इस मौसम में सरसों की फसल को बीमारी से बचाने के लिए करें ये विशेष उपाय, मिलेगा बड़ा लाभ

इस मौसम में किसान सरसों की फसल पर विशेष ध्यान दें। क्योंकि इस मौसम में कई बीमारी फैलने का खतरा रहता है। इसके लिए समय समय पर खेतों का निरीक्षण करके कृषि वैज्ञानिकों से सलाह लेकर छिड़काव करें। जिले में 65 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में बिजाई की गई है। सरसों की फसल को सकलैरोटीनियां गलन से बचाने के लिए कार्बेडाजिम दवाई का यदि नहीं किया है तो छिड़काव करें। इसका 200 ग्राम दवाई 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ करें। सफेद रतुआ या डाऊनी मिल्ड्य राया के अत्यंत घातक रोग हैं। समय से बचाव कके साधन अपनाकर रोगों से बचा जा सकता है।

बचाव के लिए 600 ग्राम डाइथेन एम 45 या इंडोफिल एम 45 या मैन्जेब का 250 से 300 लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति एकड़ फसल पर छिड़काव करें। इस दवाई को चेपा या अल के नियंत्रण के लिए प्रयोग में लाई जाने वाली कीटनाशक में मिलाया जा सकता है। फफूंदनाशक की नित्रंयक क्षमता बढ़ाने के लिए प्रति 100 लीटर घोल में 10 ग्राम सेल्वेट 99 या 50 मिली लीटर ट्राइटान अवश्य मिला दें।

पछेती बिजाई में हो सकता है चेपा का आक्रमण

सरसों, राया में पर चेपा का आक्रमण हो सकता है। ये कीट समूहों में पौघे के ऊपरी सभी भागों का रस चूसकर बहुत हानि करते हैं। यदि 10 प्रतिशत पुष्पित पौधों पर औसतन प्रति पौधो 13 से 15 कीट हों तब इनकी रोकथाम के लिए 250 से 400 मिली लीटर मैटाासिस्टाक्स 25 ई सी या रोगोर 30 ई सी को 250 से 400 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ छिड़काव करें। कीटनाशक की मात्रा फसल की बढ़वार पर निर्भर करती है। जरूरत पड़ने पर 15 दिन बाद यही छिड़काव करें। इसी कीटनाशकों से पत्तों में सुरंग बनने वाला कीट भी मर जाता है।

किसान मुधमक्खियों को बचाने के लिए छिड़काव दिन में दोपहर दो बजे बाद करें। कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि वैज्ञानिक डा. सुनील बैनीवाल ने बताया कि इस मौसम में किसान समय समय पर सरसों की फसल का निरीक्षण करते रहे। अगर कोई बीमारी नजर आती है तो कृषि वैज्ञानिकों से सलाह लेकर छिड़काव करें।