2 लाइन अंग्रेजी नहीं पढ़ पाने वाले मंत्री को जानिए:पीएचडी की डिग्री, अखबार बेचकर पढ़ाई की, एक कॉल और मंत्री बन गए प्रमोद

 

‘गवर्नमेंट हेल्थ एक्सपर्ट.. एक्सप्लेंशन.. अह. .ह.. ह..’ अंग्रेजी का एक शब्द बोलने के लिए संघर्ष कर रहे ये महोदय कोई आम आदमी नहीं हैं। ये बिहार सरकार के सहकारिता, पर्यावरण वन एवं जलवायु विभाग के मंत्री प्रमोद कुमार हैं। शुक्रवार को प्रभारी स्वास्थ्य मंत्री की जिम्मेदारी निभाते हुए विधानसभा में सवाल का जवाब दे रहे थे।

इस दौरान अंग्रेजी के एक शब्द (एक्सपेंडिचर) ने उन्हें ऐसा उलझाया कि परेशान हो गए। उनकी हालत देखकर सत्ता पक्ष के सदस्य जहां हैरान हुए। वहीं, विपक्ष को मुस्कुराने का मौका मिल गया। ऐसा भी नहीं कि मंत्री जी पढ़ाई में कमजोर हैं। विधान परिषद की वेबसाइट के मुताबिक, एमए के बाद पीएचडी कर चुके हैं। मने प्रोफेसर बनने के काबिल हैं।

पहले पढ़िए, मंत्री ने सदन में क्या बोला, कहां फंसे

‘इसमें गवर्नमेंट हेल्थ एक्सपर्ट..एक्सप्लेंशन.. अह.. ह.. ह.. 18 हजार एक्स.. एक्स..।’

इसके बाद मंत्री जी अपने नेहरू जैकेट की जेब टटोलते हैं। जेब में चश्मा खोजते हैं, जो उनकी आंखों पर पहले से चढ़ा है। फिर कहते हैं। ‘ह..ह..’। इसके बाद माइक पकड़ लेते हैं।

कहते हैं, ‘एक्स.. ओह.. 8470 करोड़ रुपए दर्शाया गया है। जो बढ़कर वर्ष 2024-25 में 15428 करोड़ 1 लाख हो गया है। इस प्रकार खर्च में कुल 7 हजार 11 करोड़ रुपए की वृद्धि हुई है। 2019-20 में दवा मद में कुल 2015 करोड़ 24 लाख रुपए खर्च हुए। यह वर्ष 2024-25 में बढ़कर 7758 करोड़ रुपए हो गया है। इस प्रकार दवा में बिहार सरकार का खर्च 2019-20 की अपेक्षा तीन गुना से ज्यादा बढ़ा है।’

मंत्री ने कहा, ‘नेशनल हेल्थ प्रोफाइल 2023 के प्रकाशित आंकड़ों में यह उल्लेख है कि बिहार का गवर्नमेंट हेल्थ एक्स.. एक्स.. एक्सपेंडिचर GDSP (असल में GSDP) का 1.5 प्रकाशित है, जबकि झारखंड का 1.2 प्रकाशित है। बिहार सरकार के सात निश्चय पार्ट 3 में प्रखंड सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को विशिष्ठ चिकित्सा केंद्र और जिला अस्पतालों को अति विशिष्ठ चिकित्सा केंद्र के रूप में विकसित करने का लक्ष्य है।

उन्होंने कहा, ‘प्रखंड सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में हड्डी रोग, नेत्र रोग, कान एवं गला रोग के विशेषज्ञ के साथ फिजियोथेरेपी की सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। साथ ही जिला अस्पतालों में इंडो..इंडो..इंडोस्प्रो.. इंडोस्कोपी, कार्डियोलॉजी, यूरोलॉजी एंड न्यूरोलॉजी के दवा उपलब्ध कराने का लक्ष्य है।’

अब जानिए दो लाइन अंग्रेजी नहीं पढ़ पाने वाले मंत्री के बारे में…

डॉ. प्रमोद कुमार ने 1986 में ABVP से अपना राजनीतिक करियर शुरू किया था। उनके दो भाई और तीन बहनें हैं। उनके भाई पटना में एक गैस एजेंसी में काम करते हैं। 2021 से पहले उनके गांव तक जाने के लिए सड़क नहीं थी। चार पहिया गाड़ी नहीं जा पाती थी। प्रमोद के MLC बनने के बाद उनके गांव तक सड़क बनी। उनके दो बेटे हैं।

