एक वर्ष से कोरोना महामारी से जूझ रही दुनिया के लिए डब्‍ल्‍यूएचओ की एक अच्‍छी खबर

कोराना महामारी से जूझ रही दुनिया के लिए संयुक्‍त राष्‍ट्र की स्‍वास्‍थ्‍य एजेंसी विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन एक अच्‍छी खबर लेकर सामने आया है। डब्‍ल्‍यूएचओ के महानिदेशक टैड्रॉस ऐडहेनॉम घेबरेयेसस ने कहा है कि इस महामारी की वैक्‍सीन कोवैक्‍स ने ने करीब 2 अरब खुराक की खरीदारी के लिए अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। आपको बता दें कि कोवैक्‍स पूरी दुनिया के समर्थन से शुरू होने वाली पहल है।

संगठन का मकसद इस वैक्‍सीन को जरूरतमंद देशों में एक समान तरीके से उपलब्‍ध कराना है। संगठन की तरफ से उम्‍मीद जताई गई है कि मार्च 2021 तक इसको उपलब्‍ध करवा दिया जाएगा। इस पहल में शामिल सभी देशों ने वैक्‍सीन देने को लेकर अपने यहां पर खाका भी तैयार कर लिया है। इसके तहत सबसे पहले वैक्‍सीन स्‍वास्‍थ्‍यकर्मियों को दी जाएगी इसके बाद ये वैक्‍सीन जरूरतमंद मरीजों को दी जाएगी। इनमें भी अधिक जोखिम वाले मरीजों को ये पहले दी जाएगी। संगठन की तरफ से ये भी कहा गया है कि इसके जरिए करोड़ों जिंदगियों को बचाया जा सकेगा।

डब्‍ल्‍यूएचओ के महानिदेशक के मुताबिक वैक्‍सीन को विभिन्‍न देशों में उपलब्‍ध कराने को लेकर भी खाका तैयार कर लिया गया है। इसमें पहले जिन देशों ने इसको लेने की इच्‍छा जताई है उन्‍हें प्राथमिकता के आधार पर ये वैक्‍सीन मुहैया करवाई जाएगी। आपको बता दें कि विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन की पहल से दुनिया के गरीब देशों को इस संबंध में बड़ी मदद मिल सकेगी। डब्‍ल्‍यूएचओ के मुताबिक 2021 के अंत तक दुनिया की 20 फीसद आबादी के लिए और बाकी 2022 में मुहैया करवा दी जाएगी। इसका सीधा सा अर्थ ये भी है कि वैक्‍सीन का सिलसिला कम से कम 2022 तक चलता रहेगा। इस बीच आने वाला वर्ष कोरोना के साए के इर्द-गिर्द ही कटेगा।

घेबरेयेसस ने पत्रकारों से बात करते हुए इस वैक्‍सीन को लेकर अपनी खुशी का इजहार भी किया है। उन्‍होंने इसको एक मील का पत्‍थर बताया है। उन्‍होंने इस दौरान कहा कि ये कहना काफी सुखद अनुभव दिलाता है कि हम कोरोना वायरस के खात्‍मे की तरफ बढ़ रहे हैं। इसके बाद भी हमें पूरी एहतियात बरतनी होगी। ऐसा न करने पर हम न सिर्फ खुद को बल्कि दूसरों को भी मुश्किलों में डाल देंगे। लिहाजा सभी को मिलकर आगे बढ़ना होगा। हम सभी की इसमें बराबर की जिम्‍मेदारी होगी। उन्‍होंने कहा कि ये खबर किसी अंधेरी सुरंग में दिखाई देने वाली एक रोशनी की ही तरह है। लेकिन हम वहां तक अभी पहुंचे नहीं है।