कोविड काल में सरसों तेल की बढ़ी अधिक मांग, पिछले साल मार्च से भाव में लगातार हो रही बढ़ोतरी

कोविड काल में सरसों तेल की मांग अधिक बढ़ी है। इसके चलते पिछले साल मार्च माह से सरसों के भाव में भी लगातर बढ़ोतरी है। देश के पंजाब, जम्मू, बंगाल और बिहार से सरसों तेल की अधिक मांग आ रही है। इसका कारण है इन राज्यों में लोग नानवेज अधिक खाते है। कोविड में लोग नानवेज भी अधिक खाने लगे हैं। यह सभी लोग नानवेज में अधिकतर सरसों के तेल का इस्तेमाल करने लगे हैं। किसी के पास भी सरसों का पुराना स्टाक नहीं है।

कोरोना के चलते लोगों का रिफाइंड या अन्य तेल को छोड़कर सरसों तेल की ओर रूझान अधिक बढ़ा है। अब रोजाना हिसार नई अनाज मंडी से 10 गाड़ियां सरसों तेल लेकर जाती है। एक समय था कि हिसार अनाज मंडी से इक्का-दुक्का गाड़ियां जाती थी। इसका बोझ तेल की मिलों व दुकानदारों पर पड़ा है, क्योंकि उनको समय पर स्टाक पूरा रखना जरूरी है। इसी वजह से सरसों तेल के भाव में भी बढ़ोतरी हुई। इसका सीधा फायदा किसानों को हुआ। ऐसा पहली बार हुआ है। वरना किसानों को सरसों का भाव आमतौर पर तीन हजार, 3200 से लेकर 4200 तक ही मुश्किल से मिल पाता था। इन दिनों फसलों में इस्तेमाल होने वाली कीटनाशक दवा व खाद में भी बढ़ोतरी हुई है।

सितंबर व अक्टूबर में रहा सबसे अधिक भाव

पिछले साल से सरसों तेल में लगातार बढ़ोतरी देखते हुए किसानों को तेजी आने का इंतजार है। सितंबर व अक्टूबर माह में सबसे अधिक बढ़ोतरी रही। इन माह में सरसों का भाव प्रति क्विंटल 8400 रुपये तक जा पहुंच गया था। किसानों का 12 हजार तक भाव पहुंचने के आसार है। इस वजह से कोविड में सरसों का तेल भी प्रति किलो 185 रुपये तक पहुंच गया था। अब गिरावट आई है।

व्यापरी बोले कि अब नई सरसों आनी है। पुराना स्टाक किसी के पास भी नहीं बचा है। 5 प्रतिशत गांव में किसानों के पास घरों में है, जो बेचना नहीं चाह रहे।

— अनाज मंडी सुपरवाइजर अशोक कुमार का कहना है कि मार्च से सरसों का नया भाव जारी होता है। पिछले साल से लगातार बढ़ोतरी है। सरसों की खपत भी बढ़ी है। अच्छा है कि किसानों को अच्छा भाव मिले।

पिछले साल से अब तक भाव के आंकड़े

15 मार्च से 5 हजार से 5200

अप्रैल में 5200 से 6300

मई में 5500 से 6000

जून में 6300 से 6400

जुलाई में 6050 से 6600

अगस्त में 6400 से 7500

सितंबर में 6800 से 8400

अक्टूबर में 8500 से 8600

नवंबर में 6300 से 7500

दिसंबर में 7600 से 8200

साल 2022 के जनवरी में 6500 से 7000

फरवरी में 6800 से 7200

— – नानवेज में सरसों तेल अधिक इस्तेमाल होता है। लोग भी कोरोना के कारण अधिक इस्तेमाल करने लगे है। हमें अपना स्टाक पूरा रखना पड़ता है। पहले महीने में दो हजार क्विंटल सरसों तेल की खपत होती थी। अब साढ़े तीन हजार से चार हजार क्विंटल तक खपत बढ़ गई है। बिहार, बंगाल से इतनी मांग आई कि पूरी भी नहीं हो सकी।कृष्णलाल, कैंट स्थित एसबी तेल मिल।

भाव को कोई नहीं देखता। सोमवार को सरसों तेल चार रुपये सस्ता हुआ है। लोग रिफाइंड के बजाय सरसों तेल अधिक खरीदते है। शाम तक रिफाइंड का एक टीन बिकता है तो सरसों के छह टीन बिक जाते है। सरसों तेल खाने में भी ठीक रहता है। मैंने खुद रूटीन में सरसों का तेल इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है।

सुभाष सहारण, मां चंदा एसएस इंटरप्राइजिज, बालसमंद।

— – एक तो लाकडाउन के कारण बाहर से सामान नहीं आ पाया। दूसरा लोगों का रूझान भी सरसों तेल की ओर काफी बढ़ा है। इसमें मिलावट भी बहुत कम होती है। खाने में भी ठीक रहता।

पंजाब व जम्मू से सरसों तेल की अधिक मांग आ रही है। लोग नानवेज में सरसों तेल का अधिक इस्तेमाल करने लगे है। रोजाना 10 गाड़ियां मंडी से जा रही है।