यूपी में बिजली उपभोक्ताओं के लिए अप्रैल से लागू हो सकता है मुआवजा कानून, पावर कारपोरेशन ने तैयार कराया साफ्टवेयर

समय से समस्या दूर करने में नाकाम बिजली कंपनियों को अब बिजली उपभोक्ताओं को मुआवजा देना पड़ सकता है। कंपनियों ने विद्युत नियामक आयोग को बताया है कि अप्रैल से ही मुआवजा कानून लागू किया जा सकता है।

मुआवजा की आनलाइन पारदर्शी व्यवस्था लागू करने के लिए पावर कारपोरेशन ने साफ्टवेयर तैयार कराया है। ऐसे में उपभोक्ता की कोई भी शिकायत लाइनमैन से लेकर निदेशक तक के मोबाइल पर दिखाई देगी। उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद की लगातार मांग पर फरवरी 2020 में स्टैंडर्ड आफ परफारमेंस रेगुलेशन 2019 मुआवजा कानून तो बना लेकिन अब तक लागू नहीं हुआ है।

अब कंपनियों ने आयोग से कहा है कि अप्रैल में ही मुआवजा कानून को गो लाइव कर दिया जाएगा। पावर कारपोरेशन ने विद्युत वितरण संहिता के तहत उपभोक्ता समस्याओं के मानकों पर साफ्टवेयर के माध्यम से आनलाइन सिस्टम तैयार कराया है।

कारपोरेशन के मुख्य अभियंता (वाणिज्यिक) एके श्रीवास्तव ने बताया कि जैसे ही उपभोक्ता कोई समस्या अपने मोबाइल से हमारे कंप्लेंट सेंटर में दर्ज कराएगा वैसे ही शिकायत लाइनमैन, अधिशासी अभियंता और निदेशक तक के मोबाइल में दिखाई देने लगेगी। उपभोक्ता को फीडबैक मैसेज मिलेगा। तय समय में समस्या न दूर होने पर उपभोक्ताओं द्वारा मुआवजा की मांग पर कंपनियों को अधिकतम 60 दिन में देना होगा। परिषद अध्यक्ष अवधेश वर्मा के मुताबिक आनलाइन सिस्टम होने से उपभोक्ताओं को कोई दिक्कत नहीं होगी।

उन्हें आयोग द्वारा तय मुआवजा मिलेगा। मसलन, मीटर रीडिंग के मामले में 200 रुपये प्रतिदिन, श्रेणी परिवर्तन में 50 रुपये प्रतिदिन, फर्जी बकाए को बनाए रखने पर 100 रुपये प्रति चक्र, अंडरग्राउंड केबल ब्रेकडाउन पर 100 रुपये प्रतिदिन, काल सेंटर से रिस्पांस न मिलने पर 50 रुपये प्रतिदिन, विद्युत आपूर्ति बढ़ाने के लिए सब स्टेशन की स्थापना के मामले में 500 रुपये प्रतिदिन, नया कनेक्शन के मामले में 250 रुपये प्रतिदिन, भार में कमी के लिए 50 रुपये प्रतिदिन, डिफेक्टिव मीटर सामान्य फ्यूज 50 रुपये प्रतिदिन मुआवजा की राशि तय है।