UPSC क्रैक करने के टॉपर्स के 8 नुस्खे:इच्छाशक्ति, सही तैयारी और आंसर राइटिंग स्किल है सबसे जरूरी

कहते हैं, साहिल के सुकूं से किसे इंकार है लेकिन, तूफान से लड़ने में मजा और ही कुछ है!

– आल-ए-अहमद सूरूर

करिअर फंडा में स्वागत!

आज पेश हैं कुछ ऐसी ही सोच रखने वाले IAS टॉपर्स के अनुभव। वर्षों की टीचिंग की दौरान मैंने पाया है सभी टॉपर्स में कुछ कॉमन पर्सनालिटी एंड थिंकिंग ट्रेट होते हैं, और वही खूबसूरत बातें आज आप से शेयर करने वाला हूं। आइए जानते हैं टॉपर्स की 8 खास बातें…

8 अचूक नुस्खे अपनी परफॉरमेंस को ‘टॉपर परफॉरमेंस’ बनाने के

1) उन्हें वाकई पता था वे क्या चाहते हैं: अपने बरसों के अध्यापन में मैंने पाया जो टॉपर्स होते हैं उनमें सिविल सर्विस जॉइन करने का अपना खुद का जज्बा होता है। मतलब वे किसी और के कहने या मोटिवेशन पर तैयारी नहीं कर रहे होते हैं। ये उनके खुद के भीतर की आवाज होती है जो सिविल सर्विसेज की तैयारी के लिए प्रेरित करती है। वास्तव में UPSC की तैयारी में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, तो जब आप खुद अपनी मर्जी से तैयारी कर रहे होते हैं तो उस तकलीफ को झेल पाते हैं। जो भी मुझसे बात करता है, तो मैं उनसे एक बात जरूर कहता हूं ‘सिविल सर्विसेज की तैयारी तभी करना जब उसे करने के लिए आप के अंदर तीव्र उत्कंठा हो।’

2) वे सिविल सर्विसेज परीक्षाओं की तैयारी को एक वर्ल्ड वॉर की तरह लेते हैं: मैंने अनुभव किया कि सिविल सर्विसिस की तैयारी एक बड़े युद्ध की तरह है जिसमें कई छोटी-छोटी बैटल लड़ी जानी होती हैं। इसमें सफलता बहुत सारे समझौतों, सैक्रिफाइस, हार्डवर्क और बहुत सारे हार्ट-बर्न के बाद मिलती है।आपको बहुत सारे छोटी बैटल्स लगातार लड़नी पड़ेगी। अपने आप से, रिश्तेदारों से, दोस्तों से, समकक्षों से, सक्सेसफुल कैंडिडेट से, आपके दोस्तों में जो सक्सेसफुल हो गया है, मेंटल स्टेट से, फ्रस्ट्रेशन से। क्या आप इतने बैटल्स (छोटे युद्ध) लड़ने को तैयार हैं? कहीं परास्त तो नहीं हो जाएंगे? मैदान छोड़ कर भाग तो नहीं जाएंगे?

3) वे आंसर राइटिंग की प्रैक्टिस पहले दिन से करते हैं: सिविल परीक्षा में सबसे ज्यादा इम्पॉर्टेंट सिंगल थिंग जो निकल कर आती है वो आन्सर राइटिंग स्किल्स हैं। मैंने कई ऐसे स्टूडेंट्स को देखा है जो बहुत ब्रिलियंट होने के बाद भी अच्छी राइटिंग स्किल्स ना होने के कारण सफल नहीं हो पाए। आप को भाषा का स्पेशलिस्ट होने की जरूरत नहीं है, न ही भारी भरकम शब्द इस्तेमाल करने की। साधारण शब्दों का उपयोग करें, लेकिन भाषा को लिखने में बेसिक ग्रामर की गलतियां ना करें, सटीक और टु-द-प्वाइंट लिखें। और इसके लिए पहले दिन से शुरू करें।

4) अपनी स्ट्रेंथ और वीकनेस का ज्ञान: सभी टॉपर्स को अपनी स्ट्रेंथ और वीकनेस के बारे में बहुत अच्छे से पता होता है, और वे उसे स्वीकारते हैं, उससे लड़ते नहीं। इस प्रकार वे हारने वाली लड़ाइयां लड़ने से बच जाते हैं, अपनी स्ट्रेंथ पर फोकस करते हैं और सफलता हासिल करते हैं। क्या आपमें ये मैच्योरिटी है?

5) सुप्रीम कॉन्फिडेंस एंड चियरफुलनेस: ‘यू हैव टु होप फॉर द बेस्ट एन्ड प्रिपेयर फॉर द वर्स्ट।’ सिविल सर्विसेज में सफलता के लिए इतने सारे फैक्टर इतने सारे पैरामीटर, इतनी सारी सब्जेक्टिविटी हैं कि जिसे एग्जाम देने की इच्छा है, उसको यह सोचना चाहिए कि वह इस एग्जाम को कुल कितने साल देना चाहता है। लाइफ केवल एक एग्जाम के आस-पास सिकुड़ कर नहीं रह सकती, उसमें और भी कई सारी चीजें हैं। हर एक काम के लिए एक टाइम लिमिट होती है। किसी को लगता होगा कि यह दुनिया का अंत है तो ऐसा नहीं है। आप सबसे ब्राइट सिविल सर्वेंट बन जाएं, आप सबसे अच्छे पॉलिटिशियन बन जाएं कुछ भी दुनिया का अंत नहीं है। ये समझने का कॉन्फिडेंस, और चेहरे पर मुस्कान, जरूरी है।

6) इफेक्टिव हार्डवर्क: सिविल सर्विसेज में एक अहम बात इफेक्टिव हार्डवर्क की है। आप लोगों ने ग्रीक माइथोलॉजी में सिसिफस की कहानी सुनी होगी जो रोज सुबह पत्थर को पहाड़ पर चढ़ाता था और पत्थर रोज लुढ़क कर नीचे आ आता था। इस तरह का हार्डवर्क न करें बल्कि इफेक्टिव हार्डवर्क करें। टॉपर्स इफेक्टिव हार्ड वर्क करते हैं।

7) जबरदस्त रीडिंग हैबिट्स: अच्छा, सटीक और टु-द-पॉइंट आंसर लिखने के लिए नॉलेज होना चाहिए और उसके लिए पढ़ना होता है। लगभग सभी टॉपर्स जबरदस्त रीडर होते हैं और उनमें यह आदत अक्सर बचपन से पड़ चुकी होती है। कई किताबें पढ़ने वाला एक व्यक्ति एक जीवन में कई जीवन जीता है।

8) संयमित जीवन: लगभग सभी टॉपर्स जीवन संयमित और अनुशासित जीते हैं। यह संयम और अनुशासन पढ़ाई के आगे खाने-पीने की आदतों से लेकर सोने जागने तक जाता है।