एक ऐसा आसन जो है PCOD और PCOS दोनों ही प्रॉब्लम्स में बेहद फायदेमंद

पीसीओडी और पीसीओएस दोनों ही आज के समय में बहुत ही आम समस्याएं बन चुकी हैं जिनसे ज्यादातर महिलाएं प्रभावित हैं। तो सबसे पहले तो हम इन दोनों के बारे में जानेंगे कि आखिर ये प्रॉब्लम है क्या फिर एक ऐसे आसन के बारे में जानेंगे जो इन दोनों ही समस्याओं में बेहद असरदार है। और ज्यादा देर किए बिना बढ़ते हैं आगे।

PCOD

पीसीओडी एक ऐसी मेडिकल कंडीशन है, जिसमें ओवरीज समय से पहले एग रिलीज कर देती हैं, जो धीरे-धीरे सिस्ट का रूप ले लेते हैं। जिससे अनियमित पीरियड्स, पीरियड्स के दौरान बहुत ज्यादा दर्द, वजन, मोटापा बढ़ना और पुरुषों की तरह हेयर लाॅस की प्रॉब्लम होती है।

PCOS

पीसीओएस यानी पाॅलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम एंडोक्राइन सिस्टम का मेटाबाॅलिक डिसऑर्डर होता है। जिसमें बहुत ही ज्यादा मात्रा में मेल हार्मोन बनने लगता है, जिससे ओव्यूलेशन में अनियमितता होने लगती है साथ ही ओवरी में बहुत सारे सिस्ट बन जाते हैं।

तो ऐसी समस्या होने पर पहले डॉक्टर को दिखाएं। इसके साथ ही अपने रूटीन में भी बदलाव करें। योग और वर्कआउट करना शुरू करें। प्रसारित पादोत्तानासन बहुत ही असरदार आसन है जो इन दोनों ही समस्याओं में बेहद फायदेमंद होता है। इसके रोजाना अभ्यास अंदरूनी अंगों की बहुत अच्छी मसाज हो जाती है। जानेंगे इसके और अन्य फायदे, आसन को करने का तरीका व जरूरी सावधानियां।

प्रसारित पादोत्तानासन के फायदे

1. इसे करने के दौरान पैरों को खोलकर फैलाना पड़ता है। इससे हैमस्ट्रिंग और क्वाड्रिसेप्स को खोलने में मदद मिलती है।

2. यह मांसपेशियों की ताकत और लचीलापन बढ़ाता है। साथ ही कंधे और हाथों का मूवमेंट भी बेहतर होता है।

3. लचीलापन बढ़ने से बॉडी का बैलेंस बनाने में मदद मिलती है।

4. आगे की तरफ झुककर किए जाने वाले इस योगासन में ब्रेन में ब्लड सर्कुलेशन अच्छी तरह होता है।

5. यह कंधे और हाथों की थकान को दूर करता है।

जानें इसे करने का तरीका

– पैरों के बीच अच्छा सा गैप बना लें।

– शरीर का भार पैर के आगे हिस्से यानी उंगलियों पर रखें।

– सांस भरते हुए हाथों को ऊपर उठाएं।

– अब सांस छोड़ते हुए हाथों को धीरे-धीरे नीचे मैट की ओर ले जाएं।

– सिर को मैट पर रखें और हाथों को सिर के बगल में।

– अगर आप इस स्थिति में कंफर्टेबल हैं तो बाएं हाथ से बाएं पैर के अंगूठे को पकड़ने की कोशिश करें और दाएं हाथ से दाएं पैर को।

– कुछ देर इस स्थिति में बने रहें फिर धीरे-धीरे वापस ऊपर की ओर जा जाएं और पैरों को भी एक साथ कर लें।

– एक बार फिर से पैरों को फैलाएं और इस आसन को दोहराएं।

– कम से कम तीन से पांच बार करने का प्रयास करें।

लेकिन अगर आप इस आसन को और ज्यादा असरदार बनाना चाहते हैं तो इसमें सर्वांग गति जोड़ें।

– हाथों को नमस्कार मुद्रा में कर लें या फिर हथेली को एक के ऊपर एक रख लें। अगर ये भी कंफर्टेबल नहीं लग रहा तो हाथों को कमर पर भी रख सकते हैं।

– सांस भरते हुए पहले बाएं तरफ बॉडी को घुमाएं फिर दाईं तरफ।

– बाइसेप्स आपके कानों से लगे हुए होने चाहिए।

– दाएं, बाएं पूरा करने के बाद एक चक्र पूरा होता है तो आप इसे 3 से 5 बार करने का अभ्यास करें।

इन बातों का रखें ध्यान

– रीढ़ की हड्डी से जुड़ी प्रॉब्लम या कोई गंभीर बीमारी होने पर इसे न करें।

गर्दन दर्द या ब्लड प्रेशर के मरीज भी इसे करने से बचें।

– अगर कंधे में दर्द की शिकायत है तो हाथ ऊपर न उठाएं।