खास इंटरव्‍यू में बोले अजय चौटाला- ‘बड़ों’ की मर्जी हो तो अब भी एकता संभव, लेकिन बड़े चौटाला नहीं चाहेंगे

जननायक जनता पार्टी के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष डा. अजय सिंह चौटाला अपनी सजा पूरी होने के बाद कल (बृहस्‍पतिवार को) दिल्‍ली की तिहाड़ जेल से रिहा हो गए। उनकी रिहाई से परिवार के साथ-साथ जजपा के नेता व कार्यकर्ता भी बहुत खुश हैं। रिहाई के बाद खास बातचीत में अजय चौटाला ने भविष्‍य की राजनीति और रणनीति के संकेत दिए। वह चौटाला परिवार में एकता के लिए अब भी तैयार दिखे और कहा कि जजपा व इनेलाे अब भी एक हो सकते हैं, लेकिन बड़े चौटाला (ओमप्रकाश चौटाला) नहीं मानेंगे।

डा. अजय सिंह चौटाला की जेबीटी शिक्षक भर्ती मामले में 10 साल की सजा बृहस्‍पतिवार को पूरी हो गई। कोरोना की तीसरी लहर के चलते वह हालांकि पैरोल पर पिछले कुछ दिनों से घर पर ही थे, लेकिन अब उनकी विधिवत रिहाई के बाद न केवल परिवार के सदस्यों में खुशी का माहौल है, बल्कि जजपा कार्यकर्ताओं का भी जोश बढ़ गया है। उनके बड़े बेटे हरियाणा सरकार में उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला बृहस्पतिवार को पूरे दिन दिल्ली में रहे और पिता अजय चौटाला की जेल से रिहाई की तमाम औपचारिकताएं पूरी कराने के बाद उन्हें घर लाए।

दिल्‍ली की तिहाड़ जेल से रिहाई के बाद बेटों के साथ घर पहुंचे डा. अजय सिंह चौटाला। (स्रोत-जजपा)

रिहाई के बाद घर आए पति को देखकर पत्‍नी नैना चौटाला की आंखें भी नम हो गईं। छोटे बेटे दिग्विजय चौटाला ने भावुक होकर कहा कि भगवान किसी दुश्मन और षड्यंत्रकारी को भी ऐसे दिन न दिखाए, जो हमारे दादा ओमप्रकाश चौटाला और पिता अजय सिंह चौटाला ने देखे हैं। रिहाई के बाद डा. अजय सिंह भी बहुत खुश हैं और हर जिले में जाकर कार्यकर्ताओं से मिलने का कार्यक्रम बना रहे हैं। दैनिक जागरण के हरियाणा स्टेट ब्यूरो प्रमुख अनुराग अग्रवाल ने डा. अजय सिंह चौटाला से रिहाई के बाद अगले प्लान के बारे में विस्तार से बातचीत की। पेश हैं इसके प्रमुख अंश-

– हमारे ऊपर आरोप थे कि हमने हरियाणा के लोगों को नौकरियां दी। हमसे राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता रखने वाले लोगों ने हमें जेल की सलाखों के पीछे पहुंचवा दिया, लेकिन इससे हम जरा भी विचलित नहीं हुए। बड़े चौटाला साहब की सजा साढ़े आठ माह पहले पूरी हो गई थी। इसलिए वह जल्दी परिवार के बीच आ गए। मेरी अब हुई है। कोरोना की वजह से मैं पिछले दो साल से अधिकतर समय परिवार के साथ ही था, लेकिन विधिवित रिहाई के बाद जब अपनों के साथ बैठते हैं तो दिल को बहुत खुशी मिलती है।

– बिल्कुल भूमिका है…कांग्रेस नहीं चाहती थी कि प्रदेश के लोगों को रोजगार मिले। उन्हें स्थायी नौकरियां दी जाएं। हमारी सरकार ने जरूरतमंद लोगों को नौकरियां दी थी। ऐसा करने पर राजनीतिक षड्यंत्र रचे गए, जिनमें फंसाकर मुझे और मेरे पिताजी को जेल भेजा गया, लेकिन अपने कार्यकर्ताओं के प्यार और भरोसे के बूते मैं पहले से अधिक मजबूत होकर बाहर निकला हूं। मैं अब अधिक सामर्थ्य के साथ प्रदेश के लोगों और कार्यकर्ताओं की मदद कर सकूंगा।

