10 साल पहले अगवा हुई बेटी वापस लौटी अपने घर, अंजान इंसान बन गया फरिश्‍ता, दर्द और खुशी से भरी ये है सच्‍ची दास्‍तां

दस साल पहले स्कूल से लौटती बेटी के लापता होने पर स्वजन पर क्या-क्या नहीं बीती। खुशियां तो काफूर हो ही गईं, हर शक की जड़ खोदते रहे, हर संभव ठिकानों पर दस्तक देते रहे। बेटी को तलाशते-तलाशते कदम थक चुके थे। वापसी की उम्मीदें भी अस्त हो चुकी थीं। तब, शनिवार को एक फरिश्ते के जरिए बेटी की वापसी हुई तो खुशियों की ‘खुशबू’ महक उठी। स्वजन कभी बेटी को दुलारते तो कभी इस नेकदिल इंसान से गले लग जाते।

बेटी के बिछोह और मिलन की ये कहानी है, मथुरा रिफायनरी में ट्रक चालक उदयवीर सिंह की। वर्ष 2010 में वे मथुरा शहर के बालाजीपुरम कालोनी में धर्मवीर सिंह के मकान में किराए पर रहते थे। परिवार में चार बेटियां और एक बेटा है। तीसरे नंबर की बेटी खुशबू तब चार वर्ष की थी। 30 नवंबर, 2010 को स्कूल से लौटते समय खुशबू लापता हो गई। नामजद पड़ोसी राजेंद्र सिंह को पुलिस ने जेल भेज दिया था। स्वजन और पुलिस के तमाम प्रयासों के बाद भी खुशबू का पता नहीं चल पाया। परिवार ने वापसी की उम्मीद ही छोड़ दी थी। उदयवीर सिंह शहर के लक्ष्मीनगर में रहने लगे।

16 जनवरी को हुआ यूं कि एक शख्स दो बच्चियों को लेकर बालाजीपुरम पहुंचे। धर्मवीर ने एक बच्ची को पहचान लिया। ये खुशबू थी। उन्होंने उदयवीर को फोन पर जानकारी दी। उदयवीर और उनके स्वजन दौड़े-दौड़े आए। बेटी को देख एक सपना-सा लगा, मगर अगले ही पल उसे अपने दुलार भरे आगोश में ले लिया। खुशियों की अश्रुधार ने अन्य लोगों को भी सराबोर कर दिया।

बिछोह की कहानी, मिलन की बेला

खुशबू सहित दो बच्चियों को लेकर आने वाले ने अपना नाम विमल नंद किशोर दीक्षित बताया। वे बड़ोदरा में बैटरी का कारोबार करते हैं। मूल रूप से उप्र के उन्नाव जिले के निवासी हैं। विमल ने बताया कि दस साल पहले बडोदरा में एक दिन रिक्शा चालकों में इन दोनों बच्चियों को लेकर झगड़ा होते देखा। पुलिस को सूचना दी। पुलिस के कहने पर दोनों बच्चियों को घर ले आए थे। एक ने अपना नाम खुशबू बताया तो हमने भी खुशबू नाम ही रहने दिया। दूसरी बच्ची (अंशू) को कालिंदी नाम दिया। स्कूल में दोनों का दाखिला करा दिया। दोनों की परवरिश के लिए अपने दोनों प्लाट भी बेच दिए। कालिंदी खुद को फीरोजाबाद की बताती है मगर तमाम प्रयास के बाद भी उसके माता-पिता का पता नहीं लग पाया है। विमल के एक बेटा है जो अपनी मां के साथ ननिहाल में रहता है।

बडोदरा के विमल नंद किशोर दीक्षित हमारे पास आए थे। दो बच्चियां साथ थीं। एक बच्ची को उसके स्वजन के सिपुर्द कर दिया गया। दूसरी बच्ची के माता-पिता की तलाश में पुलिस सहयोग करेगी।

– राजित वर्मा, इंस्पेक्टर क्राइम, थाना हाईवे, मथुरा

बेटियों को परिवार से मिलाने को दीक्षित ने त्‍याग दिया अपना परिवार

कहते हैं इंसानियत से बड़ा कोई धर्म नहीं है। बडोदरा के विमल नंदकिशोर दीक्षित ने इस धर्म को बखूबी निभाया भी। जिन बच्चियों से उनका कोई रिश्ता नहीं था, उनसे इंसानियत का नाता जोड़ा। अनजान रिश्तों में बंधी प्रीत की डोर ऐसी मजबूत है कि दोनों बच्चियों को उनके स्वजन तक पहुंचाने के लिए दो प्लाट बेच दिए। बच्चियों से ताल्लुक खत्म करने की शर्त नहीं मानी तो नवजात को लेकर पत्नी मायके चली गई। वे कहते हैं कि खुशबू के स्वजन तो मिल गए, अब कालिंदी को उसके घर पहुंचाना है।

बडोदरा में गोरवा थाना क्षेत्र की पार्कउड सोसायटी निवासी विमल नंदकिशोर दीक्षित (50) बताते हैं कि 15 दिसंबर, 2010 को वे दोनों बच्चियों को घर लाए थे। तब उनके कोई संतान नहीं थी। कुछ दिन बाद बेटे का जन्म हुआ। पत्नी ने कहा था कि अब अपना बच्‍चा पालो और इन बच्चियों को यहां से हटाओ। इस पर उन्होंने कुछ दिनों के लिए दोनों बच्चियों को एक मित्र के यहां रख दिया। मगर, वे ही उन्हें स्कूल पहुंचाते और लेकर आते। इसकी जानकारी होने पर पत्नी नवजात को लेकर कानपुर स्थित अपने मायके चली गई। इसके बाद विमल दोनों बच्चियों को अपने घर ले आए। बच्चियों की परवरिश करने को उन्होंने अपने दो प्लाट बेच दिए। विमल बताते हैं कि वे दोनों बच्चियों को लेकर हर साल मथुरा और फीरोजाबाद आते थे। फीरोजाबाद में एक दंपती मिले जिनकी बेटी लापता हो गई थी, मगर न तो दंपती बेटी को पहचान पाए और न ही कालिंदी ने उन्हें पहचाना।

तीमारदारी करने बडोदरा लौटेंगी दोनों बेटियां

विमल के मुख कैंसर का आपरेशन 18 जनवरी को बडोदरा में होना है। दोनों बच्चियों उनके साथ ही बडोदरा लौट जाएंगी। खुशबू के चचेरे भाई धर्मवीर ने बताया कि वे भी एक-दो दिन में बडोदरा जाएंगे।

बहनों के सामने हुआ था अपहरण

30 नवंबर 2010 को खुशबू बड़ी बहन डॉली (17) और ज्योति (16) के साथ स्कूल से लौट रही थी। बहनों के सामने ही उसका अपहरण हुआ था। दोनों बहनें कई दिनों तक सदमे में रहीं। मां लक्ष्मी देवी ने कई दिन खाना नहीं खाया, तो पिता की आंखों से नींद गायब हो गई थी। बेटी को देख पिता उदयवीर और मां लक्ष्मी ने उसे सीने से लगा लिया और खुशी में आंसू बहने लगे। बहनों की खुशी का ठिकाना नहीं था। सबसे छोटा भाई शिवम (9) का तो जन्म भी नहीं हुआ था। दोनों भाई-बहन भी लिपटकर रोने लगे।

मेरे संज्ञान में ऐसा कोई मामला नहीं आया। न ही इस मामले में अब तक किसी ने कभी संपर्क नहीं किया। अगर कोई आता है तो बच्‍ची के परिवार को ढूंढने के प्रयास होंगे।