वायु प्रदूषण से आपके लिवर के लिए भी बढ़ा खतरा, जानिए क्या कहते हैं वैज्ञानिक

पूरी दुनिया में फैटी लिवर रोग (एमएएफएलडी) एक बड़ी स्वास्थ्य समय बन गया। भारत में भी पिछले कुछ सालों में फैटी लिवर के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। हाल ही में हुए एक अध्ययन में पाया गया है कि खाने पीने में अनियमितता और खराब लाइफस्टाइल के अलावा बढ़ता वायु प्रदूषण भी फैटी लिवर की बीमारी को तेजी से बढ़ा रहा है।

यूरोपियन एसोसिएशन फॉर द स्टडी ऑफ द लिवर की आधिकारिक पत्रिका, जर्नल ऑफ हेपेटोलॉजी में छपी एक रिपोर्ट में वैज्ञानिकों का दावा है कि वायु प्रदूषण की समस्या ने फैटी लिवर की समस्या को बढ़ावा दिया है। पूरी दुनिया में 1980 के दशक से फैटी लिवर के मरीजों की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है, जो वर्तमान में वैश्विक आबादी का एक चौथाई तक पहुंच गई है। एशिया में, 2012 और 2017 के बीच तेजी से बढ़ा है। इस दौरान इसके मरीजों में लगभग 40% तक बढ़त देखी गई है लिवर की बढ़ती बीमारी से लिवर सिरोसिस और यकृत कैंसर, यकृत प्रत्यारोपण और यकृत से संबंधित मृत्यु जैसे अंतिम चरण के यकृत रोगों में भी बढ़ोतरी देखी गई है

जानवरों पर किए गए कई अध्ययनों से पता चला है कि सांस के जरिए प्रदूषक कणों के शरीर में पहुंचे से फैटी लीवर की बीमारी या एमएएफएलडी का खतरा बढ़ सकता है। हवा में मौजूद पर्टिकुलेट मैटर शरीर में पहुंच कर एक नॉन-अल्कोहलिक स्टीटोहेपेटाइटिस (NASH)-जैसे फेनोटाइप को बढ़ा सकते हैं, हेपेटिक ग्लूकोज मेटाबॉलिज्म को बिगाड़ सकता है जिससे फैटी लिवर की बीमारी का खतरा बढ़ जाता है।

इस शोध में शामिल वेस्ट चाइना स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ एंड वेस्ट चाइना फोर्थ हॉस्पिटल, सिचुआन यूनिवर्सिटी, चेंगदू के प्रमुख शोधकर्ता जिंग झाओ के मुताबिक, “फैटी लिवर की महामारी और औद्योगिकीकरण के साथ-साथ पर्यावरण और जीवनशैली में बदलाव के चलते पूरी दुनिया में तेजी से बढ़ रही है। शोध में पाया गया कि वायु प्रदूषण के चलते मेटाबॉलिज्म में दिक्कतें आने से इंसुलिन प्रतिरोध और डिस्लिपिडेमिया, और टाइप 2 मधुमेह मेलिटस और मेटाबॉलिज्म सिंड्रोम जैसी संबंधित बीमारियों के जोखिम को बढ़ा सकता है।”

शोधकर्ताओं ने वायु प्रदूषण से फैटी लिवर की बीमारी के बीच संबंध का अध्ययन के लिए लगभग 90,000 वयस्कों पर अध्ययन किया। इस अध्ययन में लोगों के इंटरव्यू, उनकी जीवन शैली उनके परिवेश के साथ ही उनकी स्वास्थ्य जांच का भी डेटा एकत्र किया। शोधकर्ताओं ने पाया कि वायु प्रदूषण के लंबे समय तक संपर्क में रहने से फैटी लिवर की बीमारी (MAFLD) की संभावना बढ़ सकती है, खासकर उन व्यक्तियों में जो पुरुष, धूम्रपान करने वाले, शराब पीने वाले और ज्यादा तेल वाला खाना खाते हैं।

डॉ झाओ के मुताबिक, “शोध के परिणामों से हमें साफ पता चलता है कि वायु प्रदूषण से हमारे शरीर की मेटाबॉलिक प्रक्रिया और अंगों पर असर पड़ता है। अध्ययन में पाया गया कि ज्यादा मेहनत का काम करके और अपनी फिजिकल एक्टिविटी को बढ़ा कर हम फैटी लिवर की बीमारी के खतरे को कम कर सकते हैं।”