डॉ. प्रमोद कुमार ने 2023 में अपनी संपत्ति की घोषणा की थी। इसे बिहार विधान परिषद की वेबसाइट पर अपलोड किया गया है। इसके अनुसार मंत्री की चल संपत्ति 66.31 लाख रुपए और इनकी पत्नी सीमा कुमारी की चल संपत्ति 17.75 लाख रुपए थी। मंत्री के पास 65 ग्राम सोने के गहने थे। कीमत 3.28 लाख रुपए बताई थी। उनकी पत्नी के पास 200 ग्राम सोना और 1.5 चांदी के गहने थे, जिनकी कीमत 11.10 लाख रुपए बताई थी।

मंत्री 16.11 लाख रुपए की स्कॉर्पियो कार के मालिक हैं। 15 हजार की बाइक भी रखते हैं। 2023 के शपथ पत्र में प्रमोद ने बताया था कि उनके और उनकी पत्नी के नाम पर कोई अचल संपत्ति नहीं है। कार पर 10 लाख 9 हजार 618 रुपए लोन है।

3 पॉइंट में प्रमोद कुमार को भाजपा ने क्यों बनाया मंत्री

1. EBC कोटा भरने में लगी मंत्री वाली लॉटरी

मंत्री प्रमोद कुमार चंद्रवंशी कहार समाज से आते हैं। जो EBC में आता है। भाजपा में प्रेम कुमार लंबे समय से चंद्रवंशी समाज (EBC) का चेहरा हैं। उनकी उम्र 70 साल हो गई है। अब पार्टी ने उनको विधानसभा अध्यक्ष बनाकर रिटायर करने का प्लान बनाया है।

प्रेम कुमार का मंत्रिमंडल से नाम कटने पर EBC कोटा खाली हो गया था। पार्टी ने तब प्रमोद कुमार का नाम आगे कर दिया।

बताया जाता है कि भाजपा इससे पहले भी कई प्रयोग कर चुकी है। ज्यादा सफलता नहीं मिली है।

प्रेम कुमार मगध एरिया से आते हैं। प्रमोद कुमार भी इसी एरिया से हैं। ऐसे में उनके रिप्लेसमेंट के तौर पर इनकी लॉटरी लग गई।

2. प्रमोद के पीछे RSS का समर्थन

प्रमोद कुमार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) बैकग्राउंड से आते हैं। RSS का उनको पूरा समर्थन हैं। संघ प्रमोद कुमार में EBC नेता की संभावना देखता है। यही कारण है कि प्रमोद कुमार का विरोध भाजपा में कोई नहीं कर पाया।

प्रमोद कुमार के रणनीतिकारों में RSS बैकग्राउंड के लोग ज्यादा हैं। साधारण जीवनशैली के प्रमोद पार्टी में चुपचाप अपना काम करने वाले नेता की छवि रखते हैं।

3. भाजपा की नई लीडरशिप

भाजपा बिहार में अपनी पैठ मजबूत करना चाहती है। इसलिए राज्य में नई लीडरशिप तैयार कर रही है। पार्टी के उसी रणनीति के हिस्सा प्रमोद कुमार भी हैं।

अभी पार्टी अपने पुराने संगठन के लोगों को आगे करने पर ज्यादा जोर दे रही है। प्रमोद ने 1986 में ABVP से राजनीति शुरू की। फिर भाजपा से जुड़े और प्रदेश उपाध्यक्ष भी रहे। 2021 में पार्टी ने उन्हें MLC बनाया और 2025 में मंत्री।

उनका सफर संघर्ष पूर्ण रहा है। बताया जाता है कि उन्होंने अखबार-तेल बेचकर पढ़ाई की। जिंदगी का बड़ा हिस्सा झोपड़ी में गुजारी। प्रमोद का चयन BJP की “सामान्य कार्यकर्ता से ऊपर उठने” वाली इमेज को मजबूत करता है।

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