दिल्ली एयरपोर्ट का कार्बन उत्सर्जन बेहद कम, अब दुनिया भर में हो रही तारीफ

दिल्ली-एनसीआर में पिछले एक माह के आंकड़े बताते हैं कि बाहर के मुकाबले घर-दफ्तर के भीतर वायु गुणवत्ता कहीं बेहतर रही है। एक नए अध्ययन में सर्दियों में आउटडोर की तुलना में इनडोर प्रदूषण आधे से कम स्तर पर पाया गया है। यह अध्ययन दिल्ली विश्वविद्यालय के अधीन राजधानी कालेज के प्रोफेसर एसके ढाका, अर्थ रूट फाउंडेशन से डा. विवेक पंवार, रिसर्च इंस्टीट्यूट फार ह्यूमैनिटी एंड नेचर के प्रोफेसर एस हयाशिदा और वाई मात्सुमी ने संयुक्त रूप से किया है। इसमें 15 नवंबर से 15 दिसंबर 2021 के बीच घर के भीतर और बाहर से प्रदूषण के आंकड़े जुटाए गए।

उधर, एक सुखद खबर भी आई है कि इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट (आइजीआइ) दुनिया का पांचवां सबसे व्यस्त एयरपोर्ट है, इसके बावजूद यहां कार्बन उत्सर्जन सबसे कम हो रहा है। आइजीआइ के संचालन से जुड़ी एजेंसी डायल का कहना है कि एयरपोर्ट पर पिछले कुछ समय से किए जा रहे प्रयासों के कारण कार्बन उत्सर्जन की मात्रा में काफी कमी आई है, जिसकी अब दुनिया भर में तारीफ हो रही है। डायल का कहना है कि इसका एक बड़ा कारण एयरपोर्ट के आसपास लगाए गए पेड़ पौधे हैं, जो उत्सर्जित होने वाले कार्बन डाइआक्साइड (सीओ2) की मात्रा को वातावरण से कम कर रहे हैं।

कार्बन उत्सर्जन को लेकर दुनिया भर के व्यस्ततम एयरपोर्ट के आकार एवं क्षमता के अनुसार एक आनलाइन टूल एयरपोर्ट ट्रैकर द्वारा अध्ययन किया गया था, इसमें क्लीन ट्रांसपोर्टेशन, ओडीआई और पर्यावरण के लिए किए गए पहल का आकलन किया गया था। अध्ययन दुनिया भर के 1300 एयरपोर्ट पर किया गया था, जहां से दुनिया भर के 99 फीसद वैश्विक एयरलाइन का संचालन होता है। इन एयरपोर्ट पर आने वाले यात्रियों की संख्या के अनुसार उत्सर्जित होने वाले कार्बन का आकलन किया गया था। अध्ययन के निष्कर्ष के अनुसार, दिल्ली एयरपोर्ट पर कार्बन उत्सर्जन सबसे कम है।

आइजीआइ द्वारा कुल उड़ान उत्सर्जन 5.53 मिलियन टन कार्बन है। जबकि, सिंगापुर के चांगी एयरपोर्ट, दक्षिण कोरिया के इचियोन एयरपोर्ट, जर्मनी के फ्रैंकफर्ट और हांगकांग एयरपोर्ट ऐसे एयरपोर्ट हैं जहां ट्रैकर के अनुसार प्रति वर्ष 10 मिलियन टन से अधिक कार्बन का उत्सर्जन होता है। आइजीआइ एयरपोर्ट के बाद कुआलालंपुर एयरपोर्ट पर सबसे कम सीओ2 उत्सर्जन 5.83 मिलियन टन है।