ईरान का बढ़ रहा है अंतरराष्ट्रीय परमाणु एजेंसी से तनाव, अपने खिलाफ परमाणु प्रस्ताव को राजनीतिक, गैर-तकनीकी बताया

ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सईद खतीबजादेह ने सोमवार को कहा कि अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आइएईए) द्वारा हाल में अपनाया गया ईरान विरोधी प्रस्ताव राजनीतिक और गैर-तकनीकी कदम था। साप्ताहिक संवाददाता सम्मेलन के दौरान खतीबजादेह ने कहा कि बोर्ड आफ गवर्नर्स की बैठक से पहले आइएईए के महानिदेशक राफेल ग्रोसी की इजरायल यात्रा और उनकी टिप्पणियों के लहजे में बदलाव दर्शाता है कि वह गलत समय पर गलत जगह पर थे, गलत लोगों से मिल रहे थे जिसने एजेंसी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया है।

आईएईए से ‘निष्पक्ष और स्वतंत्र’ होने का किया आग्रह

सईद खतीबजादेह ने ईरान के परमाणु स्थलों पर आईएईए के कुछ निगरानी कैमरों को बंद करने का जिक्र करते हुए कहा, ‘हम आईएईए द्वारा इस तरह के राजनीतिक और गैर-तकनीकी उपाय को अनुत्तरित नहीं छोड़ सकते। हमने अपने उपाय किए।’ ईरानी प्रवक्ता ने कहा- लेकिन ईरान और अंतरराष्ट्रीय परमाणु एजेंसी के बीच बातचीत तकनीकी ढांचे के भीतर जारी रहेगी, आईएईए से ‘निष्पक्ष और स्वतंत्र’ होने का आग्रह किया।

गुरुवार को वियना में यह घोषणा की गई कि ईरान ने IAEA को बताया है कि वह अपने परमाणु संयंत्रों से 27 निगरानी कैमरे हटा रहा है। बुधवार को IAEA बोर्ड ऑफ गवर्नर्स ने ईरान पर असहयोग का आरोप लगाते हुए संयुक्त राज्य अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी द्वारा प्रस्तावित एक प्रस्ताव पारित किया।

ईरान ने परमाणु संयंत्रों की निगरानी कर रहे अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आइएईए) के दो निगरानी कैमरों को कुछ दिनों पहले हटा दिया था। जिसके बाद ईरान के परमाणु ऊर्जा संगठन के प्रवक्ता बेहरोज कमालवंदी ने स्टेट टीवी से कहा कि आइएईए के अनुचित व्यवहार के चलते ईरान सहयोग नहीं कर सकता। इसके साथ ही कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि इस कदम से एजेंसी के होश ठिकाने आएंगे और वह ईरान से सहयोग करेगा।

भूमिगत परमाणु स्थलों पर समृद्ध हो रहा है ईरान

आपको बता दें कि ईरान वर्तमान में अपने फोर्डो (Fordo) और नाट्ज्‍न (Natanz) दोनों भूमिगत परमाणु स्थलों पर समृद्ध हो रहा है। दरअसल, अघोषित स्थलों पर यूरेनियम के निशान को लेकर निगरानी एजेंसी के सवालों का संतोषजनक जवाब न देने पर आइएईए के गवर्निंग बोर्ड ने ईरान की आलोचना का मसौदा प्रस्ताव पेश कर दिया था। इसने ईरान की अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस से नाराजगी बढ़ गई।

ईरान पहले से ही आईएईए के निगरानी कैमरों से फरवरी 2021 से परमाणु समझौते को बहाल करने के लिए दबाव की रणनीति के रूप में देख रहा है। ईरान और विश्व शक्तियां 2015 में परमाणु समझौते पर सहमत हुए, जिसमें तेहरान ने आर्थिक प्रतिबंधों को उठाने के बदले में यूरेनियम के अपने संवर्धन को काफी हद तक सीमित कर दिया। 2018 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एकतरफा रूप से अमेरिका को समझौते से वापस ले लिया, जिससे व्यापक मध्य पूर्व में तनाव बढ़ गया और हमलों और घटनाओं की एक श्रृंखला शुरू हो गई।

ईरान ने जोर देकर कहा कि उसका कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है, हालांकि संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों और पश्चिमी खुफिया एजेंसियों का कहना है कि ईरान के पास 2003 तक एक संगठित सैन्य परमाणु कार्यक्रम था।