इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू विपक्षी नेता गादी आइजनकोट के साथ मिलकर सरकार बनाने को तैयार हैं। इजराइली मीडिया आई24 न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, नेतन्याहू ने इस गठबंधन की संभावना से इनकार नहीं किया है।
वहीं, अरब पार्टियों जॉइंट लिस्ट और राअम ने आइजनकोट की याशार पार्टी को समर्थन देने का फैसला किया है।
दरअसल, 27 अक्टूबर को हुए चुनाव में किसी भी पार्टी या गठबंधन को बहुमत नहीं मिला। 120 सीटों वाली संसद में सरकार बनाने के लिए 61 सीटें जरूरी हैं।
नेतन्याहू की पार्टी लिकुड 27 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी है। मुख्य विपक्षी पार्टी याशार 21 सीटें जीतकर दूसरे नंबर पर है। लिकुड के गठबंधन की 53 और याशार के गठबंधन की 48 सीटें हैं। अरब पार्टियों को 19 सीटें मिली हैं। अब अगर याशार पार्टी अरब पार्टियों के साथ गठबंधन बनाती है तो उनके पास 67 सीटें हो जाएगी।
नेतन्याहू सभी विकल्पों पर विचार कर रहे
इजराइली मीडिया i24 न्यूज के मुताबिक, नेतन्याहू की पार्टी लिकुड के करीबी सूत्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री सभी विकल्पों पर विचार कर रहे हैं।
वे आइजनकोट के साथ गठबंधन की संभावना को भी खारिज नहीं कर रहे हैं, जबकि सार्वजनिक रूप से वे साझा सरकार बनाने की योजना से इनकार कर चुके हैं।
सूत्रों के मुताबिक, नेतन्याहू को चिंता है कि आइजनकोट अरब पार्टियों और कट्टरपंथी यहूदी धार्मिक दलों के साथ मिलकर वैकल्पिक सरकार बना सकते हैं। इससे उन्हें सत्ता से हटना पड़ सकता है।
नेतन्याहू के पास सरकार बनाने के तीन रास्ते
पहला रास्ता: विपक्षी दलों का समर्थन लेना
नेतन्याहू विपक्षी गठबंधन में शामिल कुछ दलों या सांसदों को अपने साथ लाने की कोशिश कर सकते हैं। विपक्ष के पास कुल 48 सीटें हैं। अगर इनमें से कुछ दल या सांसद नेतन्याहू का साथ देने को तैयार हो जाते हैं, तो वे बहुमत के लिए जरूरी 61 सीटों का आंकड़ा हासिल कर सकते हैं।
चुनौती- विपक्षी नेताओं ने चुनाव में नेतन्याहू को सत्ता से हटाने का वादा किया था। ऐसे में उनके लिए अब नेतन्याहू का समर्थन करना आसान नहीं होगा।
दूसरा रास्ता: राष्ट्रीय एकता सरकार बनाना
नेतन्याहू विपक्षी नेता गादी आइजनकोट और उनके सहयोगियों के साथ मिलकर राष्ट्रीय एकता सरकार बना सकते हैं। इसमें अलग-अलग विचारधारा वाली पार्टियां एक साथ आ सकती हैं।
चुनौती- नेतन्याहू के कुछ सहयोगी भी इस विकल्प पर चर्चा कर चुके हैं। इससे नेतन्याहू को प्रधानमंत्री पद पर बने रहने का मौका मिल सकता है। लेकिन आइजनकोट पहले ही नेतन्याहू के नेतृत्व का विरोध कर चुके हैं। ऐसे में दोनों के बीच सहमति बनना मुश्किल हो सकता है।
तीसरा रास्ता: अल्पमत सरकार बनाना
नेतन्याहू अल्पमत सरकार बनाने का विकल्प भी चुन सकते हैं। ऐसी सरकार के पास अपने गठबंधन में 61 सांसद नहीं होते। इसके बावजूद वह संसद में दूसरे दलों के समर्थन या उनके विरोध न करने के भरोसे चल सकती है।
चुनौती- ऐसी सरकार को बजट पास कराने, विश्वास मत जीतने और दूसरे जरूरी फैसलों के लिए बार-बार दूसरे दलों का समर्थन जुटाना पड़ता है। इसलिए अल्पमत सरकार बनाना ही नहीं, उसे लंबे समय तक चलाना भी मुश्किल होगा।
आइजनकोट के पास सरकार बनाने के दो रास्ते
पहला रास्ता: अरब पार्टियों के समर्थन से सरकार बनाना
आइजनकोट अरब पार्टियों जॉइंट लिस्ट और राअम के समर्थन से सरकार बना सकते हैं। विपक्षी गठबंधन की 48 और अरब पार्टियों की 19 सीटें मिलाकर उनके पास 67 सांसदों का समर्थन है। यह बहुमत के लिए जरूरी 61 सीटों से ज्यादा है।
चुनौती- आइजनकोट और अरब पार्टियों के बीच कई नैतिक मतभेद हैं। साथ ही नेतन्याहू भी इसे देश के साथ गद्दारी बता चुके हैं। ऐसे में इस गठबंधन को लेकर राजनीतिक विरोध का सामना करना पड़ सकता है।
दूसरा रास्ता: यहूदी दलों को गठबंधन में शामिल करना
आइजनकोट कट्टरपंथी यहूदी धार्मिक दलों और दूसरे छोटे राजनीतिक दलों को अपने साथ लाने की कोशिश कर सकते हैं। इससे वे अरब पार्टियों पर निर्भर हुए बिना भी बहुमत जुटाने का रास्ता तलाश सकते हैं।
चुनौती- अलग-अलग विचारधारा वाले दलों को एक साथ लाना आसान नहीं होगा। खासकर सैन्य सेवा जैसे मुद्दों पर इन दलों के बीच मतभेद हो सकते हैं।
इजराइल चुनाव के बाद अब तक क्या-क्या हुआ
27 अक्टूबर: चुनाव हुए, किसी को बहुमत नहीं
इजराइल में संसदीय चुनाव हुए। 77.9% मतदान हुआ। नेतन्याहू गठबंधन को 53, आइजनकोट गठबंधन को 48 और अरब पार्टियों को 19 सीटें मिलीं। बहुमत के लिए 61 सीटें जरूरी थीं।
29 अक्टूबर: चुनाव में विदेशी दखल और वोट चोरी का आरोप लगा
लिकुड ने अरब पार्टियों पर वोट खरीदने का आरोप लगाया। राअम पार्टी ने आरोपों से इनकार किया। शिन बेट ने विदेशी दखल की जांच शुरू की।
31 अक्टूबर: यहूदी-अरब गठबंधन के समर्थन में प्रदर्शन
इजराइल में लोगों ने यहूदी और अरब पार्टियों को मिलाकर सरकार बनाने की मांग की। नेतन्याहू के समर्थकों ने ऐसे गठबंधन का विरोध किया।
1 नवंबर: आइजनकोट ने सरकार बनाने के लिए 4 शर्तें रखीं
आइजनकोट ने गठबंधन के लिए चार शर्तें रखीं। जॉइंट लिस्ट ने कहा कि उनकी पार्टी नेतन्याहू को हटाने में विपक्ष की मदद करेगी और बाहर से समर्थन दे सकती है।