हामिद अंसारी का विवादित बयान, कहा- भारत में बढ़ रही असुरक्षा, धर्म के आधार पर अलग करने की बढ़ी है प्रवृत्ति

पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने एक बार फिर से विवादित बयान दिया है। उन्होंने अमेरिका के चार सांसदों के साथ भारत में मानवाधिकारों की मौजूदा स्थिति पर चिंता व्यक्त की है और कहा है कि देश में असुरक्षा का माहौल बढ़ रहा है। ‘इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल’ द्वारा बुधवार को आनलाइन आयोजित पैनल चर्चा को अंसारी और अमेरिका के कई सांसदों ने संबोधित किया।

भारत से डिजिटल तरीके से इस चर्चा में भाग लेते हुए पूर्व उपराष्ट्रपति अंसारी ने हिंदू राष्ट्रवाद की बढ़ती प्रवृत्ति पर अपनी चिंता व्यक्त की। उन्होंने आरोप लगाया, हाल के वर्षों में हमने उन प्रवृत्तियों और प्रथाओं के उद्भव का अनुभव किया है, जो नागरिक राष्ट्रवाद के सुस्थापित सिद्धांत को लेकर विवाद खड़ा करती हैं और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की एक नई एवं काल्पनिक प्रवृत्ति को बढ़ावा देती हैं।

वह नागरिकों को उनके धर्म के आधार पर अलग करना चाहती हैं, असहिष्णुता को हवा देती हैं और अशांति एवं असुरक्षा को बढ़ावा देती हैं। बताते चलें कि अंसारी पहले भी कह चुके हैं कि देश के मुस्लिमों में बेचैनी का अहसास और असुरक्षा की भावना है। उनके बयान पर पहले भी विवाद होता रहा है।

कार्यक्रम में डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसद एड मार्के ने कहा, भारत सरकार ने अल्पसंख्यक मान्यताओं को निशाना बनाना जारी रखा है। इससे एक ऐसा माहौल बना है, जहां भेदभाव और हिंसा जड़ पकड़ सकती है।

हाल के वर्षों में हमने आनलाइन नफरत भरे भाषणों और नफरती कृत्यों में बढ़ोतरी देखी है। इनमें मस्जिदों में तोड़फोड़, गिरजाघरों को जलाना और सांप्रदायिक हिंसा भी शामिल है। मार्के का भारत विरोधी रुख अपनाने का इतिहास रहा है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली सरकार के दौरान भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौते का भी विरोध किया था।

चर्चा में तीन अन्य अमेरिकी सांसदों- जिम मैकगवर्न, एंडी लेविन और जेमी रस्किन ने भी हिस्सा लिया। रस्किन ने कहा, भारत में धार्मिक अधिनायकवाद और भेदभाव के मुद्दे पर बहुत सारी समस्याएं हैं। हम सुनिश्चित करना चाहते हैं कि भारत हर किसी के लिए धार्मिक स्वतंत्रता, आजादी, बहुलवाद और सहिष्णुता की राह पर बना रहे।

भारतीय अमेरिकी मुस्लिम परिषद द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार, अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के ‘टाम लैंटोस मानवाधिकार आयोग’ के सह-अध्यक्ष मैकगवर्न ने कई चेतावनी भरे संकेत सूचीबद्ध किए, जो भारत में मानवाधिकारों के ‘खतरनाक रूप से पतन’ को दर्शाते हैं।

आरोपों को नकारती रही है सरकार

भारत सरकार देश में नागरिक स्वतंत्रता खत्म होने को लेकर विदेशी सरकारों और मानवाधिकार संगठनों के आरोपों का खंडन करती रही है। भारत सरकार के मुताबिक, देश में सभी के अधिकारों की रक्षा के लिए सुस्थापित लोकतांत्रिक प्रथाएं और मजबूत संस्थान हैं। सरकार ने इस बात पर जोर दिया है कि भारतीय संविधान मानवाधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न कानूनों के तहत पर्याप्त सुरक्षा प्रदान करता है।