ओमिक्रोन वैरिएंट का नहीं है लोगों में डर, बढ़ते मामलों के बीच शारीरिक दूरी के अनुपालन में कोताही

देश में पिछले 10 दिन के भीतर कोरोना वायरस के नए वैरिएंट ओमिक्रोन के 50 से अधिक मामले मिल चुके हैं। इसके बावजूद भी भारत में लोग इसको लेकर सतर्क नहीं हैं। लोकलसर्किल्स द्वारा किए गए एक सर्वे में यह बात सामने आई है कि ‘सोशल वैक्सीन’ के रूप में शारीरिक दूरी के अनुपालन में लापरवाही बरत रहे हैं। यह सर्वे इस बात का पता लगाने के लिए किया था कि क्या ओमिक्रोन के बाद लोग सजग हुए हैं।

आनलाइन प्लेटफार्म लोकलसर्किल ने मंगलवार को एक विज्ञप्ति में कहा कि दुनिया भर के वैज्ञानिकों और महामारी विज्ञानियों ने ओमिक्रोन को बड़ा खतरा बताया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने इसे वैरिएंट आफ कंसर्न के रूप में वर्गीकृत किया है। दक्षिण अफ्रीका में पहली बार पहचाने गए कोरोना वायरस के पहले मामले के कुछ ही हफ्तों में ओमिक्रोन दुनिया भर के 60 से अधिक देशों में पहुंच गया है।

इसके अलावा, प्रारंभिक शोध से पता चला है कि अब तक दिए गए 90 प्रतिशत एस्ट्राजेनेका के टीके ओमिक्रोन वैरिएंट से शून्य सुरक्षा प्रदान करती है। इसमें कहा गया है कि फिलहाल शोध के नतिजों का इंतजार किया जा रहा है कि क्या कोविशील्ड या एस्ट्राजेनेका की तीसरी खुराक ओमिक्रोन के खिलाफ प्रतिरक्षा प्रदान कर सकती है।

इस सर्वे के नतीजे कहते हैं कि देश में टीका लगवा चुके लोगों की संख्या तेजी से बढ़ रही है और रोजाना आने वाले संक्रमण के मामले 10,000 से नीचे आ गए हैं। ऐेसी स्थिति में लोग सामाजिक दूरी को लेकर कोताही बरतने लगे हैं। इसके उलट महामारी से बचाव का एकमात्र और पक्का उपाय मास्क पहनना और सामाजिक दूरी का अनुपालन करना ही है।

सर्वेक्षण में देश के 303 जिलों के 25,000 से अधिक नागरिकों की प्रतिक्रियाएं मिलीं। सर्वेक्षण में लोगों से पूछा कि उनके शहर / जिले / क्षेत्र के लोग अब सामाजिक दूरियों के मानदंडों का पालन कैसे कर रहे हैं। 83 फीसद नागरिकों ने कहा कि उनके क्षेत्र में सामाजिक दूरी का अनुपालन शून्य है। केवल 11 फीसद लोगों ने कहा कि 30-60 प्रतिशत लोग ही सामाजिक दूरी का पालन कर रहे हैं, जबकि 2 प्रतिशत का कहना था कि 60-90 प्रतिशत लोग इन दिशानिर्देशों का अनुपालन कर रहे हैं।