सात वर्षों में 40% बढ़ी भारत की परमाणु ऊर्जा क्षमता, 4780 मेगावाट से बढ़कर हुई 6780 मेगावाट

पिछले सात वर्षों में भारत की परमाणु ऊर्जा क्षमता में 40 प्रतिशत की वृद्धि देखने को मिली है। परमाणु ऊर्जा विभाग के केंद्रीय राज्य मंत्री (प्रधान मंत्री कार्यालय) डा. जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भारत की स्थापित परमाणु ऊर्जा क्षमता 4,780 मेगावाट से बढ़कर 6,780 मेगावाट हो गई है।

लोकसभा में मंत्री ने कहा, ‘भारत को स्थायी रूप से दीर्घकालीन ऊर्जा सुरक्षा प्रदान करने के लिए तीन चरणों के एक स्वदेशी परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम पर अमल किया जा रहा है। इसके साथ ही देश को स्वच्छ बिजली उपलब्ध कराने के लिए विदेशी सहयोग पर आधारित लाइट वाटर रिएक्टर भी अतिरिक्त सुविधाओं के रूप में स्थापित किए जा रहे हैं।’

परमाणु ऊर्जा वृद्धि पर एक अलग प्रश्न में डां जितेंद्र सिंह ने बताया कि कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र केकेएनपीपी 3 और 4 (2X1000 मेगावाट) परियोजना को न्यूक्लियर पावर कारपोरेशन आफ इंडिया लिमिटेड (एनपीसीआईएल) द्वारा कार्यान्वित किया गया था, नवंबर 2021 तक 54.96 प्रतिशत की भौतिक प्रगति हासिल की है।

केकेएनपीपी 3 और 4 परियोजनाओं को मार्च 2023 और नवंबर 2023 तक पूरी होने की उम्मीद है। फास्ट रिएक्टर फ्यूल साइकिल फैसिलिटी (FRFCF) परियोजना वर्तमान में परमाणु ऊर्जा विभाग, भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र, परमाणु रीसायकल बोर्ड द्वारा निष्पादित की जा रही है। उन्होंने कहा कि 30 नवंबर तक परियोजना की वित्तीय प्रगति 32 प्रतिशत है और परियोजना के दिसंबर 2027 तक पूरा होने की उम्मीद है।

एक अन्य प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में देश में यूरेनियम का सालाना उत्पादन सभी यूरेनियम आधारित परमाणु ऊर्जा संयंत्रों की वार्षिक ईंधन जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि थोरियम आधारित वैकल्पिक ईंधन की संभावना पर निरंतर विचार किया जा रहा है।