– मैं किसी के प्रति राजनीतिक बदले की भावना नहीं रखता। यही मेरी ताकत है। मुझे अपनी पार्टी के जांबाज वर्करों पर भरोसा है। मैं विशुद्ध रूप से संगठन का व्यक्ति हूं। हमेशा कार्यकर्ताओं के बीच रहता हूं। आगे भी पार्टी को मजबूत करने के साथ हरियाणा से बाहर उसके विस्तार पर मेरा जोर रहेगा। इसके लिए हम मिलकर प्रोग्राम तैयार कर रहे हैं। मैं दुष्यंत और दिग्विजय दोनों के साथ चर्चा कर आगे बढ़ूंगा।

– यह उन लोगों की झेंप है। हमने अपने भाई को पूरी पार्टी और 20 विधायक सौंपे थे। हमारे पास तो कुछ भी नहीं था। मेरे बेटों ने मेहनत की। कार्यकर्ताओं का मान सम्मान किया। उन्हें अपने साथ जोड़ा। कोई भी राजनीतिक दल सत्ता में रहकर प्रदेश की जनता और कार्यकर्ताओं का सबसे अधिक भला कर सकता है, इसलिए हमने भाजपा के साथ गठबंधन किया। हमारी पार्टी पहले भी भाजपा के साथ गठबंधन कर सरकारें चलाती रही है। यह कोई नई बात नहीं है। अब भी हमारा दो साल से बढ़िया गठबंधन चल रहा है। आगे भी यूं ही चलता रहेगा। कांग्रेस और इनेलो सिर्फ ख्याली पुलाव पकाते रह जाएंगे। एक दिन वह भी आएगा, जब लोग कहेंगे कि एक था इनेलो।

– बड़े चौटाला साहब की रणनीति के बारे में तो वही बेहतर बता सकते हैं, लेकिन मैं चुनाव लड़ने का पूरा इरादा रखता हूं। जिस तरह से मिजोरम के पूर्व मुख्यमंत्री को चुनाव लड़ने की इजाजत चुनाव आयोग ने दी है, उसी तरह से हम भी इजाजत लेने का प्रयास करेंगे। पहले चाहे लोकसभा चुनाव आए या विधानसभा चुनाव, मेरी कोशिश चुनाव लड़ने की होगी।

– मेरे बेटे जो सोच रहे हैं, हो सकता है कि वह सही हो। लेकिन मैं पहले भी कह चुका कि मेरी किसी के प्रति गलत मंशा नहीं है। मैं तो सिर्फ इतना कहना चाहूंगा कि जिसने भी षड्यंत्र रचे, परमात्मा उनको सद्बुद्धि दे। किसी दुश्मन को भी जेल न जाना पड़े।

– अभी तो नहीं हुई। अभी परिवार में आया हूं, लेकिन अपने पिता से मिलने जरूर जाऊंगा।

– अब हमारे चाहने या न चाहने से कुछ नहीं होने वाला है। यह बड़ों की सोच पर निर्भर करता है। यदि बड़े (ओमप्रकाश चौटाला) चाहेंगे तो क्यों एक नहीं हो सकते। लेकिन मुझे लगता है कि शायद वह नहीं चाहेंगे।

– अब हमारे चाहने या न चाहने से कुछ नहीं होने वाला है। यह बड़ों की सोच पर निर्भर करता है। यदि बड़े (ओमप्रकाश चौटाला) चाहेंगे तो क्यों एक नहीं हो सकते। लेकिन मुझे लगता है कि शायद वह नहीं चाहेंगे।

– अब हमारे चाहने या न चाहने से कुछ नहीं होने वाला है। यह बड़ों की सोच पर निर्भर करता है। यदि बड़े (ओमप्रकाश चौटाला) चाहेंगे तो क्यों एक नहीं हो सकते। लेकिन मुझे लगता है कि शायद वह नहीं चाहेंगे।

खास बातें:

– मैं किसी के प्रति राजनीतिक बदले की भावना नहीं रखता, यही मेरी ताकत है।

– पार्टी को मजबूत करने के साथ हरियाणा से बाहर उसके विस्तार पर रहेगा जोर।

– मैंने अपने भाई को पूरी पार्टी और 20 विधायक दिए थे, वह दिन भी आएगा, जब लोग कहेंगे एक था इनेलो।

– चुनाव आयोग से चुनाव लड़ने की अनुमति मांगूंगा, पहले जो भी चुनाव आएगा, वही लडूंगा।

– भाजपा के साथ चल रहा जजपा का गठबंधन मजबूत, सरकार कार्यकाल पूरा करेगी, आगे भी मिलकर लड़ेंगे।

– जजपा और इनेलो में एकता की संभावना अब बड़े चौटाला साहब के विवेक पर ही निर्भर।