सुपरटेक ट्विन टावर के घर खरीदारों को राहत, हितों की रक्षा करेगा सुप्रीम कोर्ट, ब्याज के साथ पैसे भी मिलेंगे वापस

सुपरटेक बिल्डर के नोएडा स्थित एमराल्ड कोर्ट प्रोजेक्ट में फ्लैट खरीदने के लिए पैसे फंसाकर परेशानियों से जूझ रहे खरीदारों के लिए राहत भरी खबर है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि वह रियल एस्टेट कंपनी सुपरटेक लिमिटेड के इस प्रोजेक्ट के 40 मंजिला ट्विन टावर में फ्लैट खरीदने वालों के हितों की रक्षा करेगा। कोर्ट ने इन टावरों में फ्लैट खरीदने वालों से 15 अप्रैल तक भुगतान वापसी के लिए दावा पेश करने को कहा है। नेशनल कंपनी ला टिब्यूनल (एनसीएलटी) ने सुपरटेक को दिवालिया घोषित कर दिया है।

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस सूर्यकांत की पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए उक्त बात कही। सुनवाई के दौरान सुपरटेक ने अदालत को बताया कि वह दिवालिया घोषित करने के एनसीएलटी के आदेश के खिलाफ अपील करेगी। एनसीएलटी ने हाल ही में यूनियन बैंक आफ इंडिया की एक अर्जी पर सुनवाई करते हुए सुपरटेक को दिवालिया घोषित कर दिया था। यूनियन बैंक ने सुपरटेक पर 432 करोड़ रुपये का बकाया न चुकाने का आरोप लगाया था।

सुप्रीम कोर्ट ने निर्धारित मानकों का उल्लंघन कर बनाए गए एमराल्ड कोर्ट प्रोजेक्ट के दोनों टावरों को गिराने का आदेश दिया हुआ है। इसे 22 मई तक गिराए जाने की संभावना है। इस मामले की सुनवाई के दौरान कहा गया कि एमराल्ड कोर्ट में कुल 711 लोगों ने फ्लैट खरीदे थे, लेकिन सुपरटेक ने सिर्फ 652 खरीदारों के दावों का ही निपटान किया है। न्यायमित्र गौरव गोयल ने कहा कि इस तरह 59 घर खरीदारों को अब भी फ्लैट खरीद की रकम लौटाने की जरूरत है। यह बकाया राशि करीब 14.69 करोड़ रहने का अनुमान है।

पीठ ने सुपरटेक को दिवालिया घोषित किए जाने के आदेश को भी सुनवाई के दौरान संज्ञान में लिया। एनसीएलटी के 25 मार्च को जारी आदेश के तहत सुपरटेक को दिवालिया घोषित करने के साथ ही कर्ज समाधान प्रक्रिया शुरू करने और हितेश गोयल को समाधान पेशेवर नियुक्त किया गया है। पीठ ने कहा कि घर खरीदारों के दावों की राशि को वित्तीय ऋणदाताओं के दूसरे दावों से अलग रखा जाएगा। इस मामले की अगली सुनवाई छह मई को होगी।