मकर संक्रांति पर प्रदेश में श्रद्धालुओं ने लगाई पुण्य की डुबकी, प्रयागराज तथा वाराणसी के घाटों पर भारी भीड़ उमड़ी

मकर संक्रांति पर्व पर शुक्रवार को घने कोहरे के बाद भी लोग पुण्य की डुबकी लगा रहे हैं। संगमनगरी प्रयागराज में तो शुक्रवार से ही माघ मेला औपचारिक रूप से प्रारंभ हो गया है। यहां भी कल्पवास करने वालों के साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने तड़के ही संगम तट पर डुबकी लगाने के साथ दान-पुण्य किया। प्रयागराज के अलावा वाराणसी, हापुड़, कानपुर, अयोध्या तथा गोरखपुर के साथ अन्य जनपदों में भी लोग मकर संक्रांति पर स्नान के बाद दान-पुण्य में लगे हैं।

मकर संक्रांति पर भी कोरोना वायरस की तीसरी लहर के संक्रमण के बाद भी लोग बेखौफ होकर प्रयागराज में गंगा, यमुना व अदृश्य सरस्वती के पावन संगम में डुबकी लगा रहे हैं। यहां पर श्रद्धालु संगम के साथ ही साथ गंगा नदी के रामघाट, दारागंज, अक्षयवट, गंगोली शिवाला व फाफामऊ घाट पर भोर से डुबकी लगा रहे हैं। इनकी भीड़ सूर्योदय के बाद बढ़ती गई। डुबकी लगाकर निकलने वाले पूजन करके सकल सिद्धि की कामना कर रहे हैं। इसके साथ ही तीर्थ पुरोहितों को यथा सामर्थ खिचड़ी, काला तिल, गुड़, कंबल आदि का दान देकर आशीष ले रहे हैं।

प्रयागराज में संगम तट पर भंडारा

मकर संक्रांति पर्व से मेला क्षेत्र में संतों के शिविरों में भंडारा शुरू हो गया है। संतों के शिविर में श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करके आगे बढ़ रहे हैं। अधिकतर शिविरों में खिचड़ी का प्रसाद वितरित किया जा रहा है।

मकर संक्रांति पर वाराणसी के घाटों पर भी काफी भीड़ है। मौसम साफ होने के कारण लोग बड़ी संख्या में गंगा नदी में पुण्य की डुबकी लगा रहे हैं। गंगा घाट पर मकर संक्रांति स्नान के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी है। खिचड़ी बाबा मंदिर वाराणसी में खिचड़ी का भोग और प्रसाद वितरित किया गया।

वाराणसी में श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर में लोगों ने स्नान के बाद दर्शन-पूजन किया। वाराणसी के अलावा हापुड़ के गढमुक्तेश्वर, फर्रुखाबाद, कानपुर, रायबरेली के डलमऊ में भी गंगा नदी के तटों पर लोग उमड़े हैं। रामनगरी अयोध्या में सरयू नदी के तट पर भी बड़ी संख्या में लोग स्नान कर रहे हैं। गोरखपुर में भी राप्ती नदी के घाट पर लोग स्नान के बाद दान-पुण्य में लगे हैं।

संक्रांति की पुण्य बेला आज रात 8.49 बजे से

सूर्यदेव 14 जनवरी की रात 8.49 बजे सूर्य धनु से मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इसके बाद सूर्य उत्तरायण होंगे। यहीं से मकर संक्रांति की पुण्य बेला शुरू होगी। इससे स्नान का सिलसिला दिनभर चलता रहेगा। इस दौरान काफी श्रद्धालु रात में भी डुबकी लगाएंगे। मकर संक्रांति का स्नान करने के बाद प्रयागराज के संगम तट पर हजारों श्रद्धालु कल्पवास शुरू कर देंगे।