अंबाला-हिसार राष्ट्रीय राजमार्ग पर जोर पकड़ने लगी टोल हटाओ मुहिम, ग्रामीण और विपक्ष हमलावर

अंबाला-हिसार राष्ट्रीय राजमार्ग पर पिहोवा हलके में 43 किलोमीटर के दायरे में दो टोल होने को लेकर लोगों की एक टोल हटाओ मुहिम जोर पकड़ने लगी है। केंद्र सरकार स्पष्ट कर चुकी है कि 60 किलोमीटर के दायरे में केवल एक टोल ही लग सकता है। ऐसे में लोगों की मांग है कि एक टोल यथाशीघ्र हटाया जाना चाहिए। वहीं विपक्ष भी हमलावर हो उठा है।

अंबाला हिसार राष्ट्रीय राजमार्ग नंबर 152 पर पिहोवा हलके में एक टोल गांव थाना के पास तो दूसरा इस्माईलाबाद के पास सैनी माजरा में लगा हुआ है। पहले भी दोनों टोल के बीच कम दूरी को लेकर सवाल उठते रहे हैं। दोनों के बीच की दूरी केवल 43 किलोमीटर है। दोनों की वसूली को लेकर इलाके के लोग कई साल से एतराज जताते आ रहे हैं। दैनिक यात्री दिनेश सचदेवा, संजीव कुमार और पिंकू मुरादिया का कहना है कि तेल से अधिक टोल खर्च वहन करना पड़ रहा है। यात्रियों का कहना है कि दो टोल के कारण अधिकांश लोग विकल्प के तौर पर रास्ते बदल लेते हैं। जिससे लिंक मार्गों पर अधिक लोड बढ़ गया है। यही नहीं यात्री भी अनावश्यक परेशानियां झेलते हैं। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी स्पष्ट कर चुके हैं कि राष्ट्रीय राजमार्ग पर 60 किलोमीटर की दूरी में केवल एक टोल ही वहन करना होगा। ऐसे में लोगों की मांग है कि एक टोल प्राथमिकता के आधार पर हटाया जाना चाहिए। इसमें देरी लोगों की जेब पर भारी साबित हो रही है।

टोल बाहर करे सरकार

युवा समाजसेवी गोल कंसल का कहना है कि एक टोल जिले से बाहर होगा। इसमें देरी नहीं बरतनी चाहिए। सरकार को इस पर तेजी से कार्रवाई करनी चाहिए। उनका कहना है कि तुरंत प्रभाव से एक टोल पर वसूली रोकी जानी चाहिए। क्योंकि यह स्पष्ट हो चुका है कि दो टोल सरासर नियमों के विरूद्ध हैं।

आंदोलन के लिए मजबूर ना करें

आप पार्टी के नेता रमेश लोटनी का कहना है कि सरकार की जवाबदेही बनती है कि जब 60 किलोमीटर का नियम था तो इतने साल टोल वसूली क्यों की। इसकी भरपाई कौन करेगा। लोगों की जेब पर ढाका डालने का काम किया गया है। अब सरकार जनता को आंदोलन के लिए मजबूर ना करे। अन्यथा परिणाम बेहतर नहीं होंगे।