LIVE Kisan Andolan: दिल्ली में कड़ाके की ठंड में भी किसानों का धरना प्रदर्शन लगातार जारी

सिंघु और टीकरी बॉर्डर पर किसानों का प्रदर्शन लगातार 23वें दिन भी जारी है। ट्रैफिक पुलिस ने बताया कि शुक्रवार को झटीकरा बॉर्डर केवल दोपहिया और पैदल यात्रियों के लिए खुला है। दिल्ली से नोएडा की ओर जाने वाला चिल्ला बॉर्डर का एक हिस्सा यातायात के लिए खुला है, हालांकि नोएडा से दिल्ली के लिए दूसरा हिस्सा बंद है। वहीं, नए कृषि कानूनों के विरोध में चल रहे किसान आंदोलन और रास्ते बंद किए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि किसानों के आंदोलन को बिना बाधा जारी रखने की इजाजत दी जानी चाहिए और यह अदालत इसमें दखल नहीं देगी, क्योंकि विरोध करने का अधिकार मौलिक अधिकार है। अदालत ने सिर्फ एक ही चेतावनी दी कि किसानों या पुलिस की तरफ से शांति भंग नहीं होनी चाहिए। अदालत ने कहा कि किसानों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार है, लेकिन इससे दूसरों के आने-जाने और खानपान की जरूरी वस्तुएं हासिल करने का मौलिक अधिकार बाधित नहीं होना चाहिए। प्रदर्शन करने के अधिकार का मतलब पूरे शहर की नाकाबंदी नहीं है।

LIVE Kisan Andolan:

  • चिल्ला बार्डर पर किसानों व नोएडा पुलिस के बीच गरमागरमी का माहौल रहा। नोएडा पुलिस की तमाम कोशिशों के बावजूद किसानों ने कुछ देर के लिए दोपहर में बार्डर को सील कर दिया। दिल्ली पुलिस ने बैरिकेड लगाकर किसानों को दिल्ली में प्रवेश नहीं करने दिया। नोएडा पुलिस ने सख्ती दिखाते हुए दिल्ली से नोएडा जाने वाले मार्ग को खुलवा दिया।
  • काफी देर तक मार्ग पर यातायात बाधित रहा, वाहन चालकों को नोएडा जाने के लिए दूसरे रास्तों का सहारा लेना पड़ा। वहीं यूपी गेट पर किसानों की खाप पंचायत के मद्देनजर दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा के चाक चौबंद इंतजाम किए। दिल्ली पुलिस के जवानों के साथ ही अर्धसैनिक बल के जवानों की कई टुकड़ियां तैनात की गई थी। दोपहर में किसानों ने दिल्ली मेरठ एक्सप्रेस-वे पर खाप पंचायत शुरू की। पहले के मुकाबले बार्डर पर लंगर सेवा बढ़ गई है, इसमें महिलाएं भी योगदान दे रही हैं।
  • केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने गुरुवार को कहा कि सरकार कृषि कानूनों के विरोध में प्रदर्शन कर रहे किसानों के साथ बैठ कर बातचीत करने और मुद्दों का समाधान करने के लिए इच्छुक है। पंजाब, हरियाणा और अन्य राज्यों के हजारों किसान सिंघु और टिकरी बॉर्डर सहित दिल्ली से लगी अन्य सीमाओं पर पिछले एक पखवाड़े से भी ज्यादा समय से प्रदर्शन कर रहे हैं। वे तीन नए कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं।
  • पीएचडीसीसीआइ के एक ऑनलाइन कार्यक्रम में पुरी ने कहा, मुझे इस बात से दुख हो रहा है कि प्रदर्शन कर रहे कई लोगों को पता ही नहीं है कि वे किस चीज का विरोध कर रहे हैं। सरकार अब भी सभी किसानों को संदेश भेज रही है कि कृपया आएं और बात करें। उन्होंने कहा कि किसानों की तीन मांगें हैं-एमएसपी समाप्त नहीं किया जाए, मंडिया बरकरार रहें और कोई भी गुप्त तरीके से किसानों की जमीन पर कब्जा न कर सके।