सूर्य पर देखी गई तेज हलचल, पृथ्वी पर कल आ सकता है सौर तूफान; जानें किन- किन पर पड़ेगा प्रभाव

हाल के दिनों में सूर्य पर एक ही स्थान पर कम से कम 17 बार तेज लपटें उठने से अंतरिक्ष में विस्फोट हो चुका है। इस हलचल से गुरुवार तक पृथ्वी पर एक मध्यम दर्जे का भू-चुंबकीय तूफान आ सकता है। स्पेस डाट काम ने बताया कि सूर्य की सतह पर एआर 2975 नामक जगह(सनस्पाट) पर सोमवार से अब तक कम से कम 17 बार तेज लपटें निकलते देखी जा चुकी हैं। सूर्य की सतह पर मची इस तेज हलचल का असर पृथ्वी पर भी महसूस किया जाएगा।

नासा ने ली आश्चर्यजनक दृश्यों की फोटो

विज्ञानियों का मानना है कि गुरुवार को पृथ्वीवासी आकाशीय चुंबकीय तूफानों का सामना कर सकते हैं। सूर्य पर सनस्पाट वह क्षेत्र होता है जहां चुंबकीय रेखाएं मुड़ जाती हैं और अचानक दृश्यमान सतह के पास पुन:संरेखित हो जाती हैं। नासा की शक्तिशाली सोलर डायनेमिक्स आब्जरवेटरी ने सूर्य की सतह पर घट रही घटनाओं के आश्चर्यजनक दृश्यों की फोटो ली हैं।

आवेशित कणों से आ सकते हैं निम्न व मध्यम तीव्रता के भू-चुंबकीय तूफान

नासा और नेशनल ओशनिक एंड एटमास्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन, वेबसाइट ने कहा कि पहला कोरोनल मास इजेक्शन (सीएमई) यानी आवेशित कणों का अंतरिक्ष में बिखरना गुरुवार को देखने को मिलेगा। इसी तरह कम से कम एक और घटना शुक्रवार को होने की उम्मीद है। ऐसा अनुमान है कि आवेशित कणों से निम्न व मध्यम तीव्रता के भू-चुंबकीय तूफान आ सकते हैं। माना जाता है कि अधिक तीव्रता वाले सौर तूफान बिजली की लाइनों और उपग्रहों को प्रभावित कर सकते हैं।

जानें क्यों आते हैं सौर तूफान

वैज्ञानिकों के अनुसार प्रत्येक 11 वर्ष में सूर्य की सतह की हलचल और विस्फोट से इतनी भारी मात्रा में में विकिरण निकलता है, जो अंतरिक्ष में बड़े सौर तूफान लाने की क्षमता रखते हैं। साल 2019 से इनका नया चरण शुरू है। यह जुलाई 2025 तक चरम पर पहुंचेगा। मौजूदा सौर तूफान भी इसी का परिणाम है।

पहले भी आ चुके हैं सौर तूफान

1972 के सौर तूफान में कई देशों में बिजली और संचार सेवाओं को नुकसान हुआ था। अमेरिकी नौसेना द्वारा उत्तरी वियतनाम के समुद्र में लगाई चुंबकीय प्रभाव से फटने वाली खदान भी स्वयं फट पड़ीं।

-1989 में कनाडा के क्यूबेक में हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट ठप होने से करीब 60 लाख लोग नौ घंटे बिना बिजली के रहे।

-2003 में 19 अक्टूबर से पांच नवंबर तक इन तूफानों ने अमेरिका में कई बार रेडियों सेवाएं ठप कीं। इसे रेडियो ब्लैक आउट कहा गया।