विदेश मंत्री एस जयशंकर ने आस्ट्रेलिया सरकार द्वारा अपनी सीमा को खोलने के फैसले का किया स्वागत

वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप के कारण आस्ट्रेलिया ने अपने दरवाजे दुनिया के लिए बंद कर दिए थे। सीमाओं को पहली बार बंद किए जाने के लगभग दो साल बाद फिर से खोलने की घोषणा की गई है। जी हां, आस्ट्रेलिया उन लोगों के लिए अपनी सीमा खोलने जा रहा है, जिन्होंने टीकाकरण की पूरी डोज ले ली है। साथ ही सीमा को वीजा धारकों के लिए भी खोला जाएगा।

आस्ट्रेलियाई विदेश मंत्री मारिस पायने के निमंत्रण पर भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर 10 से 13 फरवरी तक आस्ट्रेलिया की एक आधिकारिक यात्रा पर हैं। यहां पर वह शुक्रवार (कल) को चौथी क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक का हिस्सा बने। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शनिवार को आस्ट्रेलियाई सीमा को फिर से खोलने का स्वागत किया, जो फंसे हुए भारतीय छात्रों और वीजा धारकों को आस्ट्रेलिया से लौटने में मदद करेगा।

आस्ट्रेलियाई प्रधान मंत्री स्काट मारिसन‌ ने की थी घोषणा

आस्ट्रेलियाई प्रधान मंत्री स्काट मारिसन ने सोमवार को घोषणा की थी कि देश 21 फरवरी को पर्यटकों सहित पूरी तरह से टीकाकरण वाले सभी वीजा धारकों के लिए खुल जाएगा।

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने किया फैसले का स्वागत

विदेश मंत्री डा एस जयशंकर ने अपने आस्ट्रेलियाई समकक्ष मारिस पायने के साथ एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि दोनों मंत्रियों ने खास मुद्दों पर उपयोगी और व्यापक चर्चा की। उन्होंने बताया कि बातचीत में दोनों देशों के बीच के संबंधों और आने वाले वक्त में गहन परिवर्तन मुख्य विषय रहा।

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा, ‘मैं आस्ट्रेलिया सरकार द्वारा सीमा खोलने का स्वागत करता हूं, जो उन लोगों की मदद करेगा जो भारत में वापस आने का इंतजार कर रहे हैं, विशेष रूप से छात्रों, अस्थायी वीजा धारकों और अलग हुए परिवारों और यह एक ऐसी चीज है, जिसकी बहुत सराहना की जाती है।’

एस जयशंकर ने बताया, ‘साइबर फ्रेमवर्क डायलाग वर्चुअल शिखर सम्मेलन का प्रत्यक्ष परिणाम है जो जून में आयोजित किया गया था जब हमने अपने संबंधों को व्यापक रणनीतिक भागीदारों के लिए बढ़ाया था।’ उन्होंने कहा, ‘हमने COVID चुनौतियों का जवाब देने के लिए भी अपने अनुभव साझा किए। विशेष रूप से वैक्सीन के साथ अन्य मित्र देशों की सहायता करना। और हमने अधिक भरोसेमंद और लचीला आपूर्ति श्रृंखला बनाने और इंडो-पैसिफिक में व्यापक और समावेशी विकास सुनिश्चित करने के लिए खुद को प्रतिबद्ध किया है।’

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा, ‘हमने आतंकवाद और उग्रवाद के बारे में भी चिंताओं को साझा किया। सीमा पार आतंकवाद को जारी रखने के बारे में हमें गंभीर चिंताएं हैं और बहुपक्षीय मंचों सहित आतंकवाद विरोधी सहयोग को गहरा करने का हमारा साझा प्रयास है।’ आगे उन्होंने कहा, ‘हम सभी राज्यों की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता का सम्मान करते हुए नियम-आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था, अंतर्राष्ट्रीय जल में नेविगेशन की स्वतंत्रता, सभी के लिए कनेक्टिविटी, विकास और सुरक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में काम करना जारी रखेंगे।’