इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अपर मुख्‍य सचिव से पूछा- पुलिस हिरासत में मौत पर क्या कार्रवाई की गई

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बुलंदशहर के खुर्जा नगर कोतवाली पुलिस की हिरासत में मौत पर अपर मुख्य सचिव गृह को कृत कार्यवाही रिपोर्ट के साथ 19 अप्रैल तक व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। जानकारी मांगी है कि हिरासत में मौत के लिए जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों पर क्या कार्रवाई की गई है। न्यायिक जांच में अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने हिरासत में मौत के लिए पुलिस अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया गया है। कहा है कि पुलिस ने मृतक का पोस्टमार्टम नहीं कराया और लाश घरवालों को न सौंप पुलिस ने अंतिम संस्कार कर दिया। यह आदेश न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र तथा न्यायमूर्ति रजनीश कुमार की खंडपीठ ने सुरेश देवी व अन्य की याचिका पर दिया है।

कोर्ट ने पुलिस हिरासत में मौत को गंभीर मामला बताया

कोर्ट ने कहा कि पुलिस हिरासत में मौत गंभीर मामला है। न्यायिक जांच में पुलिस की खुदकशी की कहानी गलत साबित हुई है। ऐसे में बड़े अधिकारियों को संवेदनशीलता दिखाते हुए तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए और पीडि़त पक्ष को मुआवजा देने पर विचार करना चाहिए। कोर्ट ने आदेश की प्रति प्रदेश के मुख्य सचिव को भेजने का भी निर्देश दिया है। याची को जांच रिपोर्ट देने को कहा है। याचिका की सुनवाई 19 अप्रैल को होगी। याचिका पर अधिवक्ता आशुतोष कुमार तिवारी व धर्मेंद्र सिंह ने बहस की।

मामले के अनुसार, याची के बेटे सोमदत्त उर्फ सोनू को पुलिस पकड़ कर थाने ले गई। उसने आपसी सहमति से अंतरजातीय विवाह किया था। बुलंदशहर के खुर्जा नगर कोतवाली में 11/12 दिसंबर 2020 की रात पुलिस ने सोनू की जमकर पिटाई की, जिससे उसकी थाने में ही मौत हो गई। याची ने पुलिस पर हिरासत में हत्या करने का आरोप लगाया। पुलिस इसे खुदकशी बता रही है। मामले की न्यायिक जांच की गई, जिसमें हिरासत में मौत के आरोप की पुष्टि की गई है और मौत के लिए पुलिस को जवाबदेह ठहराया गया है।

कोर्ट ने कहा कि दोषी पुलिस अधिकारियों पर एफआइआर दर्ज कराई जाए

अपर शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि जांच रिपोर्ट 18 जनवरी 2022 को अपर मुख्य सचिव गृह को जिलाधिकारी द्वारा भेजी जा चुकी है। उसके बाद क्या हुआ इसकी जानकारी नहीं है। कोर्ट ने कहा कि दोषी पुलिस अधिकारियों पर एफआइआर दर्ज कराई जाए और पीडि़ता को मुआवजा देने पर विचार किया जाना चाहिए।

कोर्ट ने पुलिस हिरासत में मौत को गंभीर मामला बताया

कोर्ट ने कहा कि पुलिस हिरासत में मौत गंभीर मामला है। न्यायिक जांच में पुलिस की खुदकशी की कहानी गलत साबित हुई है। ऐसे में बड़े अधिकारियों को संवेदनशीलता दिखाते हुए तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए और पीडि़त पक्ष को मुआवजा देने पर विचार करना चाहिए। कोर्ट ने आदेश की प्रति प्रदेश के मुख्य सचिव को भेजने का भी निर्देश दिया है। याची को जांच रिपोर्ट देने को कहा है। याचिका की सुनवाई 19 अप्रैल को होगी। याचिका पर अधिवक्ता आशुतोष कुमार तिवारी व धर्मेंद्र सिंह ने बहस की।

बुलंदशहर के खुर्जा नगर कोतवाली में मौत का मामला

मामले के अनुसार, याची के बेटे सोमदत्त उर्फ सोनू को पुलिस पकड़ कर थाने ले गई। उसने आपसी सहमति से अंतरजातीय विवाह किया था। बुलंदशहर के खुर्जा नगर कोतवाली में 11/12 दिसंबर 2020 की रात पुलिस ने सोनू की जमकर पिटाई की, जिससे उसकी थाने में ही मौत हो गई। याची ने पुलिस पर हिरासत में हत्या करने का आरोप लगाया। पुलिस इसे खुदकशी बता रही है। मामले की न्यायिक जांच की गई, जिसमें हिरासत में मौत के आरोप की पुष्टि की गई है और मौत के लिए पुलिस को जवाबदेह ठहराया गया है।

कोर्ट ने कहा कि दोषी पुलिस अधिकारियों पर एफआइआर दर्ज कराई जाए

अपर शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि जांच रिपोर्ट 18 जनवरी 2022 को अपर मुख्य सचिव गृह को जिलाधिकारी द्वारा भेजी जा चुकी है। उसके बाद क्या हुआ इसकी जानकारी नहीं है। कोर्ट ने कहा कि दोषी पुलिस अधिकारियों पर एफआइआर दर्ज कराई जाए और पीडि़ता को मुआवजा देने पर विचार किया जाना चाहिए।