चौटाला परिवार में अब दिल मिलना मुश्किल, जजपा और इनेलो के विलय पर ओपी चौटाला का बड़ा बयान

Chautala Family:  ह‍रियाणा में चौटाला परिवार में अब दिलों का मिलना मुश्किल लग रहा है और ऐसा लगता है कि परिवार में कभी समाप्‍त न होने वाली दूरी हो चुकी है। जननासक जनता पार्टी के अध्‍यक्ष अजय सिंह चौटाला के परिवार में एकता की पेशकश को जिस तरह से उनके पिता ओमप्रकाश चौटाला ने जिस तरह से खारिज किया है, उससे साफ होता है कि अब इस सियासी परिवार में एकता संभव नहीं है।

अजय चौटाला की पारिवारिक एकता की पेशकश को बड़े चौटाला ने भी ठुकराया

हरियाणा में भाजपा-जजपा गठबंधन के विरुद्ध तीसरा मोर्चा बनाने की संभावनाओं के बीच इनेलो प्रमुख ओमप्रकाश ने साफ कर दिया है कि उनके बेटे अजय सिंह चौटाला के नेतृत्व वाली जननायक जनता पार्टी और इनेलो का आपस में विलय किसी सूरत में संभव नहीं है। सजा पूरी करने के बाद जेल से रिहा हुए अजय सिंह चौटाला ने कहा था कि यदि उनके पिता ओमप्रकाश चौटाला चाहेंगे तो इनेलो व जजपा एक हो सकते हैं। इसके नियम और शर्तें क्या होंगी, यह बाद की बात है।

ओमप्रकाश चौटाला और अभय चौटाला हालांकि पहले भी यह कई बार कह चुके हैं कि इनेलो का जजपा में विलय संभव नहीं, लेकिन जब भी विलय की संभावना बनती है तो अजय चौटाला अपने पिता और छोटे भाई के पाले की तरफ गेंद सरका देते हैं। चौटाला परिवार में चल रही इस गेंदबाजी से पुराना वर्कर असमंजस में है।

इनेलो प्रमुख ओमप्रकाश चौटाला 87 साल की उम्र के बावजूद राजनीतिक तौर पर खासे सक्रिय बने हुए हैं। आजकल वह प्रदेश के दौरे पर हैं और लोगों के शादी-ब्याह तथा सामाजिक कार्यक्रमों में पूरी सक्रियता से भागीदारी कर रहे हैं। उम्र के इस पड़ाव में भी चौटाला मीडिया के सवालों का बखूबी सामना करते हैं और उनके बखूबी जवाब देते हैं। उनके बेटे इनेलो महासचिव अभय चौटाला हरियाणा में गठबंधन की सरकार के विरुद्ध तीसरा मोर्चा बनाने की संभावनाएं तलाश रहे हैं। अभय इस मोर्चा में पूर्व केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह और पूर्व सीपीएस रामपाल माजरा सरीखे ऐसे दो दर्जन नेता शामिल हो सकते हैं, जिनका हरियाणा की राजनीति में वजन रहा है और हाल-फिलहाल उनकी अपने मौजूदा दलों में अधिक पूछ नहीं है।

अभय चौटाला की सीएम मनोहरलाल से मुलाकात पर चर्चाएं तेज

अभय चौटाला की पिछले दिनों मुख्यमंत्री मनोहर लाल से भी मुलाकात हुई है। हालांकि अभय के विरोधी उनकी मुख्यमंत्री से मुलाकात को केसरिया और हरे रंग के मिश्रण से जोड़कर देख रहे हैं, लेकिन सूत्रों का कहना है कि अभय ने ऐलनाबाद उपचुनाव के दौरान सीएम द्वारा की गई घोषणाओं को पूरा कराने के लिए मनोहर लाल से मुलाकात की है।

जेबीटी शिक्षक भर्ती मामले में सजा पूरी कर लौटे जजपा अध्यक्ष अजय चौटाला के समर्थक अभय चौटाला और मनोहर लाल की मुलाकात को सियासी चश्मे से देख रहे हैं, लेकिन साथ ही उन्हें यह भी लगता है कि जजपा के लिए यह मुलाकात किसी तरह का नुकसान पहुंचाने वाली बिल्कुल भी नहीं है। इस मुलाकात से दुष्यंत समर्थक बेचिंत हैं।

अजय चौटाला ने जेल से रिहाई के तुरंत बाद कहा था कि यदि बड़े चौटाला चाहेंगे तो इनेलो व जजपा के एक होने की उम्मीद बन सकती है, लेकिन ओमप्रकाश चौटाला ने साफ कर दिया है कि दोनों दल किसी सूरत में अब एक नहीं हो सकते। अब बात बहुत आगे तक बढ़ चुकी है। इनेलो के सामने राजनीतिक उतार-चढ़ाव आते रहे हैं और एक दिन वह इससे उबर जाएगी। चौटाला ने एक उदाहरण के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की है कि इनेलो की दरियादिली की वजह से भाजपा हरियाणा में कई बार सत्ता में भागीदार रही है।

वाजपेयी के साथ चौटाला ने याद किए अपने पुराने रिश्ते

ओमप्रकाश चौटाला कहते हैं कि अटल बिहारी वाजपेयी की चाह के बावजूद उनकी सरकार में हमारा कोई मंत्री नहीं था। वाजपेयी सरकार जब सत्ता से बाहर हुई तो इनेलो के वोट की वजह से ही वह वापस सत्ता में लौटी। हरियाणा में भाजपा 45 सीटें चाहती थीं। उस समय मनोहर लाल भाजपा के संगठन महामंत्री थे, लेकिन भाजपा भी यह मानकर चल रही थी कि सीटों के बंटवारे का अनुपात भले ही कोई भी रहे, लेकिन मुख्यमंत्री चौटाला को ही बनना है। ऐसे में दोनों दलों के हित-अहित आड़े नहीं आए।

चौटाला ने मानी मुलायम के परिवार में एकता की ताकत

इनेलो प्रमुख ओमप्रकाश चौटाला राजनीति में परिवार की ताकत को नजरअंदाज भी नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव के नतीजों से जुड़े सवाल पर कहा कि वहां मुलायम सिंह यादव का परिवार पूरी तरह से एक हो गया है। इस वजह से भाजपा के सामने सरकार बनाने की दिक्कतें खड़ी हो गई हैं।

चौटाला बोले कि मैं न तो ज्योतिषी हूं और न ही पत्रकार, लेकिन इतना दावे से कह सकता हूं कि भाजपा दोबारा सत्ता में नहीं आ रही है। मुलायम सिंह के परिवार की एकजुटता से जब सपा सरकार में आ सकती है तो हरियाणा में चौटाला परिवार एक क्यों नहीं हो सकता? इस सवाल पर बड़े चौटाला अपने नेतृत्व वाली पुरानी इनेलो सरकार की उपलब्धियां और भविष्य का एजेंडा बताने लगे।