कानूनी प्रक्रिया के बाद वापस होंगे किसानों पर दर्ज केस, हरियाणा सरकार ने जिलों से मांगा डाटा

किसान संगठनों का आंदोलन खत्म होने के साथ ही हरियाणा सरकार ने आंदोलनकारियों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। हरियाणा सरकार इन मुकदमों को वापस लेने के लिए होमवर्क पूरा कर चुकी है, लेकिन उसे केंद्र सरकार और आंदोलनकारी किसान संगठनों के बीच हुए समझौते की प्रति का इंतजार है। पहले चरण में किसानों पर दर्ज मुकदमे वापस होंगे। फिर यदि केंद्र के निर्देश हुए तो दिवंगत किसानों के परिजनों को पांच लाख रुपये प्रति व्यक्ति के हिसाब से मुआवजा भी दिया जा सकता है। यह राशि अभी तय नहीं है।

हरियाणा में आंदोलनकारी किसान संगठनों के विरुद्ध 264 एफआइआर दर्ज हैं, जिनमें 1757 लोगों को नामजद किया गया है। 48 हजार आंदोलनकारियों को अज्ञात की श्रेणी में रखा गया है। चार केस दुष्कर्म और हत्याओं से जुड़े हुए हैं। पश्चिमी बंगाल की लड़की के साथ हुए दुष्कर्म के बाद बार्डर पर कुछ निहंगों ने एक व्यक्ति के हाथ-पैर काटकर उसे टांग दिया था। आंदोलनकारियों पर दर्ज मुकदमों की वापसी की प्रक्रिया में हरियाणा सरकार ने सभी जिलों से आंदोलन की शुरुआत से लेकर अब तक दर्ज मुकदमों की स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। इस रिपोर्ट में पूछा गया है कि किस किस में सिर्फ एफआइआर दर्ज हुई है और किसमें चालान पेश किए जा चुके हैं।

केंद्र से निर्देश और जिलों से स्टेटस रिपोर्ट आने के बाद हरियाणा सरकार प्रदेश में दर्ज सभी केसों का अध्ययन करेगी। एडवोकेट जनरल बलदेव राज महाजन को इसकी जिम्मेदारी सौंप दी गई है। हरियाणा सरकार द्वारा केस रद करने का फैसला लेने के बाद होम सेक्रेटरी की ओर से इस बाबत सभी जिलों के डीसी (डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट) को सिफारिश की जाएगी। डीसी इसके लिए डीए (जिला न्यायवादी) को लिखेंगे। डीए इस तरह के मामलों को रद करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएंगे। जिन मामलों में फिलहाल पुलिस ने केवल एफआइआर दर्ज की है, ऐसे मामले स्थानीय स्तर पर ही रद करवा दिए जाएंगे। जिन मामलों में पुलिस द्वारा कोर्ट में चालान पेश किए जा चुके हैं, ऐसे मामलों में सरकार की ओर से संबंधित कोर्ट में एप्लीकेशन दायर कर केस रद करने की मांग की जाएगी

एडवोकेट जनरल बलदेव राज महाजन के अनुसार हरियाणा सरकार जनहित और समाज में शांति एवं कानून व्यवस्था बनाए रखने की दलील के साथ कोर्ट में एप्लीकेशन दायर करेगी। कोर्ट की अनुमति के बाद ऐसे मामलों को भी रद किया जा सकेगा, जिनमें चालान पेश हो चुके हैं। कुल 264 एफआइआर में से 150 मामलों में पुलिस द्वारा कोर्ट में चालान पेश किए जा चुके हैं। आंदोलनकारियों का यदि दबाव बढ़ा तो हत्या के तीन और दुष्कर्म के एक मामले में कानूनी राय के बाद ही कोई ठोस फैसला लिया जाएगा। एडवोकेट जनरल के अनुसार प्रदेश सरकार ने आंदोलन के दौरान मारे गए किसानों का ब्योरा भी जिला प्रशासन से मांगा है।

आर्थिक मदद के लिए मृतक किसानों के डाटा का होगा मिलान

केंद्र सरकार के साथ हुई सहमति के तहत आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले किसानों के परिजनों की आर्थिक मदद भी प्रदेश सरकार करेगी। एक साल से भी अधिक चले इस आंदोलन के दौरान कुल 714 किसानों की जान जाने का दावा किया जा रहा है। प्रदेश सरकार हरियाणा के ही किसानों के परिजनों को आर्थिक मदद देगी। सरकारी के रिकार्ड के अनुसार प्रदेश के 47 किसानों की जान गई है, जबकि संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं का दावा है कि हरियाणा के 125 किसानों की जान गई। भारतीय किसान यूनियन के नेता इनकी संख्या 110 बता रहे हैं। हरियाणा सरकार ने संयुक्त किसान मोर्चा के सभी किसानों का डाटा मांगा है। यह डाटा सरकार के रिकार्ड के साथ मिलान किया जाएगा। जिलों से भी सरकार रिपोर्ट लेगी। इसके बाद तय होगा कि प्रदेश के कितने किसानों के परिजनों को आर्थिक मदद दी जाएगी।