूरी है:
- इमरजेंसी फंड तैयार रखें: कम से कम 6 से 12 महीने की ईएमआई और घर के जरूरी खर्चों के बराबर का पैसा अलग बैंक खाते या सेफ जगह रखें।
- होम लोन/टर्म इंश्योरेंस लें: सही लाइफ इंश्योरेंस या होम लोन प्रोटेक्शन प्लान जरूर कराएं, ताकि किसी अप्रिय घटना या अनहोनी की स्थिति में परिवार पर कर्ज का बोझ न पड़े।
सवाल 7: बैंक जॉइंट लोन की अंतिम मंजूरी देने से पहले किन चीजों की जांच करते हैं?
जवाब: होम लोन की मंजूरी से पहले बैंक मुख्य रूप से ये 4 बातें जांचते हैं:
- आवेदकों की आय: दोनों की अलग-अलग और कुल मिलाकर कितनी कमाई है।
- सिबिल स्कोर: दोनों की पिछली क्रेडिट हिस्ट्री और लोन चुकाने का रिकॉर्ड कैसा है।
- पुराने कर्ज: पहले से चल रहे लोन, क्रेडिट कार्ड बिल या अन्य देनदारियां कितनी हैं।
- रोजगार की स्थिरता: नौकरी या बिजनेस कितना सुरक्षित और स्थिर है।